अज़ीज़ नाज़रीन,
करोना और क़ेहरे इलाही अब ना इन्साफ हाकिमे वक़्त के रकूने पार्लिअमान, रकूने असेंबली, रकूने बल्दिया, मौजूदा मरकज़ी वज़ीर, वज़ीरे आला (गोवा) और तमाम ना इन्साफ आला ओहदेदारों से होते हुए अदलिया और पुलिस में मौजूद ऐसे अफ़राद तक पहुंच गए हैं जिनकी नाइंसाफी और हक़तल्फ़ी की तस्दीक़ खुद इनके किरदार और दिए गए मशकूक फैसलों से होती है।
वैसे तो हुकुमाते हिन्द की मुत्तसिब और फ़िरक़ावारना ज़ेहनियत और अमल की सज़ा आम आवाम खूब भुगत चूका है लेकिन अब बारी आला ओहदेदारों की है। इस ज़िम्न में आज तीन बड़े ओहदेदारों को करोना फ़ौजिओं ने ढेर किया है।
पहला है मध्य प्रदेश ज़ाफ़रानी दहशत के ज़ेरे साये छतरपुर में मुलाज़मत करने वाला एडिशनल सेशन जज ५३ साला अंतर सिंह अलावा जिसको ४ मई मरोज़ मंगल खड़वा ज़िल्हा शिफा ख़ाने में मौत ने धर दबोचा। उसकी लुगाई सीमा अलावा खड़वा में अडिशनल अस पी की हैसियत से काम करती है।
दूसरा उत्तर प्रदेश ज़ाफ़रानी दहशत के ज़ेरे साये काम करने वाला बरेली का अस डी एम डॉक्टर प्रशांत चौधरी को मौत के घाट उतार दिया। अस डी एम प्रशांत चौधरी १९ अप्रैल को करोना फ़ौजिओं के हमले की चपेट में आ गया था। शदीद ज़ख़्मी हालत में इन्तेज़ामियाँ ने उसको अस आर अस मेडिकल कॉलेज में दाखिल करवाया था जहाँ उसने बरोज़ पीर दम तोड़ दिया। ऐसा कहतें हैं जहाँ जिसकी मौत लिखी होती है वोह वहां पहुंच ही जाता है, जिसको इस सहाफी ने अपने मज़मूनों में लंगूर और लँगूरनियों के लिए कहा है। यह लोग वहां ना चाहते हुए पहुचेगे जहाँ मौत इनका पहले से इंतज़ार कर रही होगी। वही प्रशांत चौधरी के साथ हुआ उसने १२ अप्रैल को ही बरेली अस डी एम के ओहदे पर फ़ाइज़ हुआ था और काम काज संभाला था।
तीसरा हमला एटा के अस पी क्राइम राहुल कुमार पर हुआ है। जिसके ऊपर करोना फ़ौजिओं ने कुछ रोज़ क़ब्ल हमला किया था उसका इलाज होम इसलोलेशन में चल रहा था। उसकी तबियत मज़ीद बिगड़ने के बाद उसको शिफ़ा ख़ाने में भर्ती किया गया। उसको बेचारे को क्या पता था यह शिफ़ा ख़ाना उसके लिए शमशान का जाना बन जाएगा। भाइयों और बहनों बताइये आपको शमशान चाहिए या कब्रिस्तान। तो तमाम अवाम ने शमशान पर मोहर लगा दी। अब भुगतो।
साधू भी सोच रहा होगा इतने तो बेगुनाहों को मेरी ज़ालिम, क़साई और दरिंदा सिफ़त फितरत ने नहीं हलाक किया होगा जितना की मेने मेरे फ़ौजिओं और अहम ओहदेदारों को इस जंग में गवा दिया।
इससे पेश्तर ५ रोज़ क़ब्ल बिहार के चीफ सेक्रेटरी अरुण कुमार की करोना से पहले ही मौत हो चुकी है। अभी २ रोज़ क़ब्ल बिहार के साबिक़ वज़ीरे दाख़ला और मौजूदा रकूने पार्लिअमान सुशिल मोदी के भाई अशोक कुमार मोदी को करोना फ़ौजिओं ने मौत के घाट उतार दिया था।
