Friday, 10 June 2022

यहाँ भी ख़्वाजा वहां भी ख़्वाजा, मेरा ख़्वाजा महान

अज़ीज़ नाज़रीन, 

ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की नवाज़िश है और करम है की हिन्द में इस्लाम का परचम बुलंद हो गया, वैसे तो ग़रीब नवाज़ खुद ही कश्फ़ और करामात के मुजस्समा थे ताहम उनका रूहानी फैज़ हर दौर में जारी और सारी रहा।  वैसे तो आपकी करामात आपकी हयाते तय्यबा में कई बार ज़ाहिर हुई, पृथ्वीराज चौहान को शाकिस्त देने वाले मोहम्मद ग़ोरी को अल ऐलानियाँ ग़रीब नवाज़ उस ज़ालिम बादशाह से जंग कर के फतह हासिल करने की दुआ दी थी।  लेकिन आपके पर्दा करने के बाद तीन बार एहम तरीन आपकी करामात ज़ाहिर हो चुकी है। 

१ली.   जब संघी दहशत अपने ऊरूज पर था और हर दुसरे रोज़ ख़ास जुमे को ब्लास्ट होते थे, जिससे मुस्लिम अवाम में ग़म और गुस्सा था।  फिर उन ब्लास्ट में हूकूमते कांग्रेस मुस्लिम नौजवानों को ही गिरफ्तार करती थी।  कांग्रेस हुकूमत मुस्लिम अवाम में मौजूद फूट का फायदा उठाती थी।  देव बंदी हल्क़े में ब्लास्ट होता तो बरेलवी गिरफ्तार किये जाते और बरेलवी हल्क़े में होता तो देवबंदी। 

जो असली हिन्दू दहशतगर्द होते मौज उड़ाते थे।  फिर इन दहशतगर्दों की इतनी जुर्रत हो गयी की पहुंच गए ख़्वाजा के दरबार में ब्लास्ट करने।  और कर भी दिया।  लेकिन यह ग़रीब नवाज़ का करम ही था की रमज़ान का महीना और ग़ालेबन जुमे का दिन जब दरगाह में लाखों के तादात में ज़ायरीन होतें हैं लेकिन शहीद महज़ दो हुए।  और उसके बाद जो धड़ पकड़ शुरू हुई है सभी जगह हिन्दू दहशतगर्द पकडे गए और ब्लास्ट रूक गए। 

२री जब इस सहाफी ने हूकूमते ज़ाफ़रान को चेलेंज किया था की १५ दिनों में गिरफ्तार कर के दिखाओ, नहीं तो हुकूमत मुसलमानों के हाथ में दे देना या जंग करना लेकिन तुम यह जंग हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत पाओगे।  और हुआ वही ना ही जंग जीत पाए और ना ही गिरफ्तार कर पाए। 

३री जब हिन्दू दहशतगर्दों को हर मस्जिद में शिव लिंग मिल रहा था, इधर भी शिव लिंग उधर भी शिव लिंग, में लोकल में जा रहा था तो मुझे एहसास हुआ मेरे बाज़ू में शिव लिंग निकल गया है।  ऐसा करते करते यह खबीस पहुंच गए ख़्वाजा के दरबार।  अरे इनको इतनी अक़्ल नहीं है की वली की वोह ज़ात है की पर्दा करने के बाद  भी दुश्मन को तबाह और बर्बाद कर सकती है।  बस आख़िर शिव लिंग ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह में मिला था।  और इन काफिरों का हमला ख़्वाजा साहब की दरगाह पर था, बस उसके बाद ऐसे रूसवा होना शुरू हुए की सब शिव लिंग फीव लिंग गायब हो गया।  शायाद पार्वती की भोग मिल गई होगी।  या नहीं तो बरहना लँगूरनियों के अंदर लिंग समा गया होगा।    

