Friday, 7 May 2021

जंगे करोना में एक दहशतगर्द कमेंडेन्ट और ढेर।

ज़ाफ़रानी दहशत का अड्डा और साधू की शैतानी ताक़त पस्त होते दिख रही है।   इस जंग में तीन बड़े झटके दहशत की मुहाफ़िज़ ज़ाफ़रानी तंज़ीम को लगे हैं। 

१.         वेस्ट बंगाल में करारी शाकिस्त, वोह भी ऐसी की पिछवाड़ा सुर्ख हो गया। अकेली दीदी ने पीट पीट के राम का बन्दर बना दिया।   इन संघियों ने दीदी को मेहमान बना कर उनकी बेइज़ती की थी, स्टेज पर दीदी के जलवा अफ़रोज़ होते ही दहशतगर्द अपना पसंदीदा नारा लगाने लगे।   जय जय श्री............ अब सम्भालो राम का बन्दर।  

२.        ज़ाफ़रानी सूबे और तबाह होते दहशत की पनाह उत्तर प्रदेश में बल्दिया के इंतेखाबात में बीजेपी को करारी शाकिस्त।   जिस मथुरा काशी के ऊपर संघी दहशत और शिद्दत पसंद पोंगाते फिरते थे वहां पर भी आलते के पालते हो गए।   रहा सवाल मोदी की गुफा (भोग) काशी वारणशी वहां तो साधू भी अब कभी दाखिल नहीं हो पायेगा।   जो शिद्दत पसंद नारा लगाते थे "अयोध्या तो झांकी है, मथुरा काशी अभी बाक़ी है" उन सभी के दिलों दिमाग पे ताला लग गया है।   बंद हो गए।   

३.        रही सही कसर हर रोज़ के शिद्दत पसंद और ज़हरीले साँपों की जंगे करोना में मौत से भाजपा की हालत पतली पर पतली होती जा रही है। ताज़ा एनकाउंटर में रायबरेली की सैलून असेम्ली सीट से बीजेपी के दहशत का एरिया कमेंडेन्ट और साबिक़ वज़ीर दल बहादुर कोरी को करोना फ़ौजिओं ने एनकाउटर में ढेर कर दिया। वोह गुजिश्ता दिनों करोना फ़ौजिओं से घिर गया था।   एनकाउंटर में ज़ख़्मी हो गया था।  करोना फ़ौजिओं ने उसको खुद को उनके हवाले करने को कहा, उसपर उसने गोली बारी शुरू कर दी (करोना का इलाज शुरू कर दिया)।   उसपर करोना फौजी ३ गुनी ताक़त और क़ुव्वत से टूट पड़े और उसको एनकाउंटर में ढेर कर दिया।   

करोना फ़ौजिओं ने उसका पीछा तब तक नहीं छोड़ा जब तक वोह मौत की आगोश में नहीं चला गया।   इस मालून को बोहोत तड़पा तड़पा कर ढेर किया गया है।   ज़ख्मो की शिद्दत और तकलीफ से यह मालून चीख़ता और चिल्लाता था।  वैसे ही जैसे किसी वक़्त मुस्लिम बेगुनाह अवाम पर शिद्दत पसंद ज़ुल्म और जब्र करते थे और हुजूम बना कर घेरा कर के उनको तिल तिल शहीद करते थे।   तबरेज़, अलीमुद्दीन, जुनेद, पहलू, अख़लाक़ लम्बी फेहरसीत है। 

इससे पेश्तर ज़ाफ़रानी सूबे उत्तर प्रदेश के ३ रकूने असेंबली रमेश दिवाकर, सुरेश श्रीवास्तव, केसर सिंह गैंगवार पहले ही करोना फ़ौजिओं से जंग लड़ते हुए ढेर हो चुके हैं।

यह मालून शैतान रावण बीजेपी का रकूने असेंबली दल बहादुर कोरी राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा हुआ था।   तमाम बदले एक साथ मुकम्मल हुए, यह शख्स राम मंदिर से जुड़ा होने के सबब इसके मारे जाने पर दो गुनी मुसर्रत और ख़ुशी है दूसरी जिस घर वापसी की मोहीम बीजेपी ने चलाई थी तो यह रावण २००४ में कांग्रेस में जा कर २०१४ में घर वापिसी कर के फिर से बीजेपी में शामिल हो गया था।   आज इसकी शमशान वापसी हो गई।

अरे रूको ज़रा इत्मीनान रखो, धक्का बुक्की नहीं करने का।   आएगा हर शिद्दत पसंद हिन्दू, बीजेपी वाले, संघी दहशतगर्द सबका नंबर आएगा।   यह बात तो हमारी ख़ानक़ाह में पहले ही ते हो चुकी है जिसका ज़िक्र कई मज़मूनों और तब्सिरों में किया जा चूका है।   हर शिद्दत पसंद हिन्दू, हर बीजेपी वालाहर संघी दहशतगर्द मारा जाएगा।  

क्या वज़ीर क्या फ़क़ीर (छोला छाप)।   तबाही ऐसी की लाशें ही लाशें।  हर जानिब आतिश अंगार।   कोई नहीं बचेगा यह इताबे इलाही है।   जब नूह का सफीना तेर रहा था और उनके बेटे ने हठधर्मी दिखाई तो वोह नहीं बच सका तो यह तो शिद्दत पसंद, ज़ालिम, दरिंदा सिफ़त काफिर हैं यह कैसे बचेगें।   

नाज़रीन गालेबान २०१६ से हर मज़मून में यह सहाफी इताबे इलाही का ज़िक्र करता था और नूह अलैहे सलाम के सफ़ीने और उनके काफिर बेटे के ऊपर कई मज़मून भी लिखे हैं। हर बार अज़ाबे इलाही और ऊपर वाले के गज़ब का हवाला दिया था।   काश यह अज़ाब आने से पेश्तर हूकूमते हिन्द की आँखे खुल जाती और शिद्दत पसंद अपनी दरिंदगी से बाज़ आते तो आज हर जानिब उनको अपनों की आमवात ना देखना पड़ती। 

ख़ैर इंसानियत पर जो बिगाड़ा इन लोगों ने करना था कर दिया और अब तो अज़ाब आ चूका है अब जो इनका बिगाड़ा मालिके मुतलक़ को करना है वोह कर के रहेगा।  

राम मंदिर के मुत्तसिब फैसले के बाद कई एक मज़मूनों में यह बात भी कही है तुम फरेब मचा कर धोखे से डाका डाल कर राम का मंदिर बना तो रहे हो लेकिन तुमको उसमे सुकून नहीं मिलेगा और अगर राम सच्चे होंगे तो वोह ख़ुद आ कर तुम लोगों को मौत के घाट उतार देंगें।   क्योंकि वोह मर्यादा पुरषोत्तम थे और वोह कभी यह नहीं चाहेगें की उनका मंदिर एक लूटी हुई डाका डाली हुई फरेब से धोखे से हासिल की हुई ज़मीन पर और दुसरे मज़हब की इबादत गाह को तोड़ कर बनाया जाए।  

Zuber

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