अज़ीज़ नाज़रीन,
जैसा की क़यास लगाया जा रहा था की आलमी दहशतगर्द और उसका सरगना अबू अल नेतन बगदादी की हालत इस जंग के बाद ऐसी हो जाएगी की आगे कुव्वा पीछे खाई। वही हुआ, जिस अंदाज़ में इस दहशतगर्द ने जंग का आगाज़ किया था और इसकी तंज़ीम यहूद स्टेट के दहशतगर्दों ने मासूम अवाम की गर्दन क़लम करना शुरू की थी, उसके बाद जंग जारी रखने और अमन मोहायेदा करने दोनों ही सूरतों में इस दहशतगर्द की फ़ज़ीहत और बेइज़्ज़ती हर ज़हीन तालीमी आफ़ता सहाफी, आलमी बरादरी और जंगी ताज़ियाकार महसूस कर सकते थे।
अगर अबू अल नेतन बगदादी जंग जारी रखता तो उसके वतन दहशतगर्द इजराइल की माशी हालत पतली पर पतली होती चली जा रही थी। ख़ाना जंगी का खादशा बढ़ता जा रहा था और अमन क़रार किया तो घुटनों के बल रेंगने जैसा होगा। वोह भी एक ऐसी तंज़ीम हमास जो बेहद कमज़ोर है और इजराइल के मुक़ाबले में जिसका वजूद अभी तो आलमी सतह पर पहचान बनाने भी नहीं पाया है। वोह हमास सुपर पावर, आयरन डोम वाले, आला दर्जे की फौजी सलाहियत वाले, बेहतर जदीद हथियारों से आरास्ता, बेहतरीन क़ुव्वत वाले फ़िज़ाई फौजी और तमाम क़ुव्वत से आरास्ता इजराइल को जंग बंद करने पर मजबूर कर देता है। हमास की तमाम शर्तों पर इजराइल अमन मोहायदा करता है। क्या यह बड़ी बात नहीं है। इस मसले को तमाम सहाफी और आलमी जंग ताजियादार हमास की जीत तस्सव्वुर कर रहें हैं। क्योंकि जिस क़ुव्वत और सुपर पावर इजराइल से एक अदना बेहद अदना मुल्क नहीं बल्कि तंज़ीम ने अमन मोहायदा अपनी शर्तों पर मुक्कम्मल किया है यह किस जीत से कम नहीं है।
अबू अल नेतन बगदादी और उसके ज़ालिम तरीन दहशतगर्द तो दुनियां के सबसे खतरनाक और बर्बर दहशतगर्दों की फेहरिस्त में दाख़िल हो चुके है। लेकिन इसको कोई करिश्मा ही कहा जाएगा एक करामात की एक सुपर पावर एक तंज़ीम के सामने घुटने टैंक देता है। इस जीत के साथ फलस्तीन अवाम में जश्न का माहौल है और यहूद दहशत में मातम। ग़ाज़ा शहर में फलीस्तीनी अवाम सड़कों पर निकल आये और जश्न में शामिल हुए ईद मुबारक के नारे लगाए।
नाज़रीन जैसा की इस सहाफी का नज़ारिया १७ रमज़ानुल मुबारक जंगे बद्र के बाद था वोह अब मुकम्मल होता दिख रहा है। दहशतगर्द अबू अल नेतन बगदादी अपने खुद के गड रक़्क़ा (इजराइल) में घिर गया है। उसके ख़ास दहशत के लूटिनेंट और सियासत के माहेरीनों ने अबू अल नेतन पर नुक़्ता चीनी करना शुरू कर दिया है।
अबू अल नेतन बगदादी के मुहाफ़िज़ वज़रा के बोर्ड की जानिब से गाज़ा पट्टी पर ११ रोज़ से चले आ रहे फौजी मोहीम को रोकने की एक तरफा सीज़ फायर की मंज़ूरी दे दी है। दरसअल दहशतगर्द बगदादी और उसके बर्बर रवैये मासूम बच्चो को एक क़तार में खड़ा कर के क़तल करने, अवाम पर तशद्दुत करने और दिगार सज़ा देने के फैसलों के ख़िलाफ़ आलमी बरदारी में सख्त तशवीश और गुस्सा देखा जा रहा था। रूस ने अमेरिका समेत दहशतगर्द इजराइल को धमकाया था अगर बर्बरता और यहूदी दहशतगर्दों का क़त्ल करने का खून बहाने का रव्वैया नहीं रुका तो वोह भी इस जंग का हिस्सा बन इजराइल की दहशत को जड़ से ख़तम कर देगा।
