Wednesday, 25 November 2020

तुम्हारे गुनाहों का कफ़्फ़ारा अवाम क्यों भरे।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज जिस मुद्दे पर आप लोगों के रू बरू आया हूँ वह, हरामकारी और ज़िना से पैदा हुई औलाद से मुतालिक़ है।  अभी तीन रोज़ क़ब्ल एक मज़मून में यही बात कही थी, हराम और ज़िना से पैदा हुई औलाद हरामी होती है, उसको भले ही नाम मिल जाए शोहरत मिल जाए लेकिन अल्लाह और उसके फरिश्तों की लानत उसके पीछे पीछे रहती है। अब ऐसा शख्स जहाँ जाता है अपने पीछे तबाही और बर्बादी के निशान छोड़ जाता है।   दर असल वह नहीं बल्कि उसके जाने के बाद उसके गुनाहों और बदकारी हरामकारी का कफ़्फ़ारा अवाम को भोगना पड़ता है। 

यह बात बीजेपी के तमाम सियासतदानों, उसके मुवाफ़िक़ों, संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम पर सो फि सद लागू होती है, के तक़रीबन यह तमाम लोग ज़न्खे होते हैं (नपुंसक) इनके अंदर क़ुव्वते जिस्मानी, नहीं होती और यह लोग दिमागी मुफ़लिस होते हैं।  इन ज़नख़ों कमज़ोर आदमियों और दिमागी मुफ़लिसों में वह मुस्लिम भी आ गए जो बीजेपी से मुनसलिक हैं। इन बीजेपी, शिद्दत पसंद और संघी दहशतगर्दों की पैदाइश ही उसी तर्ज़े अमल पर होती है जिसका दर्स इनका मज़हब देता है। 

ऐसी पैदाइश और नस्ल का ज़िक्र इस सहाफी ने अपने गुजिश्ता मज़मून में किया है।   ऐसे अफ़राद और अवाम भले ही बड़े बड़े ओहदों पर फ़ाइज़ हो जाएँ नाम, शोहरत कमा लें लेकिन यह लोग अज़ाबे इलाही और उसके फरिश्तों की लानत का मुर्तक़िब होतें हैं।   यह लोग जहाँ जातें हैं बड़ी तादात में तबाही और बर्बादी अपने साथ ले जातें हैं क्योंकि इनके पीछे फरिश्तों की लानत होती है।  इनके मज़हबी एतेक़ाद के हिसाब से अगर किसी शख़्स में मर्दानगी नहीं है और वह ज़न्खा (नपुंसक) है तो उसकी घरवाली पडोसी, देवर या साधू, संतों से नियोग प्रथा के तहत हमबिस्तर हो कर वंश को आगे बढ़ाने वाला दे सकती है।  उसी हिसाब से अगर शोहर अकाल मौत मारा गया तो भी उसकी बीवी देवर के साथ हमबिस्तर हो कर वंश बड़ा सकती है।   अब ऐसी सूरत में रिश्ता और बच्चा कैसे जाइज़ होगा।  और जब विकास पुरुष ही नपुंसक है तो उसका पैदा किया हुआ विकास भी हरामी होगा।  फिर ऐसा विकास अब जहाँ जाएगा लाएगा तबाही और बर्बादी। क्योंकि उसके पीछे पीछे फरिश्तों और मालिके कायनात की लानत और फटकार भाग रही होगी।  ऐसा शख़्स पनोती बाज़ होता है।  जहाँ जाता है पनोती लाता है। 

नाज़रीन शुरूवात मोदी से ही करतें हैं, जिसका ज़िक्र इससे पेश्तर जब से सहाफत की दुनिया में २०१० से क़दम रखा था कई मज़मूनों हिंदी और अंग्रेज़ी में कर चूका हूँ।  २००१ में मोदी गुजरात का वज़ीरे आला बनाया गया था उसी साल २६ जनवरी को गुजरात में सख़्त तरीन ज़लज़ले से देहल उठा।   उसके बाद २००२ में हिन्दू दहशत की साबरमती ट्रैन में आतिशबाज़ी और मुस्लिम नस्लकुशी।  उसके बाद २००५ में गुजरात में बाढ़ जिसमे तमाम गुजरात पानी में डूब गया था जिसमे हज़ारो जाने गई लाखो बेघर हुए वोह अलग बल्कि खरबों रूपये का नुकसान हुआ था। 

उसके बाद भी गुजरात गाहे बा गाहे आसमानी आफत और बाला में मुत्तासिर होता रहा।  फिर मोदी २०१४ में वज़ीरे आज़म मुन्तख़िब हुआ, फिर क्या था, बतौर वज़ीरे आज़म जहाँ गया आफत और बला अपने साथ ले गया।  उसका पहला नेपाल दौरा और वहां से वापिस होते ही नेपाल ज़बरदस्त ज़लज़ले की नज़र हो गया।  

