Friday, 13 November 2020

होशियार अवामे हिन्द, नई तर्ज़े ज़िन्दगी के लिए,

 अज़ीज़ नाज़रीन,

आज बोहोत एहम जानकारी और मालूमात के साथ आप लोगों के दरमियान आया  हूँ।   नाज़रीन जिस तरह से आज के दौर में भारत सख्त तरीन मंदी, मुफलिसी, ग़ुरबत और बदहाली के दौर से गुज़र रहा है उससे हिन्दुस्तान में जुर्म बे पनाह बढ़ रहें हैं।   जहाँ एक जानिब बदहाली और मुफलिसी ग़ुरबत तो थी ही वहीं तमाम भारत को एक ही झटके में लॉक डाऊन करने के सबब बड़ी बड़ी कंपनियां मुफ़लिस और दिवालिया हो गई। जिसके चलते भारत का कम से कम ६० फीसद अवाम बेरोज़गारी के दल दल में फस गया है।   

जिन नौ जवानों ने अपने ख़ुशगवार दौर में और दिल खुश तनख़्वाह के ऊपर आलीशान फ्लेट्स लिए थे और कई गाड़ियां थी अब कम्पनीज के बंद होने पर उनके वजूद को बरक़रार रखने का सवाल बन गया है।  ऐसे हालात में यह ज़रूरी नहीं के पेशवर मुजरिम और शातिर बदमाश ही आपके साथ जुर्म करें बल्कि अच्छे तालीमी आफ़ता इंजीनियर,  ग्रेजुएट्स और पोस्ट ग्रेजुएट्स दिगर आला तालीम लिए हुए नौजावन भी आपके साथ जुर्म कर सकतें हैं।  

यह बात इस सहाफी का महज़ दिमाग़ी फुतूर नहीं है बल्कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर की जानिब से जुलाई २०२० में एक हिदायत जारी की गई है।  फिर वज़ीरे आज़म मोदी ख़ुद ही बोल चुके हैं की करोना के बाद आपको नए तरीके से जीना होगा, और जो भी पुरानी आदतें थी उनको बदलना होगा।  अभी पिछले हफ्ते पुलिस दो  इंजीनियरों को चेन स्नैचिंग के जुर्म में गिरतार किया हैजिसकी खबर इंग्लिश रोज़नामा दी हिन्दू में शाया हुई थी।

आप तमाम हज़रात से गुज़ारिश है की अपने साज सामान की ख़ुद ही हिफाज़त करें और मोहताद रहें क्योंकि जुर्म तो बड़ेगें और हर हाल में बढ़ेंगेपहले से जो पेशावर और शातिर मुजरिम उसके ऊपर नए तालीमी आफ़ता बेरोज़गार आ गए जुर्म की दुनिया में।   क्योंकि एक इंसान ख़ुद को भूखा रख सकता है लेकिन अपने बीवी बच्चों को भूखा नहीं देख सकता फिर जो भी आला तालीमी आफ़ता अवाम बे पनाह तादाद में बे रोज़गार हुए हैं उन सबको ग़ुरबत और मुफलिसी में ज़िन्दगी गुज़ारने की आदत नहीं होगी जो आज के हालात हैं।  तो ऐसे हालात में सब नहीं तो तक़रीबन ६० से ७० फीसद जुर्म का रास्ता इख़्तियार कर सकतें हैं और आसान मनी कमाने के जारिए तलाशने के हामी हैं।   इस आसान मनी मेकिंग में सफ़ेद पॉश जुर्म जैसे की धोखा, जालसाज़ी, फरेब झूट बोल कर पैसा कमाना जैसे जुर्म से ले कर चेन स्नैचिंग, चोरी, डाका यहाँ तक की खून तक शामिल हैं।   ड्रग्स, अफीम, कोकीन जैसे मुज़िर असरात डालने वाली चीज़ों में भी दिलचस्पी बढ़ेगी।  इन जैसी ड्रग सप्लाई करने वालों में  ईज़ी मनी मेकिंग मौजूद है।  

मस्तूरातें जिन्सी जुर्म में शामिल हो सकती हैंमतलब अपने जिस्म का सौदा तक करने को मजबूर होंगीक्योंकि मजबूरी एक ऐसी बीमारी है जो इंसान से हर तरीक़े के काम करवाती है।   इंसान ख़ुद भूखा सो सकता है लेकिन अपने बच्चों को भूखा नहीं देख सकता, उसके लिए उसको चोरी, करना पड़े डाका डालना पड़े या जिस्म फरोशी के दल दल में जाना पड़े तो जाएगा। 

आप तमाम हज़रात से गुज़ारिश है की किसी भी ना वाक़िफ़ इंसान से बात चीत उतनी ही करें जितनी के ज़रूरी हो, ग़ैर ज़रूरी बातों में उलझा कर हो सकता है की आपके साथ धोखा हो जाए।   और आप जुर्म का शिकार हो जाए।   या तो आपके साथ कोई हादसा हो जाए (चोरी, डाका या धोखा) या आपको मोहरा बना कर कोई आपका इसतेसाल करे।  

ख़ास ऑफिस आने जाने वाले हज़रात सिर्फ उन्ही लोगों से बात चीत का दायरा बढ़ाएं जिनके साथ वोह लॉक डाऊन से पहले जाते थे और उनको उनकी दिमागी कैफियत को अच्छी तरह से जानतें हैं।  

क्योंकि इस लॉक डाऊन ने तमाम दुनिया को एक अलग ही चश्मा दे दिया है जिसमे अब मुजरिम कौन है और कौन मुंसिफ पहचाना बड़ा ही मुश्किल होगा।   पड़े लिखे भी जुर्म में मुलव्विस होंगे और अनपढ़ पेशावर तो हैं ही।   

हाइवे या ऐसी सूनी रोड पर मोबाइल वगेरा पर हरगिज़ बात ना करें, या केश वग़ैरा नहीं गिनें, क्योंकि मुजरिम आपके हाथ से आशियात मोबाइल छीन के किधर रफ्फू चक्कर हो जायेगा आपको भनक तक नहीं लगेगी।  

महिलायें नक़ली ज़ेवर वग़ैरा का ज़्यादा इस्तेमाल करें और अपने पर्स में कॅश, मोबाइल की हिफाज़त करें।   जहाँ तक हो अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड का ज़्यादा इस्तेमाल करें जिसका पिन कोड आपको ज़ुबानी याद हो, और कॅश ज़्यादा साथ ना ले जाएँ।  सिर्फ उतनी ही केश साथ रखे की अगर पर्स वग़ैरा छीना जाता है तो ज़्यादा नुकसान ना हो। 

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...