Wednesday, 5 May 2021

करोना फ़ौजिओं से जंग में मारा गया ब्लैक कैट कमांडो।

 अज़ीज़ नाज़रीन,

नाज़रीन जंगे करोना बेहद पेचीदा मरहले में पहुंच गई है और अब तो करोना फौजियों ने भारतीय फौज के ब्लैक कैट कमांडो तक को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया है।  यह बोहोत बड़ी बात है कोई मामूली बात नहीं है, ब्लैक कैट कमांडो मर रहें हैं मतलब जंग अब हतमी मरहले की जानिब बढ़ रही है।  

आज का मज़मून बोहोत ही तल्ख़ है लेकिन उम्मीद करता हूँ आप हज़रात अलफ़ाज़ की तल्ख़ी को नज़र अंदाज़ कर के हक़ीक़त से रू बरू होने की कोशिश करेंगे।   नाज़रीन सहाफी की तल्ख़ी उस समाज के साथ भी है जो नाबीना हो कर महज़ जज़्बाती मुद्दों पर हिन्दू मुस्लिम, मंदिर मस्जिद, पाकिस्तान कश्मीर मुगल जैसे बेहूदा और लायानी मुद्दों पर एक फरेबी, दोगली और वतन की गद्दार पार्टी को वोट देते रहे।  नतीजा आज आप लोगो के सामने है।  आज किसी भी भारतीय को मरते हुए बोलो जय जय .........  या भारत ........... की जय या फिर वनदे.......... बोल के उसकी जान बचा लो तो में भी कल से इन शोलोकों का स्मरण करना शुरू कर दूंगा।   जबकि होना क्या चाहिए था जब भी संघी, महासभाई, शिद्दत पसंद, भाजपाई ऐसी बातों में उलझा कर अपनी बदकारियों पर पर्दा डालने की कोशिश करते थे उसी वक़्त उनको हलाक कर देना था तो कम से कम आज अवाम ज़िंदा होता।   

शिफ़ा ख़ाने बनाने के बजाये मोदी तो राम मंदिर बनाने में ज़्यादा तवज्जो दे रहा था, ३००० करोड़ की पटेल की मूर्ती बनाई अब में पूछता हूँ उस गुजरात में करोना जंग का क्या हाल है।  अब उसकी यूनिटी का मुजस्समा किस किस को बचा सकता है।  लेकिन सिर्फ वोट बैंक और तुष्टिगुण की सियसत।   उसकी जगह अगर शफाखाने बनाये होते ऑक्सीजन के पलांट लगाए होते तो बात कुछ और होती।  

दिल्ली में करोना से जंग लड़ते हुए ब्लैक कैट कमांडो यांही NSG के ग्रुप कमांडर की मौत हो गई है। करोना फ़ौजिओं के हाथों ज़ख़्मी ब्लैक कैट कमांडो बीरेंद्र कुमार झा को फौरी तिब्बी इमदाद और आई सी यूं बेड ना मिलने के सबब उसकी मौत वाक़े हुई। 

बीरेंद्र कुमार झा २२ अप्रैल को करोना से जंग लड़ते हुए शदीद ज़ख़्मी हो गया था, उसको अर्ध सैनिक बल के रेफरल शिफ़ा ख़ाने नोयडा में भर्ती किया गया था।  उस वक़्त उसकी हालत मुस्तहकम और नार्मल थी।   ४ मई शाम ६ बजे के बाद उसकी तबियत यकायक बिगड़ी, जिसमे उसका ऑक्सीजन लेवल में फौरी तर्ज़ पर ज़वाल आया।   

बीरेंद्र कुमार झा को रेफरल शिफ़ा ख़ाने में आई सी यूं बेड खाली ना होने के सबब दुसरे शिफ़ा ख़ाने में ले जाने की सलाह दी गई।  अब हॉस्पिटल तलाश करने की मोहीम करोना के बाद एक और जंग का आगाज़ शुरू हुआ उसमे क़रीबन ५ से ७ घाटों का वक़्फ़ा निकल गया।  इस दौरान कंमांडो झा की तबियत मज़ीद नासाज़ होती चली गई।

अब अधमरे NSG कमांडो को उसके अज़ीज़ इधर से उधर ले कर भागते रहे।  बिहार से दिल्ली हॉस्पिटल में बेड तलाश करने का सिलसिला थमता नज़र नही आ रहा था।  बिल आख़िर कमांडो को एस्कार्ट फोर्टिस दिल्ली में भर्ती करने के लिए मंज़ूरी मिल गई लेकिन तब तक बोहोत देर हो चुकी थी।  और उनको शिफ़ा ख़ाने में जगह मिलती उससे पहले मौत के पंजों ने उनको अपनी आगोश में जकड लिया और शमशान घाट में जगह मिल गई।  

सहाफी जुबेर का हलाते हाजरा पर नज़रिया

हक़ और इन्साफ का परचम बुलंद करने वालों की कभी रूसवाई और ज़लालत नहीं होती है।  बेइज़्ज़त्ती और रूसवाई का जाम तो सिर्फ और सिर्फ नाइंसाफ, दरिंदा सिफ़त, क़साइयों के हक़ में आता है।   

जहाँ एक जानिब महाराष्ट्र के वज़ीरे आला ने किया सूबे का नाम रोशन जो कभी जनखा पार्टी के एक अहम फौजी हुआ करते थे लेकिन वक़्त की नज़ाकत और भारतीय जनखा पार्टी की बदकारी, नाइंसाफी, हक़तल्फ़ी को भांप कर उन्होंने हक़ और इन्साफ का दामन थामा और नतीजा आज अवाम के सामने है।  वही दूसरी जानिब अदलिया को हक़ के साथ इन्साफ की तरग़ीब से आज महाराष्ट्र दिगर सूबों के बनिस्बत कई गुना आला सतह पर फ़ाइज़ है।  और दिल्ली हाई कोर्ट ने मुम्बाई की मिसाल दी है और कहा है आपसे अच्छी तो मुम्बाई है जो अब मुत्तसिरों की फेहरिस्त में कमी दर्ज कर रही है। 

वज़ीरे आला उद्धव ठाकरे आज हिन्द में सबसे ज़्यादा मक़बूल वज़ीरे आला की फेहरिस्त में पहला या दूसरा नंबर रखतें हैं।  

वजह क्या है वही हक़ और इन्साफ के साथ अवाम के फलाही कामों को करना ना की इंतेखाब के वक़्त सिर्फ हिन्दू मुस्लिम, राम मंदिर बाबरी, पाकिस्तान मुग़ल गद्दार वतन परास्ती की नई डेफिनेशन ले कर आ जाना और अवाम का ज़हन पूरी तरह से मुत्तसिब कर देना।  इंतेखाब ख़तम नारा ख़तम और अब कोई भी फलाही कामो पर तर्जी नहीं देना।  

आज भाजपा वाले बड़ी बड़ी बातें करतें हैं गाये का मॉस बंद करवा दिया, ३७० हटवा दिया, राम मंदिर बनवा दिया उससे एक भी मसला ऐसा हो जो की आज की तारिख में अवाम की जान बचा रहा है तो चलो में भी उस मुद्दे पर भाजपा के साथ खड़ा हो जाता हूँ।  इन कामों में से एक भी नहीं करती भाजपा लेकिन उससे दो गुनी तादात में शिफ़ा ख़ाने बनवा देती और नई दवाइयों की फैक्ट्रियां लगा देती तो हो सकता है करोना जंग में आज मददगार साबित होती। 

Zuber 

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