Saturday, 25 June 2022

ख़तम हुई दूसरी ललकार की भी मियाद।

अज़ीज़ नाज़रीन,

संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसंद काफिरों और ज़ाफ़रानी हाकिमों को बरोज़ १० जून मज़मून माहे ज़िलहिज्ज ईद क़ुर्बान का बेसर्बी से है इंतज़ार। के मार्फ़त दूसरी ललकार दी थी।  पहली के मुक़ाबले इस ललकार में और आसान बना दिया था जिसमे मिलने का वक़्त, जगह और मोबाइल नंबर तक दिए गए थे।  ताके किसी क़िस्म की दुश्वारी ना हो, लेकिन ना तो ज़ाफ़रानी हाकिम हमको गिरफ्तार कर पाए और ना ही संघी दहशतगर्द क़तल कर पाए। 

नाज़रीन यह हुकूमत लंगूर-लँगूरनियों और अपने शिद्दत पसंद अक़ीदतमंदों के मार्फ़त भलें ही अपने आपको बोहोत ही कामयाब और सख़्त तरीन हुकूमत तस्सव्वुर करवाती रहे, दरअसल हक़ीक़त में यह हुकूमत सख़्त नहीं बल्कि ग़द्दार, नाइंसाफ़, फ़िर्क़ापरास्त है। 

१.          इंसाफ़ की ग़द्दार,

२.          इंसानियत की ग़द्दार,

३.          फ़िर्क़ावाराना ग़द्दार,

४.         दस्तूर की ग़द्दार,

५.         वतन के असासों की ग़द्दार,

६.         नौजावानों के हुक़ूक़ की ग़द्दार,

७.         मस्तूरातों की अस्मत की ग़द्दार,

८.         किसानों की ग़द्दार, कश्मीर की ग़द्दार,

९.         अकलियतों की ग़द्दार


और जब वतन की इतनी तमाम बातों में ग़द्दारी कर दी तो वतन के साथ भी यह हुकूमत ग़द्दार है।नाज़रीन एक बात ते है जिस जिस ने मुसलमानों के साथ हक़तल्फ़ी की उनकी दिल आज़ारी की वोह बर्बाद हुआ हलाक हुआ ग़र्क़ाब हुआ।  अब चलिये सिलसिलेवार मुद्दे को समझने की कोशिश करते हैं।  

१.       संजय गांधी, १९७६ से १९७८ तक जिसने बल जब्री से मुस्लिम नौजवानों की नसबंदी की थी और दुख्तराने मिल्लत का बच्चा पैदाइश के वक़्त ऑपेरशन करवा देता था।  उसके बाद चांदनी चौक, जामी मस्जिद, तुर्कमान गेट हल्क़े में जो मुस्लिम रोज़गार दुकाने, थी उनको मिस्मार करने की मोहीम और उसने बिलडोज़र पर लिखवा दिया नारा "में अँधा, बेहरा हूँ" सब संजय गांधी की क़यादत में हुआ था।  महज़ २ साल बाद १९८० में  उसका हशर नशर क्या हुआ। 

२.          इंदिरा गांधी जिसने १९७१ में साजिश के तहत पाकिस्तान को तक़सीम किया था महज़ १२ साल के वक़्फ़े में उसका क्या हशर नशर हुआ। वज़ीरे आज़ाम का ओहदा उसका ख़ुद का महल जहाँ तहफ़्फ़ुज़ घेरा बेपनाह सख़्त होता है।  लेकिन क्या हाल हुआ।   

३.          राजीव गांधी उसने बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाए उसका हशर नशर क्या हुआ।

४.          नरसिम्हा राव बाबरी मस्जिद की शहादत का ज़िम्मेदार उसकी मौत के बाद उसकी लाश को उसके मज़हबी अक़ीदे के हिसाब से आतिशे नार किया गया लेकिन यहाँ पर उसके अपनों को सख़्त तशवीश और इज़ा पहुंची जब उसकी लाश अदजली रह गई, और पूरी तरह खाक़ नहीं हो पाई।  उसकी अधजली लाश को उसके घर वाले ऐसे ही छोड़ गए और कुत्ते चील कव्वों ने नोचा था।       

