इस पत्रकार ने पहले ही विश्लेषण कर
दिया था के २०१९ के चुनाव से पहले बाबरी मस्जिद के सन्दर्भ में बोहोत से पाखंडी बहार
निकलेंगे लेकिन वो सभी रूसवा और ज़लील होंगे.
फिर धीरे धीरे एक एक कर के पाखंडी बहार निकलते गए और रूसवा होते गए. और एक एक
कर के आतंकवादी आते गए और कट के गिरते गए.
सबसे पहले तूसी नमक पाखंडी जो अपने आपको बाबर और अकबर महान का वंशज कहता है
वो निकला था लेकिन बेआबरू हुआ. फिर कोई मौलाना निकले वो भी रूसवा हुए, फिर एक डकैत
साधू आया वो भी आया राम गया राम हो गया. इस
कड़ी में अगला नाम उस नामुराद का है जो सत्तारूढ़ बीजेपी का गुलाम और मोहरा है. और उसने
इस्लाम और मुस्लिम समाज की निस्बत से कई विवादित बयान दिए. क्योके उसको अपने बलात्कार,
चोरी, वक्फ की ज़मीन हड़पने और कई आपराधिक मामलो में बीजेपी की सहानुभूति चाहिए थी. जी
हां आपने सही पहचाना लेखक का अगला पाखंडी है वासिम रिज़वी. इसके बढ़ बोल के ऊपर लेखक ने कुछ भी कटाक्ष नहीं
किया क्योके लेखक को खुदा के ऊपर पूरा भरोसा था के वो इन जैसे पाखण्डिओ को रूसवा करेगा
जिनका मकसद काफिरो से मिल के इस्लाम को इज़ा पहुंचना और मुस्लिम समाज की दिल आज़ारी करना
है.
इस पाखंडी वासिम रिज़वी को आज दो बड़े
झटके लगे और रूसवा होना पड़ा है पहला जो इसने मदरसों की निस्बत से फरेब फैलाया था के
वो सरकारी अनुदान पे चलते है और बच्चो में कट्टरपंथी सोच विकसित करते है और ऐसे मदरसों
के ऊपर सरकार को सख्त कार्यवाही करना चाहिए और उनका अनुदान बंद कर देना चाहिए.
फिर १६०० ईस्वी का मीर जाफर ने जिस
तरह असल देश भक्त सिराजुदौल्ला से गद्ददारी कर के बंगाल में ब्रिटिश सरकार से मिल के
ईस्ट इण्डिया कंपनी का साथ दिया. उसी तरह आज का मीर जाफर वासिम रिज़वी असली देश भक्त
मुस्लिम समाज के साथ गद्दारी कर के ब्रिटिशो के गुलाम और तलवे चाटने वाले गुलामो संघियो
से जा मिला. इस काली भेड़ आज के मीर जाफर की सरकार ने तो नहीं सूनी बल्कि खुद ही देवबंद
ने संज्ञान लिया और सरकारी भीक को लात मार दी.
