Monday, 30 November 2020

मुजाहिदे आज़म का पुर खुलूस और मोहब्बत भरा पैग़ाम

मुजाहिदे आज़म इमरान ख़ान ने आज बाबा नानक के यौमे विलादत पर सिख बरादरी को पुर खुलूस मुबारकबाद दी।   उन्होंने अज़्म किया की पाकिस्तान में सिख बरादरी के फलाही कामो को तवज्जो दी जाएगी और उनकी मुक्क़द्दस इबादत गाहों के तहफूज़ की ज़िम्मेदारी उनकी रहेगी।   इस मौक़े पर उन्होंने एक रेलवे स्टेशन का भी ज़िक्र किया जिसके नज़दीक एक क़दीमी सिख गुरूदवारा है और सिख ब्रादरान को माज़ी में यहाँ तक पहुंचने में काफी मशक़्क़त और दुशवारियों का सामना करना पड़ता था।  लेकिन अब उस रेलवे स्टेशन को पूरी तरह नया किया हुआ है।

 

नाज़रीन दो मुल्क दो शख़्सियत दो तंज़ीमेजी हाँ एक भारत एक पाकिस्तान एक इमरान ख़ान एक मोदी एक तहरीके इन्साफ एक भारतीय जनता।   अब फ़र्क़ आप खुद ही देख लीजिये।   जिस बीजेपी की सियासत ही लाशों पर है वोह भले ही सिख हो, मुस्लिम, दलित या फौजी कोई भी चलेगा बस हमें तो हमारा ओजड़ा भरा हुआ चाहिए।   जिस बीजेपी को कांग्रेस को शाकिस्त देने के लिए दिल्ली का ८४ हर दम याद रहता है वोह उन मज़लूम किसानों के ऊपर दिल्ली के ८ और ९ डिग्री ठण्ड में पानी की बौछार छोड़ते हुए शर्म नहीं आई।   ज़ाइफ़ ६० और ७० साल के बूढ़े किसानों पर लाठियां भाँचि कई किसानों के चेहरों पर शदीद ज़ख़्म लग गए।  

 

इससे ज़ाहिर होता है की हर बीजेपी वाला हराम का जना है, इनकी नस्ल में ही गड़बड़ है।   उसपे कट्टर बोलता है की यह हमारे किसान नहीं हैं, दूसरा बीजेपी का आतंकी बोलता है यह तो खालिस्तानी समर्थन हैंबेशर्मी की हद हो गई।  तालिबे इल्म, मस्तूरात, तालीमी आफ़ता, दानिशमंद, किसान अरे भाई किसी को तो बकश दो।   तुम जब अपने हम वतनों के खिलाफ साजिश के साथ इलज़ाम लगा सकते हो, चलो मुस्लिम अवाम से तुमको बोहोत चीड़ है लेकिन सिख बरादरी के लिए तो तुम्हारी  अम्मी की छाती से सदा दूध टपकता रहता है हमदर्दी सदा सबसे ऊपर होती है, हर मुद्दे पर ८४ याद आ जाता है फिर इनके साथ क्यों एक आतंकवादी जैसा बर्ताव किया जा रहा है।   फिर यह कोई आम सिख नहीं हैं यह लोग किसान हैं और इनके हक़ के ऊपर ज़ाफ़रानी हुकूमत ने डाका डाला है, तब यह लोग हुकूमत से बात करने आये हैं।   जब यह बीजेपी वाले अपने खुद के अवाम को बदनाम कर सकतें हैं टुकड़े टुकड़े गेंग, शाहीन की मस्तूरातें ५०० रूपये वाली, शहरी नक्सलवाद, तालिबे इल्म नहीं आतंकवादी तो उसी तर्ज़ पर पाक को सिर्फ बदनाम किया जाता है, असल मुजरिम तो ज़ाफ़रानी गलीज़ और ना जाइज़ नुत्फा है।   हैदरबाद में सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे लेकिन चीन पर फटी पड़ी है।  नेपाल के ऊपर ख़ामोशी तारी हो गई।  एक गलत हो दो गलत हो तीन गलत हो।  अगर सभी जगह सिर्फ तुमसे ही कहा सूनी हो रही है और उसके बाद तुम कुछ ना कुछ इलज़ाम  लगा कर अपने आपको जाइज़ ठहराने की कोशिश कर रहे हो तो साबित होता है की गलती तुम्हारी ही तरफ है।   जब हज़ार लोगों को एक जैसी गलती सिर्फ भारत की तरफ से हो रही है, तो हज़ार गलत होने के बजाये एक भारत ही गलत होगा।    हर उस इंसान के खिलाफ मुखालिफ हवा बहाना  शुरू कर देते हैं यह बीजेपी की ना जाइज़ पैदावार जो इनसे और हुकूमत से लाल लाल आँखे कर के सवाल करता है या अपने हक़ के लिए एहतेजाज करता है।  

