जयपुर, अजमेर,
लखनऊ, गुलबर्गा, बैंगलोर, हैदराबाद, भटकल, मालेगांव, औरंगाबाद, नागपुर, भिवंडी, मुम्ब्रा आखिरकार
'मुस्लिम महिला संरक्षण विधेयक' के खिलाफ विरोध बंबई तक पहुंच गया।
३१ मार्च
२०१८ के दिन आजाद मैदान, बॉम्बे में विरोध
प्रदर्शन का आयोजन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बैनर के तहत मुंबई की महिला
शाखा द्वारा किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में
कम से कम १.५ से २ लाख महिलाओं के विशाल जन
समूह ने विरोध में भाग लिया। यह एक काला शनिवार
की तरह प्रतीत हो रहा था जो पूरे वी.टी. स्टेशन से आजाद मैदान तक सड़क पर काले बुर्क़े
पहने महिलाओं की काली आंधी की तरह दिखाई दे रहा था। मुंबई पुलिस को भी यातायात को नियंत्रित
करने में अतिरिक्त प्रयास करना पड़ा क्योंकि महिलाओं की क्षमता बहुत अधिक थी। और महिलाओ
को सुचारू मार्ग देने के लिए पुलिस ने कुछ देर के लिए अवरोध लगा के यातायात को रोक
दिया।
रैली को मुंबई
शहर की प्रतिष्ठित मुस्लिम महिलाओ ने संबोधित किया जिनमे मुख्य हैं प्रोफेसर शबाना
खान, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय मुबाई, श्रीमती अर्शिया शकील जमात-ए-इस्लामी,
श्रीमती सुमैय्या सज्जाद नोमानी सदस्य ए.आई.एम.पी.एल.बी.,
सुश्री आइना रजा, अहले सुन्नत वल जमात, श्रीमती मुनव्वरा अलवारे एडवोकेट, प्रो. मोनिसा
बुशरा अबीदी सदस्य कार्यकारी समिति ए.आई.एम.पी.एल.बी, सुश्री फराह जाफरी शिया जमात।
डॉ असमा ज़ेहरा
ए.आई.एम.पी.एल.बी की महिला शाखा अध्यक्ष ने भी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मुस्लिम
महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) बिल, २०१७ कानूनी तौर पर दोषपूर्ण है, यह महिलाओं
को कानूनी और सामाजिक जटिलता में जोड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि बिल में पति को जेल
भेजने के ऊपर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है और किसी भी तरह महिलाओ की मदद नहीं है।
सभी २ लाख महिलाओं ने शरिया कानून की सुरक्षा के लिए चिलचिलाती, कड़क धुप में सरकार दूआरा प्रायोजित बिल के विरोध
में भाग लिया, लेकिन आम तौर पर हस्बे आदत लंगूर पत्रकारों को मोदी सरकार के खिलाफ मुस्लिम
महिलाओ का ये विशाल जन समूह हज़म नहीं हुआ,
और वो इस सशक्त महिला शक्ति को देख के खासे परेशान दिखे विशेष रूप से आजतक इंडिया टुडे
के रिपोर्टर को और उन्होंने भीड़ को गुमराह करना शुरू कर दिया ये कह कि सभी महिलाओ
ने अपने पुरुष सदस्यों के दबाव के कारण विरोध में भाग लिया हैं। यह कैसे संभव है कि
सभी २ लाख महिलाओं की भीड़ पर उनके पुरुष सदस्यों द्वारा दबाव डाला गया है और उन्होंने अपनी
मर्ज़ी से विरोध में भाग नहीं लिया है।
दूसरे, आजतक इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने प्रतिनिधि से अपमानित सवाल पूछा कि
कब तक आप इस गेम को सरकार के साथ खेलेंगे, आपको सफलता नहीं मिलेगी। रिपोर्टर के अनुसार
सभी २ लाख महिलाएं खेल खेल रही हैं या वे सरकार को ब्लैकमेलिंग कर रही हैं। ये लंगूर
का अर्थहिन् और भद्दा अवलोकन है। फिर किसलिए
मुस्लिम महिलाएं एक आतंकवादी, राजा, हिटलर, निर्लज्ज को ब्लैक मेल करेंगी जो दूसरों
को ब्लैकमेल करने के लिए प्रसिद्ध है।
English Version
Muslim
Women Power: Massive Rally
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/03/31/muslim-women-power-massive-rally/ …
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