Friday, 10 June 2022

नामूस-ए-रिसालत पर दीवानों का मर मिटने का जूनून।

अज़ीज़ नाज़रीन,

नामूस--रिसालत पर दीवानों का जूनून देख कर ख़ाकी दहशतगर्द, शिद्दत पसंद काफिर, संघी और बीजेपी वालों होश फ़ाक्ता हो चुके हैं।  तामाम भारत आतिशे नार और हूजुमे अहमद सल्लम के दीवानों से भर गया है।   अब इन दीवानों को तुम बंदूक की गोली या गिरफ्तारी का क्या ख़ौफ़ दिखा रहे हो।  अरे साधू, हिटलर मोदी, अमित शाह, फौजी सरबारह इनकी दीवानगी देख कर तुमको लगता है की अब यह लोग रुकने वाले हैं।  या कोई भी ख़ौफ़ इनके ऊपर ग़ालिब हो सकता है। 

अभी तो यह जूनून सिर्फ मोमीनों और सच्चे आशिक़े रसूल का है।  जैसा की इससे गुजिश्ता मज़मून में कहा जा चूका है की नबी दोनों आलम के नबी हैं इंसान, जिन्नात, फ़रिश्ते, हजर, शजर, हैवान, चरिन्द परिन्द हवा, चाँद सूरज तारों की कहकशा, जन्नत, दोज़ख सभी के लिए नबी हैं।  तो उनकी बेहुरमती पर जो इज़ा एक सियासतदान हर सच्चे मोमीन या एक आम मुसलमान को होती है वही इज़ा हर उस शे को होती है जो नबी से जुड़ा हुआ होता है।  अभी तो ग़ैर मुस्लिम अवाम का एहतेजाज होना बाक़ी है, जो नामूसे रिसालत का एहतेराम करतें हैं।  भले ही वोह अपने आपको हिन्दू क्रिस्चियन, सिख कहतें हैं लेकिन वोह किसी भी मज़हबी पेशवा की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं करते।  फिर इंसानों के बाद यह तमाम शे जिन्नात, फ़रिश्ते, हजर, शजर, हैवान, चरिन्द परिन्द हवा, चाँद सूरज तारों की कहकशा, जन्नत, दोज़ख अपना एहतेजाज दिखायेगें। 

तो शिद्दत पसंद काफिरों पस इतना जान लो की तुम्हारी मौत और बर्बादी अब तुमसे उतनी ही दूर है जितनी दूर यह दीवानों का हुजूम है।  अब कोई भी हिकमत काम आने वाली नहीं है।  फिर भी इन बीजेपी वालों की मेहफ़ूज़ करने की गलीज़ ज़ेहनियत ख़त्म नहीं हुई।  नक़वी उन कचरे की फैक्ट्रीज को बचाने में लगा है।  बोलता है एक इंसान के लिए तमाम भारत को तबाह मत करो।  

नक़वी बोलता है कुछ लोग साजिश कर के भारत को कमज़ोर कर रहें हैं और भोले भाले अवाम को भड़का रहे हैं।  नक़वी साहब मतलब आपको खुदा ऐ ज़ुल्जलाल पर यक़ीन ही नहीं है।  तुम तो अपने आपको मुसलमान कहते हो फिर हदीस क़ुद्सी को अगर नहीं मान रहे हो तो तुम मुसलमान कैसे हो।  ख़ैर तुम्हारा ईमान वही है की अगर मुसलमान बड़े का गोश्त खाने को मरे जा रहे हैं तो यहाँ नहीं मिलेगा सऊदी में जाएँ।  यह हिन्दू राष्ट्र है।  चलो तुम्हारी बात मान ली मुसलमानों को साजिश के तहत भड़काया जा रहा है।  लेकिन हिन्दुस्तान की तक़दीर में बर्बादी लिख दी गई है और अब इस्लामिक मुमालिक बनने से उसको कोई नहीं रोक सकता।  क्योंकि इन ८ सालों में हर वली ख्वाजा गरीब नवाज़ से ले कर तो ओरंगज़ेब तक फिर नबी की शान को पामाल किया गया है।  और अब जंग हदीसे क़ुदसी के हिसाब से अल्लाह से है।  तो कैसे तुम भारत को बचा सकते हो।  हरगिज़ नहीं होगा वही जो लिख दिया गया है।   

नक़वी जी आपके और शाहनवाज़, मोहसिन, ज़फर जैसे मुनाफ़िक़ों के बारे में हम २०१७ से आगाह कर रहे थे की तुम्हारी मौत बोहोत भयानक होगी।  तुम जैसे लोग हरगिज़ हरगिज़ नहीं बचोगे।  

नक़वी जी, शहनावाज जी, मोहसिन जी, ज़फर जी, लंगूर जी, लँगूरनियों जी तुमलोगों ने अपने दिल की खूब कर ली।  २०१४ से हम यही कहते रहे थे की जब आग लगेगी तो हमारा तुम्हारा नहीं देखेगी वोह तो हर उस चीज़ को जला कर भस्म कर देगी जो इसकी ज़द में आएगा।  अब ना तो तुम्हारी गोली और बोली और ना ही फौज इन दीवानों का रास्ता रोक सकतें हैं।   जब कश्मीर में हुर्रियत के हामी कुछ ज़्यादा फौजी नहीं थे लेकिन ७० साल तक दिफ़ा किया।  तो भारत में नबी की शान पर हर मोमिन मर मिटने को तैयार है।  कितनों को हलाक करोगे हर कोई मरने को तैयार है, हर कोई गिरफ्तारी देने को तैयार है।  हम भी तैयार हैं।  चलो जाओ मैदान में। 

अब काफिर शिद्दत पसंदों, संघी दहशतगर्दों, बीजेपी वालों हिजरत करना शुरू कर दो।  जून को जो भारत के नक़्शे में मेहफ़ूज़ जगह बताई है वहां चले जाओ।  इससे पेश्तर २०२० में हिजरत पर दो तीन मज़मून लिखे हैं।  हिजरत ही एक वाहिद रास्ता।  फिर कई नज़्मे भी लिखी हैं।  उन मज़मूनों और नज़्मों पर मुस्लिम सियसतदाँ बोलने लगे एक और हिजरत अब मुमकिन नहीं।  अब हम हिजरत नहीं करेगें हम यही रहेगें यही मरेगें।  तो वोह हिजरत हमारे लिए नहीं थी बरक़्स दुश्मने इस्लाम के लिए थी। 

एटम बम अकबर भाई का अज़्म याद रहा है।  सून ले मोदी, सून ले योगी सून ले अमित शाह सून लो आर एस एस वालों हम यही रहेगें यही मरेंगे हम नहीं जाने वाले हम तुम को भगाएगे।  

फिर दूसरी बात मरहूम राहत इन्दोरी साहब का शेर याद गया। 

लगेगी आग तो आयेगें कई घर ज़द में,

यहाँ हमारा ही मकान थोड़ी है। 

ग़लती की ऊपर से मुजरिम सज़ा देने के उसकी पर्दादारी कर रहे हो।

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