Thursday, 29 March 2018

आतंकी के राम भक्त


राम के हथियार नवमी जुलूस के बाद पश्चिम बंगाल में फैली हिंसा और भड़के दंगो ने विकट रूप ले लिया है. सोमवार को राम आतंकिओ दूआरा रानीगंज में फैलाई हिंसा अब आसनसोल, बर्धमान समेत कई जगहों को अपनी चपेट में ले चुकी है और अभी भी हालात ठीक नहीं हैं. हालांकि, ममता गुरुवार को राज्य में लौट सकती हैं.

सोमवार को हुई हिंसा में आसनसोल दुर्गापुर रेंज के डी.सी.पि. और आई.पि.एस. अफसर अरिंदम दत्ता चौधुरी के ऊपर हिन्दुत्वादी राम भक्तो ने एक बम फेका जिसकी वजह से उनका पूरा हाथ ही हवा में उड़ गया. अब ये कैसे राम भक्त है जो अपनी ही हिन्दू पुलिस, हिन्दू आर्मी के ऊपर बम पिस्तौल, तलवार ए.के. ४७ से हमले करते है. ऐसा ही नज़ारा राम पाल की गिरफ्तारी के समय देखने को मिला था और ऐसा ही नज़ारा आसाराम फिर राम रहीम की गिरफ्तारी के समय देखने को मिला. यहां दो बाते निकल के आ रही है अगर ये असली रामभक्त है तो क्या राम के नाम में ही आतंक छुपा हुआ है क्या राम भक्त आतंकी प्रवर्ति के क्रूर होते है या फिर ये असली राम भक्त है ही नहीं ये तो राजनैतिक गुंडे है या फिर हिन्दू आतंकवादी जो इस तरह से दंगा फसाद कर के और राम के नाम पे हिन्दू सहानुभूति ले कर बीजेपी को फायदा पहुंचाने वाले लोगो में से है.

आसनसोल में 30 उपद्रवी गिरफ्तार किये जा चुके है इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है,  इसी बीच सियासत भी तेज हो गई है आसनसोल के पुलिस कमिश्नर के अनुसार, इंटरनेट सर्विस को अगले 48 घटों के लिए बंद कर दिया गया है. 
पत्रकार को १९९२ से ले कर २००२ फिर याद आ गया. जिन राम भक्तो को सफ़ेद पौश संसदीय जानवर राम भक्त कह कर उनका महिमा मंडन करते है असल में ये राम भक्त एक लौंडी, एक बोतल शराब और कुछ रुपयों के लिए अपना ज़मीर, आत्मा और देश की शांति अमन तक बेच देते है. २००२ में भी मोदी गुजरात में हर फ्रंट पे फेल हो रहा था फिर उसने अपने राजनैतिक फायदे के लिए साबरमती एक्सप्रेस में आग लगवाई और उसमे कुछ राम भक्त मारे गए असल में वो गुंडे जो नशेड़ी, चरसी, शराबी रंडी बाज़ थे और उनका काम है राम के नाम पे आतंक मचाना और बीजेपी को राजनैतिक फायदा पहुंचना था.

पश्चिम बंगाल का प्रकरण भी बीजेपी और संघी आतंकिओ दूआरा प्रायोजित पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है.  पिछले २५ सालो से पश्चिम बंगाल में दंगा फसाद होना बंद हो गया था फिर क्या वजह है २०१४ के बाद हर चुनाव के आते ही चाहे वो उप चुनाव हो, निकाय या फिर विधान सभा का चुनाव हो बंगाल में फसाद होना शुरू हो जाता है.  दूसरी बात उधर ममता दीदी ने तीसरा मोर्चा बनाने के लिए कवायत तेज़ की और इधर मोदी ने अपनी शैतानी शुरू की और दंगे भड़का के मोदी के खिलाफ तैयार हो रहे राजनैतिक माहौल को ठंडा करने की कोशिश की.


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Ram Devotees of Terrorist
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/03/29/ram

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