Friday, 28 May 2021

ग़द्दारों की करो समाजी और सियासी अलहदगी।

 अज़ीज़ नाज़रीन,

बीजेपी एक ऐसी तंज़ीम है, जो सदा अपने ही वालों के ख़िलाफ़ ग़द्दारी करती है।   जो उसका मुहाफ़िज़ होता है जो उसको हमदर्द होता है उसी के गले लग कर पीठ में खंजर घोंप देती है।  भलें ही वोह शिव सेना हो, अकाली दल हो या तेलगू देशम हो या कोई और शख्स जो उससे हमदर्दी का इज़हार करे उसके ही पीठ में अपना मुवाफ़िक़ और अच्छा वक़्त देख कर पीठ में खंजर उतार देना उसकी पुरानी आदत है।   "ग़द्दार"  इस ग़द्दारी में बीजेपी की माता जी भी आ गई, जी हाँ भारत माता की पीठ में भी कई दफा खंजर खोपा गया है। 

नाज़रीन यह सही वक़्त है जब ऐसी ग़द्दार और एतेबार का क़तल करने वाली तंज़ीम का सियासी और समाजी बॉयकॉट किया जाए।  उस तंज़ीम को अलहदा कर दिया जाए ना तो उसकी कोई बात सूने और ना ही उसके किसी भी नुमाइंदे से कोई गुफ्तगू की जाए। 

यह सहाफी किसी भी मुजरिम जिस ने कोई गुनाह किया है, उसके समाजी अलहदगी का हामी रहा है।  इस ज़िम्न में बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू, और संघी दहशत हर क़िस्म के जुर्म, भारत और तमाम आलम में दहशत के लिए मशहूर हो चुके हैं।  अब इन जैसे अनासिरों की समाजी और सियासी अलहदगी ज़रूरी है।   गोया की वोह माशारती और सियासी अछूत हैं।

इस सहाफी ने आलमी बरदारी से इसी क़िस्म की समाजी और सियासी अलहदगी की गुज़ारिश इजराइल के लिए भी की है।  और अब यही अमल संघी और बीजेपी तंज़ीम के लिए भारत में भी तवक़्क़ो करता हूँ।

शिद्दत पसंद हिन्दू, संघी दहशत और बीजेपी का समाजी बायकाट उसकी इन्तेहापसन्दी, शातिर मुजरिमाना सोच की वजह से नहीं है बल्कि उसकी भारत के साथ ग़द्दारी की वजह से है।  यह अपने ख़ुद के मुहाफ़िज़, हमदर्द और क़ानून की खिलाफवर्जी करती है और अपने आपको वतन का सबसे बड़ा वफादार होने का दावा करती है।  १९९२ में नरसिम्हा राव जो की संघ का कारकून और बीजेपी का मुहाफ़िज़ था उसने एक क़ानून बनाया, की १९४७ के बाद से जो भी मज़हबी इमारतें हैं वोह जिस हालात में थी वैसी ही रहेगीं और उसके ऊपर किसी क़िस्म का दावा माना नहीं जाएगा।  लेकिन २०२१ में भारत की अदालिया ने दिल्ली और वाराणसी की मस्जिदों की निस्बत से हिकमते अमली का नोटिस जारी कर दिए।    उत्तर प्रदेश में दो १००० साल पुरानी मस्जिदों को मिस्मार कर दिया गया।  क्या इन लोगों ने अपने ख़ुद के सिपाहसालार नरसिम्हा राव के बनाये गए क़ानून की खिलाफवर्जी नहीं की है।  

इस तरह की फ़िरक़ावारना हरकतें इन्तेख़ाब से क़ब्ल होती हैंताके इन्तेख़ाब को मज़हब के नाम पर मुत्तासिर किया जा सके और वोट बैंक सियासत कर के अक्सरियत तबक़े के वोट बीजेपी के हक़ में एक जा किया जा सकें।    यह तमाम दहशत अगले साल उत्तर प्रदेश के इन्तेख़ाब को मुत्तासिर करने के लिए हो रही है।   ताहम ३ मुद्दों से मज़ीद जिसकी वज़ाहत होती है।  की अभी मज़हब की सियासत मज़ीद आगे बढ़ेगी।  

१.          धूनी रमाओ मोहीम:  संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू और तंज़ीम बीजपी ने किसी मंदर की राख जला कर धुँआ करने का आगाज़ किया है।  ऐसा करते वक़्त यह लोग अजीब किस्म बेहूदा कलेमात पढ़तें हुए तमाम इलाक़े में फिरते हैं।  इनका मानना है की मंदिर के इस धुँवे से हम कोविद जंग जीत जायेगें।  जबकी तिब्बी महरिनों, जांच और साइंसदानों से यह साबित होता है की धूवाँ धुल धमासा कोविद मरीज़ों के लिए ज़हर हैं।

