अज़ीज़ नाज़रीन
मेरे गुज़िश्ता मज़मून हिजड़ों, नपुंसकों (ज़नख़ों) और जालसाज़ की फ़तह। से सख़्त तरीन ईज़ा और ज़र्ब कांग्रेस और बीजेपी को पहुंची है। नाज़रीन जिस इज़हारे ख़्यालात की पैरवी कर के हिन्द के वज़ीरे अज़ाम मुस्लिम दिल आज़ारी को दर किनार कर के फ्रांस के साथ हम क़दम हो गए और इज़हारे तास्सुरात की वकालत कर बैठे जबकी फ्रांस ने बदबख़्ती किसी सियासी तंज़ीम के खिलाफ नहीं की थी किसी सयासी इंसान के खिलाफ नहीं की थी जिसकी तकलीफ और इज़ा महदूत रहे बरक्स इस्लाम के पैग़म्बर और दोनों आलम के मालिको, मुख़्तार के ख़िलाफ़ बदबख़्ती और वाहियात हरकत की थी। जिसकी तकलीफ महदूत नहीं थी बल्कि इस रूहे ज़मीन पर मौजूद ना सिर्फ अरबों सच्चे और पैग़म्बर से मोहब्बत करने वाले मुस्लिम अवाम बल्कि दोनों आलम की हर मख्लूक़ जिन्न, इनंस (इंसान) हजर, शजर, हवा, पानी, मवेशी अलगरज़ हर मख़लूक़ जिसके अंदर जान है उसके दिल आज़ारी का सबब बनी थी। फिर उस तकलीफ को नज़र अंदाज़ करते हुए भारत की इन्तेज़ामियाँ और हुकूमत फ़्रांस सरकार के साथ हम क़दम दिखती है और इज़हारे ख़्यालात की पैरवी करती है उससे साबित हो गया जो भी पैग़म्बरे इस्लाम से बुग्ज़ कीना और नफरत करतें हैं उनमे मोदी भी शामिल हैं, ऊपरी दिखावा और कपड़ों से पहचाने वाला अब खुद ही बरहना हो गया।
भारत अपने यहाँ के १८% में जो कोई भी सच्चे मुस्लिम हैं उनके रूहानी और जज़्बाती लगाओ को नज़र अंदाज़ कर गया, वहीँ दूसरी जानिब रूस जिसके यहाँ मुस्लिम आबादी ना के बराबर होगी पुतिन ने फ्रांस को लताड़ लगाईं और बोले मज़हबी शख़्सियत के ख़िलाफ़ इज़हारे ख़यालात की क़ैद होना लाज़मी है आप किसी मज़हब के करोड़ों अरबों मानने वालों के जज़्बात से इज़हारे ख़्यालात के नाम पर खेल नहीं सकते। वहीँ केनेडा ने भी फ्रांस के ख़िलाफ़ नाक़ाबिले बर्दाश्त फोटो पर एहतेजाज दर्ज किया। नाज़रीन जो बात आज रूस ने बोली है वही बात जब यह ख़ाकसार २०१० में सहाफत की रूहानी दुनिया में आया था तब एक मज़मून और अपने नज़रियात में कही थी। जब शिव सेना के संजय राऊत के सामना में पैग़म्बर के ख़िलाफ़ नाज़ेबा तस्वीर शाया की गई थी। जब बवाल मचा तब भी इज़हारे ख़्यालात की दुहाई दी गई थी, उस वक़्त ख़ाकसार ने साफ़ यही बात कही थी जो रूस के पुतिन कह रहें हैं, की इज़हारे ख़्यालात की कुछ तो मियाद या हद ते होना चाहिए। उसमे साफ़ लिखा था कोई शख्स अपने वतन भारत के ख़िलाफ़, उसकी फौज के ख़िलाफ़ बोल सकता है, हुकूमत के ख़िलाफ़ बोल सकता है एवान के काम काज तोर तरीक़े पर बोल सकता है यहाँ तक की अदलिया के इन्साफ और उसके फैसलों पर भी तनक़ीद कर सकता है बोल सकता है लेकिन इज़हारे ख़्यालात के नाम पर मज़हबी रहनुमाओं के ख़िलाफ़ बोलने का हक़ नहीं होना चाहिए। मेने तब की कांग्रेस हुकूमत से गुज़ारिश की थी इस मुद्दे पर एक क़ानून बनाया जाए जिसमे मुजरिम को सज़ा का एहतेमाम हो।
