Sunday, 12 June 2022

नबी की गुस्ताख़ी मूसावाला के क़तल से जुड़ी कड़ी।

अज़ीज़ नाज़रीन,

ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम को बोहोत एहम सुराग़ हाथ लगे हैं।  नाज़रीन ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट ग्रुप के सरबराह जौर्नालिस्ट जुबेर ने भाई मूसावाला के क़तल के रोज़ खबरनामे आज तक पर वाज़े अलफ़ाज़ में कहा था की इस क़तल में मरकज़ के हाथ होने के सबूत मिले हैं।  उसके अगले दिन उन्होंने ट्वीटर पर ट्वीट किया था।  अब इस क़तल की तेह तक ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम पहुंच गई है।  यह क़तल मरकज़ की सोची समझी साजिश का नतीजा था।  जिसमे उसने एक तीर से कई निशाने लगाने की हिकमत की है। 

मरकज़ की ज़ाफ़रानी तंज़ीम की बर्तरफ़ और साबिक़ तर्जुमान ने नबी की शान में गुस्ताख़ी की जब मरकज़ को उसकी हिमाक़त और मसले की संजीदगी का इल्म हुआ तो उस मुद्दे पर कफ़न डालने के लिए एक ऐसा नुमाइंदा चाहिए था जिसको बली का बकरा बना कर कई मसले हल हो सकेगें।  लेकिन ऐसा कहतें हैं एक ख़बीस (अमित) सारे भारत को रूसवा करता है, और टुकड़े करने का सबब बनता है।

भाई मूसावाला का क़त्ल करने से उनका किसान एहतेजाज में बढ़ चढ़ कर लिया गया हिस्से का बदला भी पूरा हो जाता है।  दूसरी बात मूसावाला खालिस्तान मुहाफ़िज़ या खालिस्तान पर नरम रूख रखते थे।  तो ख़ालिस्तान की हुर्रियत तहरीक को ख़तम करना था।  

फिर क़तल के फ़ौरन बाद किसी शाहरुख़ का नाम ज़ाफ़रानी मीडिया में गर्दिश कर रहा था वोह भी एक साजिश थी सिख और मुस्लिम अवाम में बढ़ते हुए भाईचारे को तबाह करना।  लेकिन नबी की बेहुरमती उनके खिलाफ झूट फैलाने की हिकमत भाई मूसावाला के क़तल को तो दबा सकी लेकिन नबी की बेहुरमती से भारत पाश पाश हो गया।  जो ज़लालत और रूस्वाई आलमी बरादरी में हुई वोह अलग।  अब तोड़ते रहो बिलडोज़र से घरों को हमें कोई रन्झ और ग़म नहीं है।  यह दुनियां हर मुसलमान के लिए एक क़ैद ख़ाना है और हर सच्चे  ईमान वाले मुसलमान को किसी भी तकलीफ पर कोई रन्झ और ग़म नहीं होता है।  हमारी तारीख़ तो ऐसे वाक़ियात से भरी पड़ी है।  लेकिन आज जिनके आबा अजदाद ने अरेबिया में क़ुर्बानियां दी थी उनके बच्चों के सामने कुफ्र और भारत जैसा अज़ीम समझा जाने वाला  सुपर पावर मुल्क एक मुफ़लिस फ़क़ीर की मानिंद खड़ा है।

आज ख़लीज मुमालिकों के एहतेजाज पर ही हूकूमते ज़ाफ़रान ने अपने दो गंदगी के ना जाइज़ नुत्फ़ों को ख़ारिज किया यानी ना सिर्फ निकाल दिया बल्कि उनको नाजाइज़ क़रार दिया।  (फिरिन्ज एलिमेंट)  अब ऐसे नाजायज़ों पर सबको हक़ है की कुछ भी करें।  कुछ भी समझ गए ना।  और जब कुछ भी करने की बारी किसी खूबसूरत नाजइज़ एलिमेंट पर हो तो मसला और भी आसान हो जाता है।  भाई आप कुछ मत करो आप शहरी है इस मुल्क के आपको रहना है यहाँ, में कौन हूँ कोई भी नहीं, में कुछ भी कर सकता हूँ।  हाँ ठीक है तू कुछ भी कर सकता है, तो कर कुछ भी।       

नाज़रीन अभी तक जितनी भी तहक़ीक़ात ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम ने की हैं वोह सो फि सद दुर्सुत और सही पाई गई हैं।  

१.           पठानकोट, उरी, पुलवामा, हमले पर रिपोर्ट

२.          हैदराबाद, सहारंगपुर मुस्लिम सिख दंगा रिपोर्ट

३.          जनवरी २६ हिन्दू दहशत हमला जिसमे एक पवन नाम का हिन्दू आतंकी मौत के घाट उतर गाया था।

४.          हैदराबाद डॉक्टर के साथ गिरोह गर्दाना ज़िना बिल जब्र। तमाम ज़ानिओं को क़तल करने पर रिपोर्ट 

५.          मोदी की बेरुन मुल्क दहशतगर्द के साथ साजिश के तहत जासूसी की रिपोर्ट।  उस मुल्क का नाम उस वक़्त नहीं लिया था हालांकि हम हमेशा उसके बारे में लिखते रहते हैं।  लेकिन हिकमत के तहत रिपोर्ट शाया करते वक़त नहीं लिखा था।  अब जग ज़ाहिर हो गया है उस ग़द्दार का नाम इजराइल है।

और बोहोत सी रिपोर्ट हैं जिनको वक़्तन फवक्तन इस सहाफ़ी ने अपने ब्लॉग पर शाया किया है।  जैसे भाई अफ़ज़ल गुरू की दहशतगर्द प्रणव मुखर्जी के साथ साजिश के तहत सुप्रीम दहशतगर्द ने अक्सरियत जमात के दबाओ में कर क़त्ल किया।   हर रिपोर्ट पर पहले संघी हस्ते हैं मज़ाक़ बनातें हैं फिर जब सच्चाई सामने आती है तो खामोश हो जातें हैं।  अब पुलवामा का कोई ज़िक्र नहीं होता।      

Zuber 

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