अमेरिका दौरे के बाद वहां जंगल में ज़बरदस्त आग लग गई।  कश्मीर गया वहां तूफ़ान आ गया और बाढ़ से हज़ारों अफ़राद मुत्तासिर हुए।  अल गज़रज हिन्दुस्तान के जिस हिस्से में गया कुछ ना कुछ तबाही और बर्बादी दे कर वापिस लोटा।   फिर २०१९ का तो हाल उससे भी बूरा रहा, जून २०१९ में मुन्तख़िब हो कर आया और नवंबर से ना सिर्फ हिन्दुस्तान बल्कि पूरी दुनिया को तबाही के टिकट दे कर लौटा।  जिस इज़राइल के दौरे पर गया था उसको भी तबाह कर डाला। 

अब बात करतें हैं उसके नौकर अमित शाह की जो एक दरिंदा सिफ़त, शैतान, खुनी, दहशतगर्द, ना जाइज़ औलाद, जल्लाद है। अभी हाल ही में वह वेस्ट बंगाल और तमिल नाडु गया था फिर क्या है तमिल नाडु और वेस्ट बंगाल भी हो गया तबाही और तूफ़ान की नज़र। 

दर-असल इन लोगों के ऊपर ख़ुदा ऐ ज़ुलजलाल की दोहरी मार है।  एक तो इनका नुत्फा जाइज़ नहीं है दूसरा इनकी बदकारियों, बदआमालियों, हरामख़ोरी , नाइंसाफी, दहशत, क़त्ल, ज़िना बिल जब्र जैसे गुनाहों की लानत और फटकार इनके पीछे पीछे भागती है। हमारे मआशरे में एक कहावत कहतें हैं एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा।  करेला वैसे ही कड़वा होता है ऊपर से उसकी बैल को अगर नीम के झाड़ के सहारे ऊपर चढ़ा दी, तो फिर करेले के ज़ायक़े का क्या आलम होगा।  वही हालत इन तमाम ज़ाफ़रानियों, संघियों, बीजेपी वालों के साथ है एक तो इनकी पैदाइश में ही गडबढ़ है, दूसरा इनकी बदबख्ती और गुनाहों का बोझ।  

नाज़रीन अमित शाह अभी तीन रोज़ पहले वेस्ट बंगाल और तमिल नाडु का दौरा याद होगाअभी वह नामुराद दरिंदा डाकू वेस्ट बंगाल और तमिल नाडु से वापिस भी नहीं हुआ था के तूफ़ान के बादल गहरा गए, आज तीन रोज़ बाद तमिलनाडु तूफ़ान की ज़द में आ गया।  

नाज़रीन यह महज़ इत्तिफ़ाक़ नहीं है, बल्कि इस सहाफी ने हर एक संघी, ग़द्दार, गले लग कर सर क़लम करने वाले दरिंदे, मीठा मीठा बोल कर अक़लियतों के वोट ले कर उनको हलाक करने वालों का क़दम बा क़दम हिसाब रखा है की कब किस गद्दार, संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू,दहशतगर्द के गुनाहों का कफ़्फ़ारा और हिसाब अवाम को देना पड़ा।   नितीश कुमार पिछली राये शुमारी में सेक्युलर महाज़ से मुन्तख़िब हो कर आया था, फिर उसने गद्दारी कर के ज़ाफ़रानी महाज़ का दमान थाम लिया। उसके बाद शुरू हुई बिहार में ज़बरदस्त बारिश और तूफ़ान आया था, जिसका ज़िक्र कई अंग्रेजी, हिंदी मज़मूनों और आज तक, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स (अंग्रेज़ी) के खबरनामों में इस सहाफी ने अपना तब्सिरा दिया है। 

उसके बाद आज़ादी के बाद पहली बार ज़ाफ़रानी पार्टी आसाम में आई और तारिख़ की सबसे ज़्यादा ज़बर्दस्त बाढ़ उस साल आई थी पिछले २०० साल का रिकॉर्ड असम का टूटा था और १५० साल का बिहार में नितीश की गद्दार के बाद टूटा था। 

