अज़ीज़ नाज़रीन,
माहे ज़िल हिज्ज का सहाफ़ी को बेसब्री से इंतज़ार है। इस माह हमें हमारी मोहब्बत से मुलाक़ात करने का शर्फ़ हासिल होगा। नाज़रीन कुछ एहम मसाईल और मुद्दे ले कर आप लोगों के दरमियान हाज़िर हुआ हूँ। दौरे हाजरा में जो हिन्द के हालात चल पड़े हैं उससे कोई भी बाशऊर इंसान वाक़िफ़ नहीं होगा ऐसा हो ही नहीं सकता। और यह हालात ज़ाफ़रानी शिद्दत की दैन हैं। २६ मई २०१४ को मोदी इक़्तेदार की कुर्सी पर फ़ाइज़ हुआ और २ जून २०१४ को पहला हिन्दू हूजूमी दहशतगर्द हमला पूना के मोहसिन शेख पर हुआ था। उसके बाद तो जैसे मुस्लिम अवाम को हिन्दू हूजूमी दहशत और दिगर हिन्दू दहशतगर्द हमलों में शहीद करने की होड़ लग गई। हर हमले पर में चीख़ चीख़ कर दहशतगर्द सरग़ना हिटलर मोदी को बोलता था की तुम्हारी ख़ामोशी दहशत को फ़रोग़ दे रही है। तुम इनके ऊपर हिकमत करो नहीं तो तुम्हारा मुल्क बर्बाद हो जाएगा तबहा हो जाएगा।
मोदी ठहरा इक़्तेदार के नशे में चूर अपने रकूनों की ताक़त, फौज की ताक़त पर ग़ुरूर और तकब्बुर से भरा हुआ हम कहते हिंदुस्तान बर्बाद हो जाएगा और उसको लगता था इतना क़वी मुल्क इतनी ताक़तवर फौज मेरा डंका तो सिर्फ हिन्दुस्तान में नहीं बल्कि तमाम आलम में बज रहा है हम कैसे बर्बाद हो सकतें हैं। और हुआ वही जिसकी तवक़्क़ो मोदी ने कभी नहीं की थी लेकिन हमको तवक़्क़ो और पूरी उम्मीद थी।बोलिये मोदी जी अब हिंदुस्तान को बर्बाद कहने में कोई कसर बची है क्या?
फिर
२०१९ में
एक जाहिल
को सलाह
देने एक
ज़ेहनी मरीज़
मुफ़लिसे जान
बहरूपिया चनकिया
का भेस
ले कर
आ गया। उसने
और आलता
का पालता
कर दिया। जो
कश्मीर पर
अक्सरियत जामात
के बहकावे
में आ
कर डाका
डाल कर
उसको गसप
करने की
अज़ीम ग़फ़लत
कर बैठा। हम
हमेशां से
बोलते रहे
की कश्मीर
तुम्हारा लाज़मी
हिस्सा (अटूट
अंग) नहीं
है, कश्मीर
भारत का
हो ही
नहीं सकता
लेकिन हमारी
बात को
झूठा साबित
करने के
लिए डाका
डाल दिया
और आज
४ साल
के बाद
हालात बद
से बत्तर
होते चले
गए।
अब फिर
से हिन्दू
अवाम की
हिजरत का
आगाज़ हो
चूका है। भले
ही बदलते
रहो शहरों
के नाम
और रखते
रहो शिक्षक
बाला के
नाम पर
स्कूलों के
नाम।
लेकिन कश्मीर
पर तुम्हारी
हिकमत नाकाम
साबित हुई। यह
जंग में
तुम्हारी शाकिस्त
है।
दूसरी बात २०१९ में कश्मीर पर हमला करने के बाद ज़ाफ़रानियों को दूसरी बात हमने कही थी कश्मीर की आग तमाम भारत में फैलेगी। पहली बार हमने कश्मीर का नक़्शा जारी किया था जिसमे पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया था ४ साल बाद हमने ५ जून को दूसरा नक़्शा जारी किया है। जिसमे हिन्दुस्तान को महदूत कर दिया है। और यह बात भी हम शिद्दत पसंदों, संघी दहशत, बीजेपी वालों को २०१८ से बोलते आ रहे थे। कश्मीर किया तुमको महदूत कर दिया जाएगा तुम अपने ही मुल्क में चल फिर नहीं सकोगे।
तीसरा
चेलेंज हूकूमते
हिन्द की
मरकज़ी इन्तेज़ामियाँ
को फिर
है, जंग
तुम हार
चुके हो
२०१९ से
अभी तक
हमको ना
ही गिरफ्तार
कर सके
और ना
ही कश्मीर
पर तुम
अपना परचम
लहरा सके। अब
तमाम भारत
के लिए
जो नक़्शा
जारी किया
है उस
हिसाब से
शिद्दत पसंद
काफ़िर, संघी
दहशतगर्द और
बीजेपी वाले
हिजरत कर
लो और
जहाँ जहाँ
सब्ज़ निशान
नहीं हैं
वहां चले
जाएँ नहीं
