Wednesday, 28 April 2021

करोना फौजियों की ज़बरदस्त यलग़ार

सहाफी जुबेर

लखनऊ उत्तर प्रदेश २८, अप्रैल २०२१

करोना के साथ जंग में ज़ाफ़रानी फौजियों और उसके एरिया कमेंडेण्ट्स की हर दुसरे मौत से दहशत की कमर तोड़ डाली है।  इस बार बरेली के नवाबगंज से बीजेपी का एरिया कमेंडेन्ट रकूने असेंबली केसर सिंह गंगवार ढेर हुआ है।  उसको करोना फौजियों ने घेर का मौत की नींद सूला दिया।  मरने से पहले वोह करोना फौजियों से ना मारने की भीक मांग रहा है।   श्री राम की क़सम अब में कभी हिन्दू मुस्लिम नहीं करूंगा। और ना ही ऐसा नारा दूंगा अयोध्या तो झांकी है मथुरा काशी अभी बाक़ी है।  इस दहशतगर्द के ढेर होने से बीजेपी नामक दहशत की पालनहार और उसकी मददगार की बोलती बंद हो चुकी है।   इस हफ्ते का बीजेपी का यह तीसरा बड़ा दहशतगर्द करोना फ़ौजिओं ने ढेर किया है।  

गुजिश्ता हफ्ते केसर सिंह करोना फौजियों से घिर गया था।  उसको शदीद ज़ख़्मी हालत में शिफा खाने में दाखिल किया गया था।  उसका इलाज़ शिफा खाने में शुरू किया गया था।   लेकिन साधू का प्रदेश जहाँ आम दिनों में ज़रूरी साज़ सामान की कमी होती है तो दौराने जंग तो हालात मज़ीद पेचीदा होते हैं।   वैसे भी आज कल उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की क़िल्लत, दवाइयों की क़िल्लत, जो भी आला तालीमी आफ़ता जर्राह थे उनको योगी ने अपनी अना के चलते या तो जेल भेज दिया या फिर उनसे बदला लेने की वजह से उनको मुलाज़मत से निकाल दिया तो अब नतीजा वोही भुगत रहा है।  ऐसी सूरत में बेहतर इंतज़ाम ना होने की वजह से केसर सिंह की हालत बिगड़ती गई, और आखिर कार वोह मौत और ज़िन्दगी की जंग हार गया। 

केसर सिंह के फ़रज़न्द विशाल गंगावार ने अपनी तकलीफ सोशल मिडिया पर भी बयान की थी, लेकिन उसका कुछ ज़्यादा असर नहीं दिखा कियोंके अगर विशाल की अपील के बाद केसर को बचा लिया जाता तो बात सही होती। 

यह कुदरती वबा हर उस इंसान को ख़ौफ़ज़दा कर रही है जिसने अपनी ज़िन्दगी में कुछ तो नाइंसाफी और किसी की हक़तल्फ़ी की है।  हर मुद्दे पर फरेब इख़्तेयार करना और हिन्दू मुस्लिम बना कर अवाम की तवज्जो ही असल मुद्दे से हटा देना।  अब सबकी आएगी बारी। 

जंग का सूर फूंका जा चूका है, और रमज़ान शरीफ का आगाज़ होने से पहले ही इस ज़िम्न में पाकीज़ा फौजियों को एक एडवाइज़री जारी की गई थी।   जिसपे अमल हो रहा है।   अभी तो १५ रमज़ान ही हुए हैं, १५ अभी और हैं बाक़ी।  

 Zuber 

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...