२.     मध्य प्रदेश में पाकिस्तानी बेगम और हाफिज सईद की बीवी कोविद के एक इजलास को खिताब करते हुए बोलती है की गाये के पखाने पेशाब से कोविद ठीक हो सकता है।   उसने गाये का पेशाब पी पी कर अपने फेफड़ों को तंदुरस्त रखा है।   जबकि तिब्बी उलूम के महरीन, तहक़ीक़ीन, साइंसदानों ने इस बात की कभी तस्दीक़ नहीं की है की किसी जानवर का पख़ाना, पेशाब खाने पीने से किसी बीमारी से शिफा हासिल होती है।  अगर पाकिस्तानी बेगम का नजरिया दुरुस्त है तो ज़ाफ़रानी हुकूमत को तमाम शिफ़ा ख़ाने, तहक़ीक़ाती इदारे, ईएमएस बंद कर के गोशाला खोल देना चाहिए।  अब मरीज़ों को बजाये शफाखाने के दाखिल करने के गोशाला में भेजना चाहिए।

३.             बिल आख़िर शिद्दत पसंद हिन्दू अपनी हक़ीक़ी मादर गाये पर लौट आये, और वही हूजूमी दहशत का रास्ता इख़्तेयार किया।  उत्तर प्रदेश में गुजिश्ता हफ्ते एक मुस्लिम ताजिर को बज़र्ब मारा पीटा गया उनके ऊपर इलज़ाम था की वोह गाये का गोश्त फरोख्त करने जा रहें हैं।  पुलिस ने भी मज़लूम को हिरासत में ले लिया जबकी दहशतगर्द सरे आम घूम रहे हैं।  उत्तर प्रदेश के हादसे के बाद आसाम का एक दहशतगर बोलता है की हमें गाये का क़त्ल बंद कर उसको मेहफ़ूज़ करना होगा।  उत्तर प्रदेश में ज़ाफ़रानी हुकूमत है आसाम में दूसरी बार ज़ाफ़रानी हुकूमत आ गई फिर आप किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हो।  फिर यह तमाम बातें महज़ इन्तेख़ाब से क़ब्ल ही काहे को हरकत में आतें हैं।  महज़ एक हफ्ते में उत्तर प्रदेश में ३ हूजूमी दहशत से मुस्लिम नौजवानों की मौत वाक़े हुई।   एक खाकी दहशत ने की और २ ज़ाफ़रानी।  २ ७०० से ८०० साल पुरानी मस्जिदें मिस्मार कर दी गई।  महज़ वोट बैंक पॉलिटिक्स को देखते हुए। 

यह तीन क़िस्से इस बात को समझने के लिए काफी हैं की उत्तर प्रदेश में इन्तेख़ाब होने वाले हैं।  आगे के दिनों में मज़ीद फ़िरक़ावाराना माहौल गर्म होगा।  जैसे जैसे इन्तेख़ाब नज़दीक आयेगें जंग में पाकिस्तान, मुस्लिम, इस्लाम, मुग़ल और बोहोत से लायानी मुद्दे अवाम का ज़हन मोड़ने के लिए पैदा होंगे।  ताजनगर की मुतानाज़ा इमारत फिर से पैदा होगी।

ऐसे लायानी और ग़ैर मुनासिब मुद्दों को इन्तेख़ाब से क़ब्ल अवाम के दरमियान पेश कर उनके ज़हन में वस्वसे डाल करबुनयादी मुद्दों से ज़हन हटाना होता है।  क्योंकि गुजिश्ता ५ साल तो कुछ काम किया ही नहीं, ना उत्तर प्रदेश जुर्म से पाक हो सका, ना ही कोई विकास पैदा हुआ, ना मुलाज़मत उसके ऊपर कोविद की जंग में इन्तेज़ामियाँ और हुकूमत की बदनज़्मी, बदइंतज़ामी।  तो किस मुद्दे पर यह बीजेपी पुर जोश पुर एतेमाद तरीके से वोट मांगेगी।  ऐसी सूरते हाल में ज़हन में इन्तेशार पैदा कर के दूसरी जानिब माइल कर दो।  इसीलिए वोह फिर से मज़हब की सियासत पर आ गए।  अब हिन्दू मज़हब और उसनसे जुड़े जज़्बाती मुद्दों पर वोट माँगेगें।  मंदिर मस्जिद के नाम पर गाये के नाम पर।  शमशान और गंगा के नाम पर वोट मांगेंगे। 

बिल फ़र्ज़ उत्तर प्रदेश में फिर से बीजेपी आती है तो साबित हो जाएगा की उत्तर प्रदेश का अवाम बेहद अनपढ़ और ग़ुलाम हैं, एक ऐसी तंज़ीम को फिर से गले लगा कर काम करने के मौक़ा दिया जो ग़द्दार है, एहसान फरामोश और गले लग कर पीठ में खंजर उतारने वाली तंज़ीम है। 

Zuber

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