तो नाज़रीन मुहम्मद ग़ोरी के वक़्त भी जब पृथ्वी राज चौहान ज़ुल्म और तशद्दुत करता था तब भी इस्लाम को ज़िंदा ख़्वाजा साहब ने किया था, दरमियान में संघी दहशतगर्दों के ब्लास्ट हमले रोकने के लिए भी ख्वाजा साहब ही आगे आये और आख़िर में फतह का परचम जब लहराने वाला था तब भी संघी हमलावर हुए ख़्वाजा साहब पर और हो गई शिव लिंग की खतना  

नाज़रीन यह बात मेने ख़ुद महसूस की है जिस जिस क़ाफ़िर ने अल्लाह के वालिओं से बुग्ज़ रखा बदतमीज़ी की उनकी बेहुरमती की उसका तो हशर नशर अल्लाह बर्बाद कर देता है।  क्योंकि यह हदीस क़ुदसी है अल्लाह के नबी ने फ़रमाया जिस बन्दे मोमीन ने सूद खाया और जिस बन्दे ने अल्लाह के वालिओं से बदकलामी की अल्लाह उसके खिलाफ एलान जंग करता है।  फिर है कोई जो अल्लाह से जंग जीत सके। 

आज वली सिफ़त बादशाह औरग़ज़ेब के बारे में बकवास की जाती है चूना वाला, कथ्थावाला, बर्बादवाला ऊल जलूल झूट फरेब फ़ैलता है।  औरग़ज़ेब वोह बादशाहे वक़्त थे जिनके सलाम का जवाब ख़ुद ग़रीब नवाज़ दो बार के बाद तीसरी बार दिया था।  "वालेकुम अस्सलाम, या औरग़ज़ेब ज़िद्दी"  फिर उसकी हिकमत बताई की क्यों उन्होंने तीसरी बार में जवाब दिया और पहले दो बार में सलाम का कोई जवाब नहीं आया। 

ख़ैर इस चूनावाला, पूनावाला, बर्बादवाला की नस्लें ही बर्बाद हो जाएगी।  इसके बच्चे माँ की कोख़ से बहार निकलने में डरेगें। और माँ की कोख़ में ही दम तोड़ देंगें।  

एक और करामात है लेकिन वोह मेरे और ख़्वाजा साहब के दरमियान है ज़ाहिर तो हुई लेकिन उसकी तस्दीक़ सिर्फ में ही कर सकता हूँ।  जब चंद्रयान को हवा में उड़ाया था।  तब लंगूर ऐसे ऐसे उछल रहे थे की अब तो हम पाकिस्तान को फतह कर लेंगे।  अरनब, मोदी की बांदी अजना, चित्रा, स्वेता और ना जाने कौन कौन थे जो बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे।  तब मेरे दिल में था जिस तरह ख़्वाजा साहब आपने जगतपाल जोगी को आस्मां से उड़ते हुए ज़मीन पर ला पटका था वैसे ही इन गद्दारों को ऐसा सबक़ सिखाओ की तिलमिला उठे, मंज़िल पर पहुंचने ही मत दो।  और हुआ ठीक वैसा ही।  मंज़िल से किलो मीटर दूर ऐसा ग़ायब हुआ की मोदी, चौदी, भोगी, योगी सबके होश फ़ाक्ता हो गए।  

अब हमारी बारी थी आज तक के खबरनामे में उन लंगूरों का अब हमने मज़ाक़ लगाया जो हमको पाकिस्तान का नाम ले कर जला रहे थे।  उसपर एक संघी बोलता है की हमने तो इतना भी कर लिया तुम्हारे पाकिस्तान ने क्या किया सिर्फ ख़्वाजा ख़्वाजा रटता रहा।  मेने जवाब दिया तुझ जैसे सुपर पवार समझे जाने वाले देश को मंज़िल पर पहुंचने से किलोमीटर पहले ही ज़मीन पर ला पटका यह क्या कम है। फिर मेने वही जगतपाल जोगी की मिसाल दी।  अगर वोह कमेंट मेरे आज तक वालों से मेहफ़ूज़ कर के रखे होंगे तो देख सकतें हैं।     

 Zuber

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