अज़ीज़ नाज़रीन,
मराठा रियासत की दारुल ख़लीफ़ा मुंबई में SPG ने वज़ीर आदित्य ठाकरे को गाड़ी से नीचे उतारा, मराठा वज़ीर PM मोदी का खैरमक़दम करने पहुंचे थे।
वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी के तहफ़्फ़ुज़ज़ में शामिल एसपीजी अमले ने कैबिनेट वज़ीर आदित्य ठाकरे को वज़ीरे आला उद्धव ठाकरे की कार से उतार दिया। उद्धव ठाकरे, अपने फ़रज़न्द और महाराष्ट्र के वज़ीर आदित्य के साथ पीएम मोदी को ख़ुशामदीद करने के लिए कोलाबा में नौसेना के हेलीपोर्ट आईएनएस शिकरा गए थे।
नाज़रीन यह सहाफी इस बात को समझने से क़ासिर है की मोदी और उसका अमला हर वक़्त हिटलर शाही में यक़ीन क्यों रखता है। और हर शख़्स को अपने से कमतर क्यों समझता है। कहने को तो जहालत भरी पड़ी है, तालीम के नाम पर सिफर दर्जा है, डिग्री जाली झूटी साबित हो चुकी है फिर भी एक आला इंजीनीर की बेइज़्ज़ाती।
अब गंदगी के बीज ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ क्या इस मुद्दे पर ब्रेकिंग खबरे चालाएगें। हर वक़्त टीवी चेंनल पर झूटी खबरे दिखा कर अवाम के दिलों दिमाग को इतना पुर आलूद कर दिया है की शक शुकूक की इन्तहा इतनी हो गई की वज़ीरे आज़म का तहफ़्फ़ुज़ अमला एसपीजी एक वज़ीरे कैबिनेट से ख़ौफ़ज़दा हो गया। दूसरी बात आदित्य ठाकरे सिर्फ उद्धव ठाकरे के फ़रज़न्द की जगह मौजूद नहीं थे बल्कि प्रोटोकॉल वज़ीर के तहत ख़ुशआमदीद करने आए थे.
एसपीजी के इस बेहूदा और ओछे रवैये के बाद वज़ीरे आला उद्धव ठाकरे बेहद परेशान दिखे। वज़ीरे आला उद्धव ठाकरे की सख़्त एतेराज़ और नाराज़गी के बाद आदित्य ठाकरे को वज़ीरे आज़म मोदी की ख़ुशआमदीद करने की इजाजात दी गई।
नाज़रीन यह तमाम उस ज़हर का नतीजा है जो ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ सुबह से शाम तक अवाम, तहक़ीक़ाती अमले, अदलिया, ज़ाफ़रानी हाकिमों के दिलों दिमाग़ में पेवस्त करते रहतें हैं। उस ज़हर का असर इस क़दर हो गया की वज़ीरे आज़म की एसपीजी अमला इस बात को भी नज़र अंदाज़ कर गए की कौन वज़ीरे कैबिनेट है जिसका नाम प्रोटोकॉल लिस्ट में मौजूद है और कौन बहार वाला। अगर इस तरह किसी ज़ाफ़रानी हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम अमले में किसी ज़ाफ़रानी सूबे का वज़ीरे आला का फ़रज़न्द और कैबिनेट वज़ीर वज़ीरे आज़म के प्रोटोकॉल निभाने के लिए जाता तो किया फिर भी ऐसी वाहियात और बेहूदा हरकत वज़ीरे आज़म की असपीजी उसके साथ भी करती। क्या उसके साथ भी वही सब बात होती जो कैबिनेट वज़ीर होता और प्रोटोकॉल निभाने आया होता तो क्या वही रवैया एसपीजी अमले का उसके साथ भी होता। नहीं हरगिज़ नहीं। तमाम प्रोटोकॉल और आला ओहदेदारों की लिस्ट एसपीजी के पास पहले ही पहुंच जाती है तो फिर आदित्य ठाकरे को ज़लील करने के पीछे की कुछ पोशीदा हिकमत है। या तो वज़ीरे आज़म की हिदायत होगी या फिर संघ की।
इस तरह की ओछि और ज़लील हरकत ना सिर्फ मोदी की शख्सियत पर सवालिया निशाँ लगाती है बल्कि उसके साथ काम करने वाले अमले पर भी निशाँ लगते हैं। जिनको इतना तमीज़ और इल्म नहीं की कौन वज़ीरे कैबिनेट है कौन नार्मल इंसान। कौन प्रोटोकॉल निभाने आया कौन मौज मस्ती करने।
दरअसल तमाम ज़ाफ़रानियों में ज़ाहानात और इल्म की कमी है। जैसा राजा वैसी प्रजा। अब मोदी ही जाहिल गवार है तो उसके तहफ़्फ़ुज़ में तैनात अमला भी वैसा ही होगा। नाज़रीन योगी हुकूमत का वोह सरकारी हुकुमनामा याद है। जिसमे कहा गया था की तमाम मदरसों में सुबह क़ौमी तराना पढ़ना लाज़मी होगा। नहीं तो एक्शन होगी। एक जाहिल ने हुकुम नाफ़िज़ किया उसके ऊपर दूसरी जाहिल आ धमकी। निरंजन ज्योति वोह बोलती है की मुसलमानों को क़ौमी तराने से इतनी चीड़ कियों है। भारत में रहना होगा तो क़ौमी तराना पढ़ना ही होगा।
अब
इन ज़ाफ़रानिओं में जाहिलों की कमी नहीं है, एक तलाशों और १००० की तादात में मिल जातें
हैं। उस सर्कुलर के फ़ौरन बाद इस बात का इल्म
हो चूका था की ४७ के बाद से हर मदरसे में क़ौमी तराना "जना गना मन पढ़ा जाता है। और जो चीज़ पहले से ही मौजूद है और इख़्तेयार की हुई
है उसके ऊपर हुकमत का तहरीरी हुकुम समझ से बहार है।
ख़ैर
जो हुआ वोह महाराष्ट्र की तमाम अवाम की बेइज़्ज़ती है और वज़ीरे आज़म के अमले ने महज़ आदित्य
ठाकरे की बेइज़्ज़ती नहीं की बल्कि तमाम महाराष्ट्र के अवाम की बेइज़्ज़ती की है। क्योंकि अगर आदित्य ठाकरे बहैसियत उद्धव ठाकरे के
फ़रज़न्द के हैसियत से जाते तो उनके साथ किया हुआ अमल किसी हद तक बर्दाश्त किया जा सकता
था। लेकिन वोह महाराष्ट्र की तमाम अवाम के
नुमाइंदे की हैसियत से गए थे। और इस तरह की
ज़लील हरकत तमाम महाराष्ट्र की ज़लालत है।
इस
बात से यह भी ज़ाहिर होता है की वज़ीरे आज़म और उनके अमले के दिलों दिमाग़ में महाराष्ट्र
के लिए कितनी गर्द और ग़ुबार भरा हुआ है। सियासत का इतना निचला स्तर कभी भी देखने को
नहीं मिला। क्या वज़ीरे आज़म की सिक्योरिटी में
लगी अस पी जी को इस बात का इल्म नहीं होगा की कौन वी आई पी है और कौन नार्मल पब्लिक। फिर एक ऐसे शख़्स को बहार निकालना जो महाराष्ट्र
की नुमाइंदगी ले कर प्रोटोकॉल निभाने आया है एक दम गलत है और ओछी हरकत है।
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