नाज़रीन अब में अपने असल मुद्दे पर आता हूँ, जो मेरे मज़मून से जुड़ा हुआ है, मेने मोदी और तमाम ज़ाफ़रानी तंज़ीम को ज़न्खा कहा और कोंग्रेस ज़ाफ़रानी तंज़ीम, संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसन्दों की पैरवी कर रही है तो थोड़ी तो तपिश कांग्रेस के ऊपर भी पहुंची होगी। इज़हारे ख़यालात की जो पैरवी कर रहें थे (मोदी ने फ्रांस की हिमायत की) तो उस हिसाब से मेने कुछ भी गलत नहीं लिखा जो है, वही तो कहा। क्या मोदी ताल ठोक कर अपने आप को मर्द साबित कर सकता है। क्या मोदी अपनी लुगाई से अलहदा नहीं है। क्या मोदी मर्दों में दिलचस्पी नहीं रखता है। क्या मोदी के आने के बाद हमजिंसी ताल्लुक़ात (common sex) अब कोई गुनाह नहीं रह गया ऐसा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया है। क्या मोदी के आने के बाद एक शादी शुदा ख़ातून अपनी मर्ज़ी से बग़ैर उसके शोहर की मर्ज़ी के पराये मर्द के साथ हमबिस्तर हो सकती है ऐसा फैसला नहीं आया। अब आप सोचो जब जो दिखता है वही बोला गया तो तपिश सर के ऊपर पहुंच गई फिर जो है नहीं अगर आप लोग उसके ऊपर कुछ भी बोलोगे तो मुस्लिम अवाम की तपिश का क्या आलम होना चाहिए। जवाब दो, पूछता है मुस्लिम, मोदी जी आज तुम से पूछ रहा है मुस्लिम जवाब दो।
ख़ैर इंसान की फितरत, किरदार और उसका आला मय्यारे ज़िन्दगी सिर्फ उसके नुत्फे, घर का माहौल और तालीम से आतें हैं। अगरचे नुत्फे में कुछ घपले बाज़ी है और घर का माहौल भी वैसा ही है लेकिन तालीम आला इदारों और सोहबत अच्छे पाक शफ़्फ़ाफ़ किरदार वालों की इख़्तेयार की तो वोह इंसान भी वैसा ही हो जाता है जैसा की पाक शफ्फाफ और आला किरदार वालों की सोहबत में रहता है। इसीलिए हमारे मआशरे में बोला जाता है अच्छे लोगों में उठो बैठे अच्छों की सोहबत इख़्तेयार करो।
आज इस मुद्दे पर आप लोगों को एक कहानी सुनाता हूँ।
किसी जंगल में एक हाथी रहता था, वोह बेख़ौफ़ और अल्हड़ अपनी जवानी की मस्ती में हर जानिब घूमता फिरता और जंगल की सब्ज़ (हरी) घास पत्ते और शजर को खाता। उस नौ उम्र हाथी पर किसी फरेबी और धूर्त गीदड़ की गन्दी और ग़लीज़ नज़र पड़ी। उसके गिरोह ने एक इजलास बुलाया और अज़्म किया की इस जवान हाथी का गोश्त खाने को मिले तो ज़िन्दगी लुत्फ़ अन्दोज़ हो जाएगी। इस हाथी को मारने की ज़िम्मेदार और क़यादत एक सिन रसीदा (बूढ़े) और तजुर्बेकार गीदड़ को सौपी गई। अब गीदड़ ने उस हाथी से चापलूसी बघारते हुए हुस्ने सुलूक का फरेब किया। और ज़ाहिर ऐसा किया की वोह ही उसका सच्चा हमदर्द और एहबाब है। हर वक़्त वोह गीदड़ अब हाथी के शाना बा शाना रहने लगा। हाथी के लिए हरी हरी घास और दीगर खाने के आशियात मोहय्या करने लगा। अल गरज़ वोह गीदड़ हाथी का एतेमाद हासिल करने में कामयाब रहा और हाथी को भी उसके ऊपर यक़ीन हो चला की यही मेरा सच्चा दोस्त और हमदर्द है। अब हाथी को भी उसके ऊपर एतेमाद हो गया।