तो उनके
लिए आगे
की राहें
सख़्त से
सख़्त होती
जाएगी। और यह महज़
गीदड़ भपकी नहीं है जैसा की लंगूर और लँगूरनियाँ बोलते हैं पाकिस्तान ने फिर गीदड़ भपकी
दी। उनको इस बात का अंदाज़ा बख़ूबी हो गया होगा
२०१० के बाद जो बात हमने कही वोह पूरी की है।
चाहो
तो हमको
गिरफ्तार कर
सकते हो
या संघी
दहशतगर्द हलाक
कर सकतें
हैं।
तुमको फिर
१५ दिनों
का चेलेंज
दिया चलो
कर लो
अपने दिल
की।
हम हर
रोज़ सुबह
७.५० की
या ८.०६
की बेलापुर
नई बंबई
से लोकल
पकड़ते हैं। शुरूवात
से दूसरा
या तीसरा
डब्बा होता
है जिसमे
आम जनता
के साथ
बिंदास्त बैठ
कर आतें
हैं। लेकिन
जैसा हर
बार बोला
गया है
तुम्हारी आँखों
पर परदे
पड़ जायेगें
ग़फ़लत में
गुमराह हो
जाओगे लेकिन
जब तक
मेरा रब
ना चाहेगा
हमको छु
तक नहीं
सकोगे।
दिल्ली पुलिस
जिनको तहफ़्फ़ुज़
दे रही
है हमारे
फौजी जब
चाहे उन
ख़बीसों का
सर तन से जुदा कर सकतें
हैं।
मरकज़ की
ज़ाफ़रानी तहफ़्फ़ुज़ज़
की धज्जिया
तो कमलेश
तिवारी और
फौज के
सरबहार रावत
के खाते
में मौत
दे कर
ही देख
ली।
लेकिन मेरे रब का तहफ़्फ़ुज़ घेरा कितना अज़ीम है
२०१० से सहाफ़त में हुकूमत की नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ लिख रहा हूँ। और २०१९ से जब से लंगूर
और लँगूरनियों ने एलाने जंग किया है अभी तक ज़िंदा हूँ।
इन्साफ और नाइंसाफ़ी की इस जंग का जो कोई भी हिस्सा बनना चाहता है हमारे मोबाइल ९९८७७१५५४९ या ९७०२९७३०६३ पर राब्ता क़ायम कर सकता है। लेकिन हमको उस ही शख़्स का फोन मिल सकेगा जिसको अल्लाह हिदायत देगा बाक़ी फोन काल या तो रिंग बजते रहेगें या पहुंच के बहार रहेगें। जो हज़रात हमसे मोहब्बत करतें हैं वोह भी फोन कर सकतें हैं या आ कर मिल सकतें हैं। लेकिन उन ही लोगों को मिलने का शर्फ़ हासिल होगा जिनको हम मोहब्बत करतें होंगे। बाक़ी तो आनी जानी छावो रहेंगें। इस मोहब्बत के पैमाने में मर्द औरत सब शामिल हैं कोई भी मिल सकता है। लेकिन हम उस ही को मिलेगें जिसको हम चाहतें होंगे या जिसको हम मिलना पसंद करेगें।
मराठा रियासत के हाकिम राजे उद्धव जी ठाकरे से ख़ास मोहब्बत है उनको २०१७ में दुआ भी दी थी, हिंदुस्तान टाइम्स के अंग्रेज़ी खबरनामे में वज़ीरे आला के लिए दुआ दी थी। जब वज़ीरे आला मुंतखिब किये गए तब कुछ हिदायत दी थी। ज़ाफ़रानी लंगूरों की टोली से होशियार रहें इनको महाराष्ट्र में दाखिल ना होने दें नहीं तो आपकी हुकूमत को खतरा है। फिर आप अपनी ज़हानात और आला ओहदेदारों की सलाह से हर मुसीबत का मुक़ाबला कर लेंगे। और हुआ वही आज़ान हनुमान चालीसा तनज़िया बढ़ने नहीं दिया। यह आपकी ज़हानत है। आगे मुस्तक़बिल और बेहतर देख रहा हूँ। सिद्धू पा जी फील वक़्त उनको उनके माज़ी के गुनाहों का कफ़्फ़ारा देना पड़ रहा है उसके लिए मरकज़ और लंगूरों की टोली ज़िम्मेदार है। उनका भी बेहतर होगा।
हाँ इमरान खान जिनका नाम आते ही ज़ाफ़रानी तिलमिला जातें हैं उनको रियासते मदीना की संगे बुनयाद क़ायम करने की दुआ है। वोह मुजाहिद है उसको तकलीफ सिर्फ और सिर्फ हक़ पर चलने की दी जा रही है लेकिन जल्द ही सब ठीक होगा। उनको मुबारकबाद तो बोहोत पहले दी जा चुकी है। दो तीन मुद्दों पर पूरी हुई लेकिन ख़ास मौक़ा बाक़ी है।
Zuber
No comments:
Post a Comment