५.          नाइंसाफी के इस सफर में सुशील कुमार शिंदे का अगला नाम है।  जिसने मासूम अफ़ज़ल गुरू की जुडिशल मर्डर की अर्ज़ी पर दस्तख्वत किये थे।  वोह शख़्स उनके क़तल में पेश पेश था।  उसका  क्या हशर और नशर हुआ।  उसका उसकी दुखतर का सियासी सफर ख़तम।  ऊपर तहरीर की हुए हक़ीक़त का ज़िक्र सहाफत में आने के बाद तीन चार दफ़ा अपने मज़मूनों में कर चूका हूँ। 

कांग्रेस और उसके सरबारहों ने भारत पर सबसे ज़्यादा हुकूमत की लेकिन आज कांग्रेस अपनी आखिर साँसों को गिन रही है।   क्योंकि सबसे ज़्यादा क़ियादत कांग्रेस ने की तो सबसे ज़्यात्ती भी उस ही तंज़ीम की जानिब से हुई।  अब उसकी क्या हालत है।  बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद कांग्रेस फिर दोबारा सूबे शुमाल की हुकूमत क़ायम करने को तरस गई।  और महज़ दो दफा भारत पर क़ाबिज़ हुई वोह भी मुत्तलीक़ अक्सरियत के साथ नहीं बरक़्स दिगर तंज़ीमों की हिमायत पर हुकूमत क़ायम करने में कामयाब हुई। 

अब बात ज़ाफ़रानी तंज़ीम और उसके सर्वे सर्वा की करतें हैं।  हिटलर मोदी अमित शाह और दिगर शिद्दत पसंद ज़ालिमों को २०१४ से ज़ुल्म करने नाइंसाफ़ से काम करने की हिदायत दे रहा था।  लेकिन इन लोगों ने तो दहशत मचा कर रखी हुई थी।  अब इन से हमारा बदला महज़ तंज़ीम को ख़तम करने तक महदूत नहीं है।  बरक़्स हिंदुस्तान के वजूद को खतरा है।  जिस तरह कश्मीर पर २०१९ में बल जब्री से क़ब्ज़ा किया था तब एक नक्शा पास किया था जिसमे कश्मीर को पाकिस्तान का लाज़मी हिस्सा दिखाया गया था।

फिर अभी तक लाख से ज़ाइद भारतीय फौजी अराकीन, लाख से ज़ाइद संघी दहशतगर्द, लाख से ज़ाइद शिद्दत पसंद काफ़िर कश्मीर को हासिल करने से क़ासिर रहे।   

और अब ०५ जून २०२२ को हिंदुस्तान का नक़्शा पास किया है।   हिन्द का नक़्शा फिलहाल ऐसा पास हुआ है।  लेकिन इसमें मज़ीद तरमीम हो सकती है ख़ास महाराष्ट्र बंबई और साहिली महाराष्ट्र की निस्बत से तरमीम के काफ़ी इमकान हैं।  जिसको बाद में शाया किया जाएगा।  जिस तरह पहले नक़्शे को जारी करने के बाद अपनी पहली चूनौती  मेरा ख़्वाजा महान. में साफ़ अलफ़ाज़ में कहा था गर गिरफ्तार नहीं कर पाए तो हुकूमत मुसलमानों के हाथों में दे देना या जंग करना लेकिन तुम यह जंग हरगिज़ नहीं जीत पाओगे।  वही बात अब दूसरी चूनौती की मियाद ख़तम होने के बाद है।  हुकूमत मुसलमानों के हाथों में दे दो।  जंग में तो तुमको पहले ही शाकिस्त हो चुकी है।  हाँ यह बात हम २०१९ से हर बार बोलते आ रहे थे की कश्मीर की आग तमाम भारत में फैलेगी।  अब देखना यह दिलचस्प होगा की भारत को कितना बर्बाद कर के यह मोदी और ज़ाफ़रानी तंज़ीम अपनी हार तस्लीम करतें हैं।  भारत पर तो सब्ज़ परचम लहरा कर रहेगा।  कितना भी उछल कूद कर लो कितना भी आसमान तक उड़ लो लेकिन टपा टप ज़मीन पर गिरोगे।  बर्बादी तुम्हारे मुक्क़द्दर में लिख दी गई है।  और तुमसे जुडी हर चीज़ होगी बर्बाद चाहे वोह भारत ही क्यों ना हो। 