अब बगदादी पहले से मज़ीद मुफ़लिस और अपना विक़ार, इज़्ज़त खोने वाला अपने ही अवाम और वज़ीरों की नज़रों से गिरने वाला वज़ीर बन गया है। जिस कैबिने में सीज़ फायर का फैसला लेना था उस से क़ब्ल हॉप के सियासतदां गीदेयोन सार ने नेतन्याहू हुकूमत को कटघरे में खड़ा करते हुए सीज़ फायर की मज़्ज़म्मत की है। उसका सोचना था की सीज़ फायर का फैसला हमास और और दिगार तंज़ीमों के ख़िलाफ़ दहशतगर्द इजराइल को हिकमते अमली को बेहद नुकसान पहुचायेगा। इजराइल को फलस्तीन को उसके नुक़सान की भरपाई करना होगी। मीडिया के दफ्तरों पर जो बम दिराये उसका माक़ूल जवाज़ देना होगा। नहीं तो हर्जाना और माशी, हथियारों पर पाबन्दी।
उसका कहना था की सीज़ फायर हमास को मज़ीद मज़बूत और मक़बूल बनाएगा और ऐसा करने से क़ब्ल इजराइल को यहूदी दहशतगर्द जो हमास के क़ब्ज़े में हैं और यहूदी शिद्दत पसंद जो हमास ने क़ैद कर लिए हैं उनको बरी करवाने के बारे में बात करना थी।
ख़ैर यह तो आगाज़ है अभी भी वक़्त है दहशतगर्द नीतिनयाहू अगर मज़ीद तू तेरी और तेरी क़ौम यहूदी दहशतगर्दों को लाशें नहीं देखना चाहता तो इजराइल को छोड़ दे। अगर मज़ीद तेरे बड़े भाई भुफा जी के तरह हठधर्मी दिखाई में माफ़ी नहीं मांगूगा में रोज़े रखूंगा तो तेरा हशर तो उस फ़िरों और यज़ीद से भी बत्तर होने वाला है। फ़िरों की लाश आती दुनिया के लिए इबरत है और यज़ीद की लाश को चील कव्वे और कुत्तों ने नोचा था। उसकी लाश में कीड़े पड़े थे जबकी सबसे बड़ी ममलेकत का बादशाह था, लेकिन मालिके कायनात ने ऐसी जगह ले जा कर मौत दी के हफ़्तों उसकी लाश का कोई वली वारिस ना था।
इतना ही नहीं उसको मारने वाली एक यहूदी ख़ातून थी। उस बच्ची को इमामे हुसैन के ऊपर की गई ज्यात्ति और उनके एहले ख़ाना के ऊपर बे जा जब्र तशद्दुत करने से इमामे हुसैन से हक़ीक़ी इश्क़ हो गया फिर उस बच्ची ने उनकी शहादत के बाद क़सम खाई की इमाम हुसैन का क़िसास वोह इस ज़ालिम बादशाह से ले कर रहेगी।
उस बच्ची के अज़्म को देखते हुए अल्लाह ने उसकी मदद की और उसने अपने ज़िम्नी इश्क़ में यज़ीद को ऐसी जगह मौत दी जहाँ कोई मादर ज़ात बच्चा और दूर दूर तक ना कोई बस्ती थी। हफ़्तों बाद जब उसकी लाश सड़ गल गई चील कव्वों ने नौच लिया कीड़े पड़ गए तब जा कर फ़ौजिओं ने ख़ामोशी से उसको दफ़न कर दिया। मलून।
वोह भी मारा गया था तू भी मारा जाएगा। हट छोड़ दे इजराइल छोड़ दे। तू हरगिज़ हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत पायेगा। जिसका ज़िक्र यह सहाफी अपनी कई अंग्रेज़ी और हिंदी मज़्मूनों में कर चूका है। अगर भारत और इजराइल यह समझ रहें हैं की हम जंग जीत जायेगें तो ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। क्योंकि इस बार जंग पाकिस्तान या मुसलमानों से नहीं है बरक्स खुद मालिके कायनात से है।
अभी तो इजराइल में बड़ी तबाही आना बाक़ी है, एक नहीं दो नहीं तीन नहीं बल्कि पांच हाँ हाँ पूरे पांच और पांचवी आखिर होंगी जिसके बाद तमाम यहूदी साफ़। इजराइल पाक।
नितिन याहू अगर तूने भारत के हिटलर के जैसे हठधर्मी दिखाई तो हम तुझे मार डालेगें। लेकिन तू अपनी ही क़ौम यहूद की मौत और बर्बादी का भी ज़िम्मेदार होगा। #भारत
Zuber
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