अज़ीज़ नाज़रीन,
भारत रावण की लंका ही साबित हो रहा है। जहाँ पर राम राज्य की तवक़्क़ो करना बेवक़ूफ़ी ही है। माज़ी में और मौजूदा दौर में जैसा श्री लंका का हाल हुआ था वैसा ही भारत की लंका का हो रहा है आगे और होगा। क्योंकि भारत में इन्साफ के लिए भी दोहरे माप दंड हैं। गिरफ्तारी का पैमाना भी दोहरा है। जहाँ अदलिया भी दहशतगर्द हैं, जहाँ क़ानून दहशतगर्दों का बनाया हुआ है, जहाँ वकील भी दहशतगर्द हैं। सूबे शुमाल (उत्तर प्रदेश) का नया चीफ जस्टिस जो खुद ही ते करता है की कौन मुजरिम हैं और किसको क्या सज़ा देनी है जो खुद ही ते करता है की सज़ा का पैमाना क्या होना चाहिए। वोह चीफ जस्टिस अल्लाहाबाद हाई कोर्ट से ज़्यादा अफ़ज़ल और क़ुव्वत वाला है। अल्लाहाबाद हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस उसके जूते साफ़ करता है।
नाज़रीन ज़ाफ़रानी तंज़ीम हर वक़्त दोहरा रुख़ रखती है। एक जानिब एक्शन दूसरी जानिब एहतेजाज। नबी की शान में गुस्ताखी करने वाली नूपुर शर्मा और नवीन जिंदाल को पार्टी से बरतरफ़ कर दिया गया और पार्टी ने उसके बयानों से किनारा कर लिया। इतना ही नहीं उनको और उसके तमाम राकून हूकूमते हिन्द इस बात से बोहोत ही मुत्मइन दिख रहे थे की हमने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदाल को पार्टी से बरतरफ़ कर दिया। इतना ही नहीं ऐसे अनासिरों को हूकूमते हिन्द ने फ्रिंज क़रार दिया।
नाज़रीन आज वेस्ट बंगाल की वज़ीरे आला ममता बनर्जी ने फरार नूपुर शर्मा के बयान पर ऐवान में मज़म्मत पेशकश की। जब मज़म्मत पेश किया जा रहा था तब ज़ाफ़रानी तंज़ीम के रकूनों ने ऐवान में दहशत का माहौल कर क़ेहर बरपा कर दिया। अब यह सहाफी इस बात को समझने से क़ासिर है जब ज़ाफ़रानी तंज़ीम ने ऐसे अनासिरों को पार्टी से हकाल पट्टी कर दी जो तमाम पुलिस रिकॉर्ड में फरार मुजरिम एलान होने वाली है ऐसे दहशतगर्द अनासिरों के लिए ज़ाफ़रानी तंज़ीम के दिल में दर्द काहे को हो रहा है। मतलब जो एक्शन ज़ाफ़रानी तंज़ीम ने अरबों के दबाव में किये थे वोह महज़ एक दिखावा थे और अंदुरूनी सब मिली भगत है। जिसका ज़िक्र में पहले ही कर चूका हूँ।
नाज़रीन यहाँ तीन बातें साबित हो रही हैं एक ज़ाफ़रानी तंज़ीम ने जो भी हिकमत नूपुर शर्मा और नवीन जिंदाल के खिलाफ ली वोह ना सिर्फ दिखावा थी बल्कि अंदुरनी मिली भगत है दूसरी ज़ाफ़रानी तंज़ीम के रकूनों में अनुशासन की कमी है तभी तो उन्होंने ममता बनर्जी के मज़्ज़म्मत की पेशकश पर क़ेहर बरपा किया और ऐवान को दहशत में डाल दिया। तीसरी बात ज़ाफ़रानी तंज़ीम ने अपने तमाम रकूनों को इस बात की इत्तेला ही नहीं दी की अब नूपुर शर्मा और नवीन जिंदाल जैसे अनासिरों से पार्टी का कोई सरोकार नहीं है। ऐसे अनासिरों के मुवाफ़ेक़त में एहतेजाज करने वालों बयान देने वालों के खिलाफ भी पार्टी एक्शन लेगी।
नाज़रीन इस सज़ा देने के दोहरे मापदंड में शामिल है रावण की लंका (भारत) की उस चौडेल का नाम जो अपने मुँह से हगती है और हगने की जगह से खाती है। नाज़रीन नबी की शान में बदकलामी की गई अदना दर्जे के साथ उनको मुखातिब किया गया। झूट फरेब बांधा और जब नबी के मानने वालों की दिल आज़ारी हुई और उन्होंने अमन पसंद एहतेजाज किया तो पुलिस ने उनके ऊपर लाठियां बरसाई और संघी दहशतगर्दों ने पत्थर बरसाए। उन दुखे हुए दिलों के निहत्ते मासूम मुसलमानों पर बंद कमरे में मार पीट की गई।
नाज़रीन फिर अगर मुसलमान एहतेजाज करतें हैं हुकूमत से सवाल करतें हैं तो काहे को चीफ जस्टिस ऑफ़ उत्तर प्रदेश उनको गोलियां मारने का हुकुम देता है। काहे को चीफ जस्टिस ऑफ़ उत्तर प्रदेश उनके घरों को नाजाइज़ हिकमते अमली से मिस्मार करता है। निज़ाम ज़प्त तुम्हारी तंज़ीम में नहीं तुम्हारे आराकीनों में नहीं और तुम एक्शन मुसलमानों पर लेते हो। ज़ाफ़रानी तंज़ीम के कोई भी रकून हों तर्जुमान हो उसकी गाली गलोच करने की अदना दर्जे की बोली बोलने की एक आम सक़ाफ़त होती है। दरअसल यह इन लोगों की ग़लती नहीं है। इनके किरदार और उस दाखिल उस नुत्फे की ग़लती है जो हलाल काम करने से घबराता है। फिर मंदिरों और साधुओं से जैसा नुत्फा इनके अंदर दाखिल हुआ तो उनके पास आदत अतवार भी वैसे ही आ जातें हैं।
Zuber
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