आज बरोज़ १५ मार्च २०१८ को सहारंगपुर
में देवबंद की एक कार्यकारणी बैठक में कुछ ख़ास बातो पे संकल्प लिया गया उसमे से एक
है के सरकारी अनुदान को नकारना इस विषय पे दिखिए दारूल उलूम
देवबंद का सरकारी भीक से इंकार
दूसरी मात और रूसवाई इस वासिम रिज़वी
उर्फ़ मीर जाफर को उस वक्त हुई जब शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने विवादित स्थल अयोध्या को
लेकर गुरुवार को उच्चतम न्यायलय में हलफनामा दिया और एक बड़ी घोषणा की है। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने वसीम रिजवी के प्रस्ताव
को नामजूंर करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विवादित स्थल पर मस्जिद बनाने के प्रस्ताव
का समर्थन किया है। यह जानकारी
शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता यासूब अब्बास ने दी है। सुलतानुरूल मदारिस में हुई
बैठक में शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से इस फैसले को लिया गया है। शिया पर्सनल लॉ
बोर्ड के प्रवक्ता यासूब अब्बास ने कहा कि शिया बोर्ड मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ
है। शिया बोर्ड का कहना है कि अयोध्या में विवादित जगह पर मस्जिद ही बननी चाहिए।
संघियो और
हिन्दू स्टेट के आतंकी ये सोचते होंगे की शिया मुस्लिम समाज से अलग होते है तो वो हमारे
साथ आ जायेगे ये सोचना उनका बिलकुल गलत है शिया भी मुस्लिम होते है और एक अल्लाह को
मानने वाले नबी सल्लाहो अलहये वस्सलाम को नबी अखिरूज़ामा मानने वाले क़ुरआन की अज़मत समझने
वाले. फिर समूचा शिया मौलाना बिरादरी और किसी भी सेक्ट के मौलाना वसीम रिज़वी की इस्लाम
और मुसलमानो की निस्बत से ऊल जलूल बयानों से इत्तेफाक नहीं रखते थे. तो उसका रूसवा होना ते था. लेकिन ये पत्रकार सही
मौका और समय देख कर अपना लेख लिखने में मूड में था. और जैसे है उसको पता चला की एक
और पाखंडी बे आबरू हो गया उसने अपने मालिके हकीकी का शुक्रिया अदा किया.
रूसवाई की
अगली नशिस्त में संबित पात्रा होगा जो राम के नाम पे खूब पाखंड और फरेब फैला रहा है.
वो कहता है मुसलमानो की आस्था ट्रिपल तलाक़ पे टूटी तो वो कहते है हम सुप्रीम कोर्ट
का आदेश भी नहीं मानेगे और विवादित ज़मीन पे कहते है सुप्रीम कोर्ट आस्था पे फैसला
नहीं करेगा और हिन्दू मुस्लिम सभी को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानना पड़ेगा. उस पाखंडी
साबित को ये पत्रकार कहना चाहता है के ट्रिपल तलाक़ सिर्फ आस्था नहीं है बल्कि वो इस्लामिक
कानून है और उसको तब्दील कर के हिन्दू यकसां कानून नफीस करने की जो साजिश है इसलिए
हम सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी नहीं मानेगे किसी मुस्लिम राजनेता ने इसीलिए ऐसा बोला
होगा. लेकिन राम कोई कानून नहीं है और अगर
आस्था की इतनी ही भबूती लगा रखी है पत्रा ने तो फिर उस राम को बलात्कार के इलज़ाम में
काहे को जेल जाने दिया जो योगी और सीता के साथ हेलीकाप्टर से अयोध्या की ज़मीन पे उतरा
था. संबित को उसका भी बचाव करना चाहिए था की नहीं राम जी ने बलात्कार नहीं किया होगा
उनको तो उस बालिका में सीता मय्या नज़र आती होगी.
उनको छोड़ दीजिये, ये हिन्दू आस्था है के राम कभी भी बलात्कारी नहीं हो सकते.
साबित आस्था और कानून दो अलग अलग बाते है और ट्रिपल तलाक इस्लामिक कानून है जिसको तब्दील
कर के हिन्दू कानून नाफ़िज़ करने की साजिश है इसलिए उसका विरोध किया गया और विवादित ज़मीन
पे जो पाखंड फैला के मूर्ती रखी गई है उसको तुम आस्था की गन्दी गलीज़ ज़ेहनियत की चादर
ओड़ा रहे हो.
फिर पात्रा चेलेंज करता
है के विवादित जगह पे राम का मंदिर ही बनेगा दुनिया की कोई ताक़त रोक नहीं सकती तो उसका
जवाब उसको आने वाला वक़्त देगा.
See the English version of this article
Exposure
of hypocrites and fake people not stop yet.
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/03/16/exposure-of-hypocrites-and-fake-people-not-stop-yet/ …
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