Monday, 27 June 2022

टॉनिक वाली बाई का टॉनिक गटर में गया

 अज़ीज़ नाज़रीन,

ज़ाफ़रानी लंगूर-लँगूरनियों से मोदी हुकूमत हुई परेशान।

हमारे मआशरे में एक कहावत कही जाती है "मान ना मनवा खीर ना खाये, झूठी पत्तल चाटने आये", अब मोदी इन्तेज़ामियाँ को भी लंगूर लँगूरनिओं की उछल कूद और दहशत से तकलीफ का एहसास होने लगा है।  फिर वही बात होती है जब इस सहाफी ने २०१४ से चीख़ चीख़ कर कहा था इनके ऊपर अंकुश लगाओ,  उसके बाद २०१९-२० से तमाम भारत में आज़ाद सहाफी और अवाम ने इन ज़ाफ़रानी लंगूरों के खिलाफ बग़ावत कर डाली।  तब तो सूना नहीं और जब आलमी दबाव बढ़ने लगा तो लगा दी लंगूर और लँगूरनियों के ब्रीडिंग प्लेस मतलब ज़ाफ़रानी मीडिया हाउसों पर सख़्त हिदायत। जब भारत में सभी लगाम लगाने का बोल रहे थे फिर भी मोदी इन्तेज़ामियाँ को इन लंगूर और लँगूरनियों के आतंक पर अंकुश लगाने की कोई फ़िक्र नहीं थी।  हाँ भाई जब टॉनिक वाली बाई टॉनिक पिला पिला कर एक बूढ़े को जवान बना रही है तो उस बूढ़े को भी क्या हाजत पड़ी है की अपनी लुगाई को वापिस लाये या ऐसी ज़मीर फ़रोश लँगूरनी के ऊपर अंकुश लगाए जो अपने शोहर को कभी कभी बोल देती है की नहीं आज नहीं आज बोहोत थक गई, लेकिन मुझे टॉनिक पीला कर दे रही है तो क्या हाजत है रोक लगाने की। 

लेकिन अंकुश कब लगा जब आलमी बरादरी में काना पूसी होने लगी।  और आलमी सहाफी भारत के वफंद से तीखे और चुभते हुए सवाल करने लगे, आपकी हुकूमत का लंगूर और लँगूरनियों से क्या पोशीदा रिश्ता है।  क्यों लंगूर और लँगूरनियाँ मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ झूठे फरेबी ख़बरें  चलाते रहतें हैं।  एक टॉनिक पिलाती है तो दूसरी अपने नाम के पीछे मोदी का नाम लगा लेती है, तीसरी चीनी हमले पर सेना को ही कटघरे में खड़ा कर देती है, बोलती है अगर चीन ने दरअंदाज़ी की है, फौज के अराकीनों को मारा है तो यह सेना की गफलत है अब मोदी जी थोड़ी सरहद पर हिफाज़त करने जायेगें।

२०१४ से जितना ज़हर इन लंगूर और लँगूरनियों ने अवाम में भरा है शायद वोह पूरी हिन्दू सक़ाफ़त (सभ्यता) को एक नाग से ज़्यादा ज़हरीला बनाने के लिए काफी है।  लीचिंग मुस्लिम अवाम की होती लेकिन इलज़ाम मुस्लिम अवाम पर रखते थे यह लंगूर।  लव जिहाद, आई ऐ अस में मुस्लिम नुमाइंदगी पर 'तालीमी जिहाद', ज़मीन जिहाद, तब्लीग़ी जमात को तो करोना बम तक बोल डाला था।  ट्रिपल तलाक़, "का" एन आर सी जैसे आतिशी मुद्दों पर सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ ज़हर ही भरा गया था। 

लेकिन जब आलमी फ़ज़ीहत हुई और आलमी बेइज़्ज़त्ती पार्टी बानी भाजपा तब जा कर मोदी इन्तेज़ामियाँ की नींद खुली और टॉनिक वाली बाई का टॉनिक फ़ौरन फेक दिया और उसको सख्त हिदायत दी मरदूत तूने टॉनिक पिला पिला कर मेरा ५६ इंची सीना ५ इंच का कर दिया आगे से अगर तू थकी हुए रहे तो खुद टॉनिक पी लेना और अपने शोहर का साथ देना लेकिन मेरे पास ना आना।  नहीं तो जूते पड़ेगें मतलब तेरा प्रोग्राम होगा बंद। तेरा हुक्का पानी बंद। 

अभी तक ज़ाफ़रानी तंज़ीम, शिद्दत पसंद हिन्दू और संघी दहशतगर्द लंगूर लँगूरनियों की बेहयाई पर फूले नहीं समाते थे।  लेकिन जब से आलमी लपाड़े पड़ें हैं क्या मोदी क्या भोगी और क्या योगी सभी की ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की नीचे रह गई है।  

Zuber 

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