नाज़रीन जो कहा कर के दिखाया, इजराइल पुत्रों या हराम पुत्रों ने मुस्लिम अवाम को शुमाली सूबे में हूजूमी दहशत के साथ शहीद किया था। २४ मई २०२१ का मज़मून “क़िसास मुक्कम्मल, दीफ़ाई…………” लिखे जाने तक इस सहाफी के पास २ मुस्लिम नौजवानों की शहादत की इत्तेला थी। उस मज़मून में साधू और मंदिर पुत्र को साफ़ तौर पर चेतवानी दी गई थी की २ बदला २० से या २०० से लेंगें। चल योगी तेरे कितने मारे जाते हैं और मुस्लिम कितने। फिर शुरू हुई जंग। २४ मई से ले कर अभी तक शुमाली सूबे में कुछ ३० से ४० अफ़राद मारे जा चुके हैं। इसमें कोविद फ़ौजिओं की जानिब से मारे गए अफ़राद शामिल नहीं हैं। नहीं तो अदद शुमारी हज़ारों में पहुंचेगी। ख़ैर अब आज की ताज़ा अमवातों के बारे में बात कर लेते हैं।
लखनऊ शुमाली सूबे के हरदोई की संडीला सीट पर क़ाबिज़ सत्ता धारी भारतीय जनखा पार्टी (बीजेपी) के रकूने असेंबली राजकुमार अग्रवाल का लौंडा आशीष अग्रवाल की मौत पर विधायक महोदय ने हिन्दू शिफ़ा ख़ाने के ऊपर इलज़ाम तराशी का आगाज़ कर दिया है। रकूने असेंबली ने अपने लौंडे की मौत पर अर्थव शिफ़ा ख़ाने पर इलज़ाम लगाया था, की ऑक्सीजन की कमी और इलाज में ग़फ़लत की वजह से उसका लौंडा मारा गया।
शुमाली सूबे की दारुल ख़लीफ़ा लखनऊ के काकोरी हल्क़े में वाक़े अर्थव शिफ़ा ख़ाने के मालिक जर्राह संदीप गुप्ता ने बीजेपी के रकूने असेंबली की जानिब से की गयी इलज़ाम तराशी को बेबुनयाद बताया है। उसका कहना है की रकूने अस्सेब्ली के लौंडे के इलाज में कोई गफलत नहीं की गई और ना ही किसी क़िस्म की ऑक्सीजन की कमी थी।
दूसरा मामला शुमाली सूबे के सीतापुर से है जहाँ एक शादी खाना आबादी में मौत का मातम पसर गया। हुआ यह की सीतापुर के कमलपुर थाना इलाक़े में हनुमानपुर गांव में राजेंद्र पाल की दुख्तर की शादी खाना आबादी का जश्न चल रहा था। विसावा गांव से बरात आई हुई थी, तभी द्वारचार की रस्म से क़ब्ल तेज़ तूफ़ान आया और हाई टेंशन के ११००० वाट का तार शामयाने पर आ गिरा और करंट तमाम पंडाल में फ़ैल गया। बिजली के करंट की ज़द में आ कर कुल १० अफ़राद शदीद झुलस गए जिसमे से ७ की जान दौरान इलाज चली गई।
तीसरा हिस्सा अलीगढ़ से ताल्लुक़ रखता है जहाँ ज़हरीले शराब पीने
से कुल २२ अफ़राद मारे जा चुके हैं और कम से कम १०० से ज़्यादा बीमार हो चुके हैं। मरने वालों की तादात मज़ीद बढ़ने के इमकान हैं।
नाज़रीन इस जंग का आप भी हिस्सा बन सकतें हैं। यह जंग हिन्दू मुस्लिम नहीं है और ना ही किसी ज़ात मज़हब के खिलाफ है बल्कि यह जंग इन्साफ और नाइंसाफी के खिलाफ है। ज़ालिम और मज़लूम के दरमियान है. शुमाली सूबे में साधू की क़साई और ज़ालिमाना फितरत से ख़ाकी दहशत खूब मुत्तासिर हो रहें हैं। किसी भी मज़लूम पर तशद्दुत करना डंडे लाठी और दिगर हथियारों से बज़र्ब पीट पीट कर हलाक कर देना यह तो आम फितरत हो गई है। रात की तारीकी में गिरोह गर्दाना ज़िना बिल जब्र की बच्ची को बग़ैर उसके एहले ख़ाना की इजाज़त के आतिशे नार कर देना।
जो सहाफी इस मुद्दे पर मज़ीद तहक़ीक़ात करने पहुंचे उनमे से सिर्फ मुस्लिम सहाफी सिद्दीक़ी कप्पन को जेल में डाल देना क्योंकि साधू और मंदिर पुत्र को बरहना नहीं होना था. और वोह जिस तरह से ज़ाफ़रानी नक़ाब के पीछे पोशीदा क़साई, जल्लाद, ओरतों की दलाली करने वाला बेरूपिया है उसका शैतानी चेहरा अवाम के सामने नही आने देना था. इस तरह की तमाम नाइंसाफी और हक़तल्फ़ी से इस जंग का हिस्सा बनने के लिए आपको क्या करना है। बस इन्साफ का साथ दीजिये अगर ख़ाकी दहशत बग़ैर किसी क़ानूनी और जाइज़ वजह के किसी भी अफ़राद पर हमला करतें हैं या किसी भी इबादत गाह को तोड़ते हैं किसी की निजी जायदात को तोड़ते हैं या दहशत मचाते हैं तो आप लोग हुजूम में निकल कर इन दहशतगर्दों पर हमलावर हो जाइये। फिर देखिये एक दो जगह अगर यह ख़ाकी दहशत नाकाम हो गई तो इनकी हिम्मत पस्त हो जाएगी।
इन ख़ाकी दहशत या हूकूमती ग़ुलामों पर हमला करते वक़्त आपको हिन्दू
मुस्लिम के ज़ाविये से नहीं देखना है बल्कि इन्साफ और ना इंसाफ़ी के ज़ाविये से देखना
है। और आपको मज़लूम का साथ देना है और ज़ालिम
पर हमला करना है। अगर आप ऐसा करते हैं तो हो
गए मेरे साथी और मेरी जंग का हिस्सा।
Zuber
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