Sunday, 16 May 2021

हराम की जनी और नाजाइज़ औलादों को वालिद का झटका।


ऐसा कहतें हैं जो औलादें मर्द और औरत के नाजाइज़ रिश्ते और हरामकारी से पैदा हुई होती हैं उनको आगे चल कर ऐसे वाल्दैन भी पूछना बंद कर देतें हैं जो उनकी गलती और ज़िना के नतीजे में पैदा हुई होती हैं।   अब ऐसी नाजाइज़ ओलादे गटर से चाय बनाने के नुस्खे खोजती हैं और अपने बच्चो को पकोड़े बनाने का तरीक़ा सिखाती हैं।   या फिर गाये का पख़ाना पेशाब खाना पीना सिखाती हैं, और बजाये क़लम हाथ में देने के तलवार हाथों में दे कर नफरत और तास्सुब का ज़हर पीला पीला कर उनको बड़ा किया जाता है। ऐसे ही ज़हरीले हरामिहयों में से एक है  तेजस्वी सूर्य नाजाइज़ और हरामी, और अवामी जायदाद कगना राणावत।  इस अवामी जायदाद कंगना राणावत को हर वक़्त अपने सूखे हुए कुव्वे (भोग) में से पानी निकालने की खवाहिश रहती है। किसी भी सड़क चलते राह गिर को पकड़ लिया और लगी उससे मेहनत मशक़्क़त करवाने। 

दूसरा है तेजस्वी सूर्य।  इस नाजाइज़ औलाद ने अपनी माता जी (भारत) को ले कर अपने नाजाइज़ बाप इजराइल के लिए हेश टैग चलाया था।   #India stand with Israel.

अब इस हराम के जने की ऐसी फ़ज़ीहत हो गई की इसके नाजाइज़ बाप इजराइल ने इसको अपना बेटा तस्सव्वुर करने से इंकार कर दिया।  हुआ यह की जिस माता जी (भारत) को इन भक्तों, संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसंद काफिरों और बीजेपी वालों ने बड़ा सजा धजा कर नाजाइज़ बाप के पास भेजा था उस भारत माता के साथ कई बार मौज मज़े कर लिए और इन जैसे नाजाइज़ बच्चे पैदा किये, लेकिन जब इनको अपना नाम देना था तो इनके नाजाइज़ बाप इजराइल ने इनका नाम ही नहीं लिया। 

हुआ यह है की हाल ही में फलस्तीन और दहशत के बाप इजराइल के दरमियान जंग के इमकानात को देखते हुए कई मुमालिकों ने इजराइल की हिमायत में ट्वीट्स किये। इजराइल का बगदादी बेंजामिन नीतिंयाहू ने उसके मुवाफ़ेक़त में ट्वीट करने वाले २५ मुमालिकों का नाम लिया और उनका शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस जंग में उसका साथ दिया है.  लेकिन अपनी नाजाइज़ औलाद भारत के भक्तों का नाम नहीं लिया। जिन्होंने फलस्तीन और दहशतगर्द इजराइल के माबेन जंग की सूरते हाल में इजराइल की हमदर्दी में ट्वीट किये थे।  इस २५ मुमालिकों में माता जी (भारत) का नाम दूर दूर तक कहीं नज़र नहीं आ रहा है।  

अब ऐसी सूरते हाल में नाजाइज़  और हराम के बच्चों को तीखा लग गया और लगे अपने ही नाजाइज़ बाप इजराइल पर लान तान करने बदला लेने के ट्वीट करने। फेमिली को तोड़ने और हम तो एक फेमिली है हमको कैसे फरामोश कर दिया आपने। 

भक्तों की हराम और नाजाइज़ पैदावार और तीखा लगने हालत देख कर १९७८ को शाया हुई फिल्म त्रिशूल की कहानी से काफी मेल खाती है।  शांति देवी (भारत माता) जो  मुफलिसी और ग़ुरबत की ज़िन्दगी जी रही है।  उसकी ग़ुरबत का फायदा उठा कर शांति देवी (भारत माता) का नाजाइज़ आशिक़ इजराइल (फिल्म में संजीव कुमार) ने मौज मस्ती की और उस अय्याशी को प्यार का नाम दे कर उस हद तक बढ़ गया की अमिताभ बच्चन (भक्त) जैसे नाजाइज़ औलादें पैदा कर डाली।   जब जिस्म की दर्जे हरारत ठंडी पड़ी और गरीब मुफ़लिस भिकारी शांति देवी (भारत माता) मज़ीद ग़ुरबत और बीमारी का शिकार हुए तो उस के नाजाइज़ आशिक़ ने दौलत, पोजीशन स्टेटस के साथ एक करोड़ पती सेठ की बेटी से शादी कर ली।  और शांति देवी (भारत माता) को ज़िन्दगी की जंग में तनहे तनहा छोड़ दिया।  बेसाहारा।  उस हरामी बच्चे (भक्तों) ने अपनी माता जी (भारत) को तिल तिल हर रोज़ मरते देखा था।  बीमारी ग़ुरबत और तकलीफों से जंग लड़ते लड़ते बिल आखिर माता जी फ़ौत हो गई। लेकिन मरने से पहले अपने नाजाइज़ आशिक़ इजराइल का नाम बता गई और बोल गई तेरी तबाही और मेरी बर्बादी का ज़िम्मेदार तेरा नाजाइज़ बाप है।   अब बारी भक्तों की थी उनको अक़्ल आ चुकी थी की हमारी माता जी को इस्तेमाल कर के उसके साथ मौज मस्ती की है और हम उस गंदगी, हरामकारी की पैदावार है मतलब हरामी हैं। 

उम्मीद है जिस तरह फिल्म में नाजाइज़ हरामी बच्चे को अक़्ल आ जाती है उसी तरह भारत माता और इजराइल की नाजाइज़ औलादों को भी अब अक़्ल आ जाना चाहिए।  क्योंकि बोहोत जल्द यह सब हरामी यतीम होने वाले हैं।  इनकी माता जी (भारत) तो हर तकलीफों, बीमारी, ग़ुरबत, मुफलिसी से जंग लड़ते लड़ते पहले ही मर चुकी है अब बारी नाजाइज़ बाप इजराइल की है।     


Zuber

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