अगर संघी दहशतगर्द, शिद्दत पसंद काफ़िर और बीजेपी वाले इसराइल के यहूद की पैरोकारी कर के यह समझ रहे होंगे की हम मुसलमानों पर क़ाबिज़ हो जायेगें तो ऐसा हर्गिज़ नहीं होगा।  उसकी हिकमत बताता हूँ।  पहली यहूद एहले किताब हैं। वोह उस दौर के मुसलमान थे जिस दौर में मूसा अलयहे सलाम नबीयूंना तशरीफ़ लाये थे और वोह उनके उम्मत्ती हैं।  उस दौर में फ़िरोन काफ़िर था जंग उससे थी।  दूसरी बात क़ुरान में अल्लाह तआला ने उन पर आलम में फज़ल फ़रमाया है।  

يَبَنِىٓ إِسْرَٓءِيلَ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتِىَ ٱلَّتِىٓ أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَنِّى فَضَّلْتُكُمْ عَلَى ٱلْعَلَمِينَ 

या बनी इस्राईलज़ कुरू, नेमते यल लती, अनआमता अलयकुम इन्नी फद्दल तुकुम अल अल आलमीन।

इस बात की आगाही हम २०१९ के बाद मुतावातिर अपने हर मज़मून हर मुबाहिसे हर तबसिरे में देते रहते थे।  कश्मीर की आग पूरे हिन्दुस्तान में फैलेगी।  लेकिन ये भाजपा वाले ग़फ़लत के मारे हैं,  जैसा की इससे क़ब्ल ज़्यादातर मज़मूनों में कहा जा चूका है की जब तुम्हारा बूरा वक़्त शुरू होगा तुम्हारी अक़्लों पर परदे डाल दिए जायेगें।  तुम्हारी सोचने समझने की ताक़त छीन ली जाएगी।  तुम्हारा हर काम उल्टा होगा। 

आज यहूद अगर तमाम आलम में शादाब और सरसब्ज़ हैं तो उनके ऊपर मेरे रब का करम है।  बनी इसराइल रब तआला की उस दौर के पसंदीदा मोमीन थे।  फिर अगर संघी दहशत और भारत के शिद्दत पसंद काफ़िर हुकूमत इजराइल के नक़्शे क़दम चल कर आज के दौर के मुस्लिमानों को वैसा ही करने की कोशिश करेगें जैसा फ़िरोनी और उसके चेले करते थे तो बर्बाद हो जायेगें, हलाक हो जायेगें, तबाह हो जायेगें।  कियोंके अल्लाह ने हर जगह ज़ालिमों के ऊपर झूठों के ऊपर लानत भेजी है।   अल्लाह ग़ुरूर और तकब्बुर करने वालों और घामड़ से अकड़ कर चलने वालों को पसंद नहीं फरमाता।  फिर है कोई जिसके ऊपर अल्लाह की लानत हो, अल्लाह जिसे पसंद नहीं फ़रमाए उनकी क़ौम और नस्ल को सरसब्ज़ और शादाब कर सके।  भारत के संघी दहशतगर्द, शिद्दत पसंद काफ़िर, बीजेपी वाले तो अतने बड़े तककब्बुर बाज़ हैं की भारत आगे किसी को कुछ तस्सव्वुर नहीं करते।  इन संघियों के हिसाब से भारत की फौज के आगे पकिस्तान, तुर्की यहाँ तक अमेरिका और रूस की फौजें पानी भरती हैं।  भारत का अवाम सबसे ज़्यादा तालीमी अफ्ता हर मुस्लिम को अपने आगे कमतर तस्सव्वुर करना।  घमंड से ऐसे चलना जैसे यह ज़मीन का सीना चीर देगें और पहाड़ को झुका देंगे।  और अल्लाह को ऐसा घमंड सख़्त ना पसंद है।    

Zuber

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