यही हाल अब दहशतगर्द, आतंकवादी, शैतान, दरिंदा, कसाई अमित की तमिलनाडु और वेस्ट बंगाल की दौरे के बाद तबाही हुई।  जैसा की मेने कहा है यह उमूमन देखा गया है की संघियों और इस कसाई अमित का बिल्कुल रिकॉर्ड ठीक नहीं है।  जिस किसी भी जगह वोह जाता है तूफ़ान, बाढ़ या कोई और मुख़तलिफ़ कुदरती आफत उस जगह को तबाह और बर्बाद कर देती है। जून २०१८ के महीने में उसके पहले केरल दौरे ने उस सूबे को तबाह और बर्बाद कर दिया था।   क्योंकि वह वहां दहशत फैलाने, हिन्दू मुस्लिम करने, नफरत और ज़हर के बीज बोने, फ़िरक़ा परस्ती का शैतानी जगा कर हिन्दू वोट की यकजेहदी करने गया था।  उसको संघ या हिन्दू अवाम से कुछ मतलब नहीं था बल्कि वह अपनी वोट बैंक की सियसत और हिन्दू तस्कीन (तुष्टिगुण) के लिए गया था।  उसने संघी दहशतगर्दों के क़त्ल पर रोड शो किया और हुकूमत को उसका ज़िम्मेदार ठराया था जिसका सीधा फैयदा वोह इंतेखाब में लेना चाहता था।  उसकी इस हरामकारी और केरला से लौटने के बाद फ़ौरन वहाँ पर अगस्त २०१८ के महीने में मूसलाधार बारिश हुई जिसमें कम से कम १५०० अफ़राद जाहांबाक हो गए। केरल ने कभी एक सदी में इतनी भारी बाढ़ और बारिश नहीं देखी थी। अवाम ने मस्जिदों में पनाह (शरण) ली और मुसलमानों ने उन्हें ख़ाना और माशी इमदाद की। भारी बारिश के वजह से ज़्यादातर मंदिर ज़मींदोज़ हो गए। उस वक़्त भी इस सहाफी ने अपने कई हिंदी और अंग्रेज़ी मज़मूनों में जिसका ज़िक्र किया था कि इस भारी से बहुत भारी बारिश की वजह कसाई का केरल दौरा है और उसके मनहूस क़दम की वजह से केरल आज तबाह हो गया।  क्योंकि दरिंदे ने केरला के हिंदू मुस्लिम ख़ुलूस और मोहब्बत को मारने की कोशिश है। संघी ख़ास बोलीवूड की नचौड़ी ने इस बारिश की वजह ख़ालिस गाय के क़तल को बताया था। मैंने उन तमाम एहमकों, ज़ेहनी मरीज़ों और मुफ़लिसों को जवाब में कहा की गाये का जबीहा केरला में सदियों से होता आ रहा है यहाँ तक की जब केरल में ६०० ईस्वी इस्लाम आया था उससे पहले भी गाये का जबीहा होता था।   लेकिन एक सदी में कभी इतनी भारी तूफ़ान और बारिश नहीं हुई और जून २०१८ में अमित शाह केरला में फ़िर्क़ापरस्ती के ज़हरीले बीज बो कर आया और अगस्त २०१८ में भारी बारिश हुई।   तो तुम लोगों का गाये के ज़बीहे का फलसफा ज़्यादा पुख़्ता लगता है या इस सहाफी का; की अमित की बदबख्ती, गुनाहों, बदकारी का कफ़्फ़ारा केरल का अवाम भोग रहा है।

इस तमाम मज़मून और तहक़ीक़ात से साबित होता है की संघी, बीजेपी वाले, कट्टरपंथी हिन्दू अपने वाल्दैन की जाइज़ औलादें नहीं हो सकते, फिर यह लोग नपुंसक भी होते हैं, सिर्फ ताली बजाना और घोगरी आवाज़ में चीखना और चिल्लाना ही आता है। जब इनसे किसी भी भोंकने के ऊपर सबूत मांगो तो जैसा साधू करता है इधर उधर की बातों से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं।  भारत में तबाही और बर्बादी मचा कर मालिके मुतलक़ ने इन संघियों, बीजेपी वालों, शिद्दत पसंद हिन्दू नाजाइज़ पैदावार हैं इसका सबूत दे दिया है।  

इनके नपुंसक होने का सबूत खुद इन लोगों ने दे दिया जब इन्होने हैदराबाद में ३०००० रोहंगिया मुस्लिम वोटर लिस्ट में ना जाइज़ तरीकेकार हिकमत इख़्तेयार कर के शामिल हो गए हैंऐसा उल जलूल झूठा बयान दिया, उसके ऊपर असदुद्दीन ने इनको ललकारा की शाम तक ३०००० तो छोड़ो १००० भी ऐसे वोटर ला कर बताओ।  

मेने मेरे कल लिखे माज़ून में कहा था अब अगर यह लोग मर्द होंगे तो सबूत ला कर देंगे, नहीं तो साबित होगा की यह सब अमित को मिला कर ना मर्द हैं।   शाम हो गई ख़तम और अभी तक सबूत हाज़िर नहीं हुआ।   मतलब साबित हुआ की तमाम बीजेपी के कारिंदे, संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू अमित को मिला कर ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ ना मर्द हैंसिर्फ भोंकना और इलज़ाम लगाना जानतें हैं उसको साबित करना नहीं.

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