नाज़रीन अभी १७ रमज़ानुल मुबारक ३० अप्रैल २०२१ को जब क़ेहरे इलाही ने दहशत के मरकज़ और वाल्दैन इजराइल में तबाही मचाई थी। नतीजा ५० दहशतगर्दों की लाशों को उठाने वाला कोई नहीं था तब इस सहाफी ने अपने ५ अहम ख़ास अहबाब दिल अज़ीज़ दिल के क़रीब लोगों को एक पैग़ाम आम किया था। ओह पाकीज़ा फ़ौजिओं मज़ीद कुछ अच्छी खबरें समात करने के लिए तैयार रहें।
अगली ही सुबह एक हमसाये सहाफी ने ट्वीट पर ख़बर भेजी हिन्द में दहशत की पनाह गाह और हद दर्जे की मुत्तसिब ज़मीन गुजरात के भरुच में कोविद शिफ़ा ख़ाने में आग लगने से ज़ेरे इलाज १८ मरीज़ों समेत २ नर्सेस की मौत हो गई। हो सकता है इसमें से कोई एक नर्स वैसी ही ख़स्लत और फरेबी ज़ेहनियत की होगी जो तब्लीग़ी जमात पर झूट बयान देती थी, मुझे देख कर थूक लगाया, गंदे गंदे इशारे किये, बरहना हो गए अपनी पतलून उतार दी, मेरे सामने हस्त मैथुन करने लगे। अब चखो उस झूट का मज़ा जो तुम मुस्लिम अवाम पर बेजा बांधते थे।
और पस यह जान लो की जंग का सूर फूंका जा चूका है और यह जंग अब लम्बी चलेगी। कुछ हज़रात बारी इलाह के गज़ब और जलाल को कम करने की दुहाई दे रहें हैं, मिन्नतें कर रहें हैं माफ़ी मांग रहे हैं। ऐसे जुम्मानों को माक़ूल जवाब दिया जा चूका है की यह जंग अब तभी ख़तम होगी जब तक एक एक शिद्दत पसंद एक एक ज़ालिम या तो मारा नाही जाता या फिर अपनी हार तस्लीम कर के सब्ज़ परचम के नीचे नहीं आ जाता।
क्योंकि यह जंग अब बारी ताला और नाइंसाफों,
ज़ालिमों और रूहानी ताक़तों पर ऊल जलूल बकवास करने वालों के दरमियान
है। मेने इस ज़िम्न में अपने अंग्रेज़ी मज़मून
में साल जुलाई या अगस्त २०२० में हदीसे क़ुदसी के बयान के एक वीडियो के साथ मज़मून लिखा
है। उसमे साफ़ अलफ़ाज़ में यही लिखा था मोदी इस्राएल
अगर तुम यह समझ रहे हो की तुम जंग जीत जाओगे तो ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। क्योंकि इस बार तुम्हारी जंग पाकिस्तान या मुसलमानों
से नहीं है बल्कि खुद मालिके कायनात से है।
जो तुम बुज़ुर्गों की शान में नबी करीम की शाने अक़दस में गन्दी गलीज़ गाली गलोच
करते थे तो उसका बदला तुमको देना होगा।
आगे और है। और है।
इस सहाफी के पास सितम्बर या अक्टूबर २०२० को उत्तर प्रदेश के
लखनऊ के एक अज़ीम मौलाना साहब और मोतबर शख़्सियत का फोन आया था और वोह अर्ज़ कर रहे थे
की आप दुआ कीजिये की अल्लाह का जलाल कम हो और हालात साज़गार हो जाएँ। हस्बे आदत मेने साफ़ कहा हज़रत हम तो दुआ नहीं करेगें
बल्कि और अभी तो मज़ीद हालात पेचीदा होंगे सभी लोग मारे जायेगें क्योंकि जो ज़ुल्म इन
लोगों ने ना सिर्फ मुस्लिम बल्कि इंसानियत पर किये हैं मस्तूरातों की इज़्ज़त पामाल की
है बुज़ुर्गाने दिनों की शान में बदकलामी की है उसका कफ़्फ़ारा तो देना होगा। फिर उनको भी उसी हदीस का हवाला दिया जिसपर की वोह
मौलाना साहब मुत्तासिर हुए और कहा बात आप माक़ूल कर रहें हैं। ठीक है होगा बिलकुल वैसा ही होगा जैसा आप सोचतें
और चाहते हैं।
Zuber
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