अब गीदडों ने फिर से इजलास किया और वक़्त मुक़्क़र्र कर के हाथी को साजिश के साथ हलाक करने की मंसूबा बंदी कर ली, और इस काम को करने के लिए ज़िम्मेदारी फिर से उसी कपटी धोख़ेबाज़ सिन रसीदा (बूढ़े) गीदड़ को दी गई। गीदडों के गोल (झुण्ड) में ते हुआ की तुम हाथी को धोके से जंगल में ले कर आना और हम उसके रास्ते में एक बढ़ा से गढ़ा खोद देंगे जिसको ज़िमनी (झूठे) पत्तों से पोशीदा कर देंगे जैसे ही हाथी उसको ज़मीन समझ कर पैर रखेगा वोह गहरे ग़ार में गिर जाएगा।
अब मंसूबे के मुताबिक़ हाथी को अपनी लच्छे दार झूट फरेबी बातों में उलझा कर बूढ़ा गीदड़ हाथी को घने जंगल की जानिब ले गया और उस ग़ार के नज़दीक आ कर खुद धीमी चाल चला, हाथी अपनी मस्ती में मस्त अल्हड जवानी दोस्त के ऊपर पुर एतेमाद जैसे ही उसने अगला क़दम पत्तों पर रखा वोह गहरे ग़ार में गिर गया। अब उसको गिरता हुआ देख कर गीदड़ फरेबी हसी हसने लगा, अरे दोस्त तुम तो गिर गए, हाथी बोला मेरे प्यारे रफ़ीक़ मेरी जान बचाओ, उसके ऊपर उस गीदड़ ने अपना नक़ली फरेबी चोला, झूठा नक़ाब उतारा और असलियत दिखाई और औक़ात पर उतर गया। गीदड़ बोला जहाँ पनाह मेरी पूछ पकड़ कर आ जाओ। ऐसा कहते हुए अपनी दुम ग़ार में लटका दी।
कहाँ इतना क़वी हाथी और कहाँ गीदड़ की अदना सी दुम अब हाथी को एहसास हो गया की उसके साथ धोखा हुआ है, पर अब बोहोत देर हो चुकी थी। फिर उस बूढ़े गीदड़ ने इजलास में शामिल तमाम गीदड़ों को बुला लिया और गीदड़ों के गोल (झुण्ड) ने चंद ही महीनों में उस हाथी को खा डाला।
इस कहानी से बोहोत बड़ी नसीहत मिलती है वोह यह की हर कड़वा बोलने वाला शख़्स सच्चाई बयान करने वाला शख़्स दुश्मन नहीं होता। कड़वा वही बोलेगा जो हमदर्द होगा सच्चा वही बोलेगा जो बेख़ौफ़ होगा। और हर चापलूस मीठा मीठा बोलने वाला हर वक़्त हमदर्द नहीं होता, अब किसी भी शख़्स से दोस्ती करने से पहले और उसकी बे पनाह चापलूसी आगे आगे करने के पीछे उसका मक़सद तलाशने की ज़रुरत है। कही कोई गीदड़ मीठा मीठा बोल कर आपके अपने घर में तो नहीं घूस आया है, और अब तो भारत गड्डे में गिर चूका है अब तो गीदड़ों का गोल उसको जब तक चट नहीं कर जाते छोड़ेगे नहीं।
दूसरी जब मुक़ाबिल धूर्त, कपटी दोस्त हो तो हाथी जैसा बड़े ढील ढोल जिस्म वाला भी फ़ौत हो जाता है।तीसरी इत्तेहाद में ताक़त है गीदड़ों के इत्तेहाद ने हाथी को भी साफ़ कर दिया।
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