अज़रबाइजान ने ३-टी के बल पर अर्मेनिया से जंग जीत ली है और उसको धुल चटा डाली। क्या है यह ३-टी जिसकी वजह से भारत और उसकी फौजें ज़बरदस्त ख़ौफ़ और दहशत में जीने को मजबूर हैं। ऐसी ख़बर मिली की भारत की फौज दोनों जानिब से घिर गई है एक तरफ लद्दाख पर चीन और दूसरी जानिब पाकिस्तान जिसने अभी तक भारत के हिस्से जम्मू कश्मीर पर क़ब्ज़ा कर लिया है। भारत की फौज हिमाचल प्रदेश की सरहद से घबरा कर भाग रही है, जिससे पाक फौजों को मज़ीद आगे बढ़ने का हौसला मिल रहा है। भारत की फौज के पैर पहले जम्मू कश्मीर से उखाड़े और अब हिमाचल प्रदेश से उखड रहें हैं और भारत की फौज हिमाचल जम्मू सरहद से कई किलोमीटर दूर चली गई है। इससे क़ब्ल भारत के वज़ीरे आज़म बजाये जम्मू कश्मीर जाने के जैसलमेर में जा कर भारतीय फौज की हौसला अफ़ज़ाई कर के आये।
जिस ३-टी के ज़रिये
अज़रबाइजान ने ४५ दिनों से ज़ाइद चल रही जंग को जीत लिया है और अब अर्मेनिया की हार
के साथ जंग ख़त्म हो चुकी है। उसी ३-टी पर अब पाकिस्तान
अमल कर रहा है।अज़रबाइजान और अर्मेनिया के
दरमियान गुजिस्ता ३० सालों से चल रहा गतिरोध और जंग अब अज़रबाइजान की जीत के साथ
ख़तम हो गया है। अज़रबाइजान ने अर्मेनिया की फौज को
तबाह कर दिया उसकी धज्जिया उखाड़ डाली और जितने भी मुतानाज़े इलाक़ों पर अर्मेनिया ने
ना जाइज़ क़ब्ज़ा कर रखा था एक ही झटके में उन सब को अर्मेनिया की फौज के खून से
सुर्ख कर पाक कर डाला। नार्गानो कराबाग़ से
अब अर्मेनिया का राब्ता पूरी तरह से टूट गया है। इस जीत में ३-टी ने एहम किरदार अदा किया है। यानी टेक्नोलॉजी, तकनीक या हिकमते अमली और
तुर्की।
इस जंग में अर्मेनिया को
बोहोत ज़्यादा नुकसान हुआ है। अज़रबाइजान की फौज ने
अर्मेनिया को
१ नेस्त
नाबूत: कर डाला
२. नामो निशान खलास:
मुतानाज़े इलाक़ों से
३. सर क़लम: अर्मेनिया के
फ़ौजिओं की हलाकत
४. ज़नख़ों (हिजड़ा, नपुंसक) की जमात हो: अर्मेनिया फौज साबित
हुई
५. गीदड़ सफाया: नार्गानो कराबाग़ से ।
इस जंग में अर्मेनिया के
१८५ टैंक, ४४ इन्फेंट्री फाइटिंग व्हीकलस, १४७ टो अरट्रिलरी, १९ सेल्फ प्रोपेड अरट्रिलरी, ७२ मल्टीबेरल रॉकेट लॉन्चर्स और १२ रडार
तबाह हुए। इस जंग में ड्रोन फैसलाकुन साबित हुए, अर्मेनिया के वज़ीरे आज़म पशियन ने कहा की
हमारे पास ड्रोन हमलों का कोई जवाब नहीं था। और अज़रबाइजान के पास आला
किस्म के जदीद ड्रोन थे जो दर्जे हरारत, बर्क़ी सिग्नल के ज़रिये हदफ़ का पता लगा लेते थे और उसको तबाह कर डालते थे। इस जंग में तुर्की का एहम किरदार रहा जिसने सीरिया की जंग में रूस के
एस-३००, एस-४०० मिसाइल डिफेंस
सिस्टम तबाह कर दिया था।
अज़रबाइजान को पाकिस्तान ने भी जंग में मदद की थी और अज़रबाइजान के वज़ीरे आज़म ने पाकिस्तान को जंग के इक़्तेदाम पर किसी भी किस्म की ताऊन और मदद का भरोसा दिया था। नाज़रीन जिस अंदाज़ में ३-टी ने अज़रबाइजान को फतहयाब किया है उसी तर्ज़ पर पाकिस्तान भारत के दरमियान ३ फेस में जंग हो रही है। जिसको नक़्शों के ज़रिये आप हज़रात को समझाने की कोशिश करूगांग। पहला मरहला मुकम्मल हो चूका है, दुसरे के लिए जंग चालू है और तीसरे पर काम करना होगा।
