English version
Mere suspension is not enough.
अज़ीज़ नाज़रीन,
भारत के अवाम के बाद आलमी बरादरी भी इस बात से वाक़िफ़ हो चुकी है की बरसरे इक़्तेदार जमात भाजपा ख़ुद ही इस्लाम, कुरान और नबी सल्लम की बेहुरमती और बदज़ुबानी के लिए ज़िम्मेदार है। इक़्तेदार पर क़ाबिज़ हूकूमते हिन्द की तंज़ीम भाजपा खुले तौर पर दिखा रही है कि पार्टी किसी भी तरह की ऐसी ज़ेहनियत को बढ़ावा नहीं देती है और हूकूमते हिन्द पर हर मज़हब का एहतेराम लाज़िम है। लेकिन अंदरूनी हालात कुछ ऐसा बयान कर रहें हैं, की तंज़ीम और हूकूमते हिन्द इन सभी नफरत फैलाने वाले अनासिरों के साथ शाना बा शाना खड़ी हुई है। यही वजह है कि ९ दिनों तक भाजपा की गंदगी से लदी मशीनों पर कोई हिकमत नहीं हुई थी। लेकिन जब चीजें भारत के हाथ से निकलकर मुस्लिम मुमालिकों तक पहुंच गईं और भारत की माशी, समाजी पाबन्दी के चलन आग़ाज़ हुआ तो मोदी की ज़ाफ़रानी हुकूमत मसले की संजीदगी को समझने के लिए बैदार हुई।
भाजपा ने फौरी तोर से भाजपा में मौजूद कूड़े के ढेर को हटा दिया जो अवामी और बेनक़वामी हल्क़े में अपने गंदगी भरे पुरआलूद मवाद से मोहोल को गन्दा कर रहे थे जिनके मुँह से निकली बदबू तमाम आलम में भारत की फ़ज़ीहत और किरकिरी की वजह बन रही थी। लेकिन इतना ही काफी नहीं है, सिर्फ मोअत्तल ही क्यों, सज़ा क्यों नहीं। महज़ मोअत्तली काफी नहीं है, हम इस तरह के नफ़रत फ़ैलाने वालों की गिरफ्तारी की मांग करते हैं जो कूड़ा-करकट फैलाने के आदतन मुजरिम हैं। मोअत्तली के परवाने के फ़ौरन बाद मैंने ट्वीट किया और भाजपा के इस कदम की सराहना की और नफरत फैलाने वालों की गिरफ्तारी के लिए कहा और उस सहाफ़ी को भी जिसने उस बकवास महिला को पैगंबर मोहम्मद सल्लम के लिए कुछ कहने के लिए खुला मैदान दिया, जिसने मुस्लिम दुनिया में फ़िक्र और गुस्से को भर दिया।
उधर इस्लामिक मुमालिकों की तंज़ीम (OIC) ने इस मुद्दे को अपने इजलास में उठाया है। क़तर, सऊदी, कुवैत, ईरान पहले भी भारत के वज़ारत खाने के सफीर को तालाब कर माफ़ी मांगने की बात कह चुके हैं। हूकूमते हिन्द की ऐसे हस्सास मज़हबी मामलों पर (OIC) से सख़्त अलफ़ाज़ में मज़्ज़म्मत की और अज़्म किया की भारत में ऐसे मज़हबी मामलों को बढ़ावा देने वालों को नामज़द किया जाए और उनके ऊपर हिकमत की जाए।
अगर इस तरह के मज़हबी मुद्दे इस्लामी मुमालिकों के इजलास में भारत के लिए उठाये जा रहें हैं तो वोह हूकूमते हिन्द के लिए बाइसे शर्मिंदगी है। कियोंके किसी भी इस्लामिक मुल्क में वहां पर रह रहे भारतीय हिन्दुओं को किसी क़िस्म की कोई क़ैद नहीं है। जिनमे ज़्यादातर तो संघ और बीजेपी की शिद्दत पसंदी और इस्लाम नबी से नफ़रत वाली ज़ेहनियत रखतें हैं। फिर हर मुस्लिम मुल्क में मंदिरों पर आने जाने पर किसी भी भारतीय हिन्दू को कोई पाबन्दी नहीं है, और ना ही कोई अरबी या मुस्लिम उनको उनके खुदा के बारे में गन्दा बोलता है या उनके मज़हबी रिवायत को पूरा करने से रोकता है। तो फिर भारत में इस्लाम, मुसलमानों और नबी से इतनी नफ़रत क्यों हैं।
मुअत्तली का परवाना मिलते ही गंदगी की मशीन अपने घुटन पर गिर गए और टूट गए। पहले जो अकड़ दिखा रहे थे मिमयाने लगे, हमारा पता पब्लिक मत करना, हमको जान का खतरा है। दरअसल कुछ दिनों से कुछ लोग हमारे ख़ुदाओं को बूरा भला बोल रहे थे, शिव लिंग, माँ पार्वती, सीता और राम के ऊपर तन्ज़िया मज़ामीन शाया कर रहे थे तो गुस्से में आकर हमने इस तरह की बदज़ुबानी की, हालांकि हमारा इरादा किसी की जज़्बात को ज़ख़्मी करना नहीं था।
मैं इन बकवास करने वालों से एक सवाल करना चाहता हूं, कौन आपके अपने ख़ुदा को सड़क पर लाया है। गाली कल्चर के लिए कौन जिम्मेदार है? अब तो हिंदू भी बेहतर ढंग से समझ सकते हैं कि भक्त गालीबाज़ होते हैं। अवामी मीडिया पर अज़मत और नीचे किरदार की ज़ुबान का इस्तेमाल का आग़ाज़ किसने है? हर मस्जिद में शिवलिंग कौन तलाश रहा था? कौन दावा कर रहा था कि भारत की हर मस्जिद मंदिर है। कौन दावा कर रहा है कि हर मुसलमान के आबा ओ अजदाद हिंदू थे। अगर आपके लिए शिव का एहतेराम है तो आप उन्हें हर मस्जिद में क्यों तलाश रहे हैं। अगर आपके लिए हनुमान का एहतेराम है तो आप दरगाह और मस्जिद के सामने हनुमान का मुजस्समा क्यों नसब कर रहें हैं। अपने ही दिल में क्यों नहीं। एक तरफ आप दावा कर रहे हैं कि शिव आपके दिल में मौजूद हैं आप किसी भी चीज़ से ज्यादा राम का एहतेराम करते हैं तो आप उन्हें मस्जिदों और गली नुक्कड़ चौराहों में क्यों तलाश रहे हैं। अगर आपको हर गली नुक्कड़ चुराहे में शिवलिंग मिल रहा है तो यह साबित करता है कि आपका शिवलिंग अभी भी अमन की तलाश में है। फिर क्यों ना नूपुर शर्मा पहल करें और शिव के लिंग को अपने ज़ाती आज़ा में नसब करें। वह शिव से प्यार करती है और हिंदू इसे हर मस्जिद में ढूंढ रहे हैं। यह साबित हो गया है कि या तो शिव लिंग को हर गली चौराहे में आरास्ता होने की आदत है या नूपुर शर्मा और कई दीगर महिलाओं की मोहब्बत शिव के लिए झूठी है।

No comments:
Post a Comment