 

इससे ज़ाहिर होता है बीजेपी, संघ और हर एक शिद्दत पसंद हिन्दू अपने वाल्दैन की ना जाइज़ औलादें हैं।   जो यह लोग बोलतें हैं उसमे इनकी कोई गलती नहीं है बल्कि इनके हराम और ना जाइज़ नुत्फे की गलती है।   अगर इंसान जाइज़ पैदा हुआ होगा तो बात भी जाइज़ करेगा और ना जाइज़ होगा तो बात उसकी वैसी ही होगी।


जहाँ तबाही और बर्बादी मचाना हो वहां इन बीजेपी वालों को भेज दो, ३०००० पाकिस्तानी और रोहंगिया मौजूद हैंहैदराबाद में सर्जिकल स्ट्राइक करेंगेंहैदराबाद का नाम बदलूंगा, निज़ाम की गुलामी और पुरानी तहज़ीब से अवाम को आज़ादी दिलवा कर रहूंगा।   सियासत करो किसने रोका है लेकिन अपनी नाजाइज़ बातों से अपनी अम्मी की बदकिरदारी और अपने वजूद को तो मत खोलो, तमाम बीजेपी वालों की (नीचे से ले कर तो ऊपर तक) नाजाइज़, झूटी फरेबी, फ़िरक़ापरस्त बातों से उनकी अम्मी किस किस के साथ मुँह काला कर के आई उसके बाद इन लोगों की पैदावार हुई यह ज़ाहिर होता है। 


अगर यह लोग मर्द होते तो अपने किये हुए कामों के जारिए वोट मांगते फिर इनको इस तरह से फिरकावाराना माहौल नहीं पैदा करना पढता। 


बीजेपी वालों ने तक़रीबन समाज और भारत के हर नागरिक के एहतेजाज को कुछ ना कुछ गलीज़ नाम दे कर कुचलना चाहा मुस्लिम, तालिबे इल्म, दानिशमंद, किसान, तालीमी आफ़ता अवाम बस अब तो हिन्दू ही बचे हैं।   उनके खिलाफ जब बीजेपी कुछ ऐसा काला क़ानून बनाएगी तब वोह भी ऐसे ही एहतेजाज करेंगे फिर उनको क्या नाम देगी।   और उसमे आला ज़ात ब्राह्मण, ठाकुर जैसे हिन्दू होंगे। 


इन बेजीपी वालों को किसी से भी हमदर्दी नहीं है और ना ही वतन की मोहब्बत बस इनको अपने आप से मतलब हैआश्रम बिलकुल सही उसी तर्ज़ पर बनी वेब सीरीज़ है।   हरामी काम करना और मस्तूरातों नौजवानों को नशे का आदि बना कर उनका इस्तसाल करना और जिस किसी भक्त की बीवी खूसूरत हो तो उसको नपुंसक बना कर उसकी बीवी के साथ हर रोज़ रात को हरामकारी करना यही काम है बीजेपी वालों का।  इन ६ सालों में तो ना जाने कितने भक्त नए हिजड़े बन गए होंगे और उनकी बीवियां इन बीजेपी वालों के हरम की ज़ीनत। 


तभी तो खुदकशीयों के केसेस बेपनाह बढ़ गए हैं 

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