नाज़रीन आज कल की ताज़ा सूरते हाल यह है की पाकिस्तान की फौज तमाम जम्मू कश्मीर पर क़ब्ज़ा कर चुकी है और मज़ीद हिमाचल, हरयाणा, उत्तर प्रदेश में आगे की जानिब कूच कर रही है। दिल्ली के वज़ीरे आला ने दिल्ली को फिर से एक बार लॉक डाऊन की अज़ीयत में झोक दिया है, उसकी वजह ही पाक फौज का ज़बरदस्त यलग़ार है। १९७१ से ले कर अगस्त २०१९ तक हर शिद्दत पसंद हिन्दू (कांग्रेस को मिला कर), संघी, बीजेपी वाले, लंगूर और लँगूरनियाँ पाकिस्तानी अवाम और मेरे जैसे मुस्लिम की दिल आज़ारी करते थे, ९३ हज़ार फ़ौजिओं को माफ़ कर दिया, पाकिस्तान के टुकड़े कर दिए वग़ैरा।
फिर २०१७-१८ के बाद से
चीज़ें एक दम से तब्दील होना शुरू हो गई। अब भारत का अवाम बेहेस
मुबाहिसे में ख़ौफ़ ज़दा रहने लगा और अपनी फौज की कारगरदेगी पर उतनी शिद्दत से नहीं
बोल पाता था। २०१८ से इस सहाफी ने उन
तमाम बदबख़्त, शिद्दत पसंदों, दहशतगर्दों, बीजेपी वालों और लंगूर-लँगूरनियों को खुल के जवाब
देना शुरू किया तुम्हारा हर कर्ज़ा सूद के साथ अदा कर दिया जाएगा।जिस फौज के ऊपर तुम बोहोत पुर एतेमाद हो वोह भी ऐसे है हथियार डालेगी जिस
तरह से तुम १९७१ की बात करते हो। फिर अगस्त
२०१९ में भारत ने मज़ीद दरअंदाज़ और दहशतगर्द जम्मू कश्मीर भेजे और जंग मज़ीद दिलचस्त
मरहले में पहुंच गई। उसके बाद पाकिस्तान के
वज़ीर रेलवे शेख रशीद साहब से एक लंगूर ने वही बात कर डाली ९३००० को भीक में
ज़िन्दगी दे दी और पाक के दो टुकड़े हमने कर दिए थे।फिर जिस अंदाज़ में उस लंगूर को उन्होंने ललकारा था और बोला था मोदी अपने
वजूद को पछतायेगा आपका तमाम कर्ज़ा सूद समेत वापिस कर देंगे और यह हमारा वादा है। वोह अब सही साबित होता दिख रहा है।
दुसरे मरहले के लिए जंग जारी
क्योंकी किसी भी मुल्क की फौज के आला तरीन हथियार जंग में फतह नहीं दिलवाते हैं बल्कि उन हथियारों के सही इस्तेमाल और सही हिकमते अमली से जंग फतह होतीं हैं। और भारत की फ़ौज तो इतनी तजुर्बेकार है की पुलवामा के बाद २५ दिन की मश्क़ लगी उसको पाक को जवाब देने में वोह भी भारतीयों की हस्बे आदत और खून-नुत्फे का सबूत देते हुए डाकू की तरह रात की तारीकी में ३ बजे हमला किया। वहीँ पाक ने २२ घंटों में भारत की नामाक़ूली और हिमाक़त का जवाब दे दिया वोह भी डंके की चोट पर दिन के उजाले में पूरी सूरज की रौशनी में और भारत के दो फ़िज़ाई तय्यारे टपका दिए एक पाइलट मौत के घाट उतार दिया गया दूसरा गिरफ्तार कर लिया गया, उसको भीक में वापिस दे दिया।
कभी कभी ज़्यादा एतेमाद भी इंसान को खड़े में डालता है। मोदी के ऊपर तमाम लंगूर-लँगूरनियाँ शिद्दत पसंद काफिर, बीजेपी वाले और संघी पुर एतेमाद थे, फौज के ऊपर बे पनाह एतेमाद, हमारी फौज दुनिया की बेहतरीन फौज है किसी भी हिमाक़त का सामना कर के दुश्मन को धुल चटाने में सक्षम।हमारा मुल्क बोहोत बड़ा है, अगर एक एक भारतीय सरहद पर जा कर सू सू करेगा तो पाकिस्तान बह जाएगा। और यही ग़फ़लत और खुद एतेमादी भारत के लिए पस्ती का बाइस बनी और भारत आज वहां खड़ा है जहाँ से उसने १९४७ से शुरूवात की थी और १९५० में दस्तूर बनाया था।



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