मोदी जी के
नाम पत्रकार जुबेर का खुला खत
डिअर प्रधान
मंत्री मोदी जी,
पूर्वोत्तर
के तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीत
के जश्न के लिए और कार्यकर्ताओ को सम्भोदित करने के लिए पार्टी कार्यलय पहुंचे थे.
पीएम मोदी जैसे ही भाषण देने के लिए मंच पर आए और उन्होंने अपनी स्पीच शुरू ही किया
था के नजदीक मस्जिद से अज़ान की आवाज सुनाई दी. दिल्ली के नए पार्टी कार्यलय जो दीन
दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित है उसी के नज़दीक की मस्जिद से अज़ान की आवाज़ आ रही थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो मिनट रुके. अज़ान के पूरे समय तक वो शांत मंच पर खड़े रहे.
मोदी अज़ान
होने तक खामोश रहे और उन्होंने अज़ान पूरी होने के बाद अपना भाषण दोबारा शुरू किया. ये पहला मौका
नहीं है के जब श्रीमान मोदी ने अज़ान की अज़मत को पहचाना और समूची अज़ान के दौरान एक शब्द
भी नहीं बोला और खामोश मुद्रा में खड़े हो कर अज़ान ख़त्म होने का इंतज़ार करते रहे. इससे पहले मोदी ने राजस्थान और पश्चिम बंगाल में भी अपनी स्पीच को अज़ान के चलते
बीच में रोक दिया था. आज फिर दिल्ली के पार्टी दफ्तर में भी यही नजारा देखने को मिला.
हर इंसान से जान के या अनजाने में गुनाह हो जाते है यहाँ तक के कभी कभी इंसान शैतान के बहकावे में आके कुछ ऐसे गुनाह कर बैठता है जिसका कफ़्फ़ारा न मुमकिन है. लेकिन फिर भी इस्लाम की शिक्षा के अनुरूप और हदीस के कौल के हिसाब से अगर आपने सच्चे दिल से अपने मालिके हकीकी से रौ रौ के अपने गुनाहो की तौबा कर ली तो इंसान ऐसा पाक हो जाता है जैसा की वो अपनी माँ के पेट से अभी पैदा हुआ हो. फिर अगर उसके गुनाह समूचे समुन्द्र के झाग से भी ज़्यादा ही क्यों न हो. इस तौबा में ये ज़रूरी नहीं के वो दुनिया दिखावे के लिए भीड़ इखट्टा करे और सभी के सामने तौबा करे लेकिन दिल में उसके कालिख छुपी हुई हो तो ऐसी तोबा किसी काम की नहीं. लेकिन अगर सच्चे दिल से तौबा की और अकेले में अपने रब को याद कर के अपने गुनाहो पे पशेमान हो कर रोया तो वो अकेले में रोना समूची भीड़ को इकट्ठा कर के मांगी हुई तोबा से कई गुना अफ़ज़ल है.
हर इंसान से जान के या अनजाने में गुनाह हो जाते है यहाँ तक के कभी कभी इंसान शैतान के बहकावे में आके कुछ ऐसे गुनाह कर बैठता है जिसका कफ़्फ़ारा न मुमकिन है. लेकिन फिर भी इस्लाम की शिक्षा के अनुरूप और हदीस के कौल के हिसाब से अगर आपने सच्चे दिल से अपने मालिके हकीकी से रौ रौ के अपने गुनाहो की तौबा कर ली तो इंसान ऐसा पाक हो जाता है जैसा की वो अपनी माँ के पेट से अभी पैदा हुआ हो. फिर अगर उसके गुनाह समूचे समुन्द्र के झाग से भी ज़्यादा ही क्यों न हो. इस तौबा में ये ज़रूरी नहीं के वो दुनिया दिखावे के लिए भीड़ इखट्टा करे और सभी के सामने तौबा करे लेकिन दिल में उसके कालिख छुपी हुई हो तो ऐसी तोबा किसी काम की नहीं. लेकिन अगर सच्चे दिल से तौबा की और अकेले में अपने रब को याद कर के अपने गुनाहो पे पशेमान हो कर रोया तो वो अकेले में रोना समूची भीड़ को इकट्ठा कर के मांगी हुई तोबा से कई गुना अफ़ज़ल है.
ये पत्रकार
अपने रब से दुआ गौ है के अज़ान की अज़मत और इज़्ज़त की बिना पे अल्लाह आपको सच्चा रास्ता
दिखाए उन लोगो का रास्ता जिनके ऊपर उनके रब का करम हुआ और अँधेरे से रौशनी की जानिब
ले कर आये और ऐसे लोगो के रस्ते पे चलने से आपको मेहफ़ूज़ फरमाए जिन लोगो के ऊपर रब का
अज़ाब नाज़िल हुआ.
फिर अगर आप
हक़ और सच्चाई के रस्ते पे आ जाते है और एक रब की हम्दो सना करते है जिसका कोई अकार
नहीं और कोई सूरत नहीं और नबी अखिरूज़मा पे यकीन रखते है तो आपको जहन्नुम की आग से बचाने
के लिए आपके आमाल काफी है.
एक यहूदी
जो मुसलमानो के पवित्र महीने रमज़ान की अज़मत करता था और मुस्लिम मोहल्ले में उस महीने
खुले आम कुछ भी खाता पीता नहीं था तो उसकी इस अदा पे अल्लाह ने उसको ईमान की दौलत से
माला माल किया और नारे जहन्नुम से निजात दी.
तो आपने भी आज़ान की अज़मत और इज़्ज़त की है और ये पत्रकार यही दुआ करेगा जिस तरह
यहूदी को सिर्फ रमज़ान की अज़मत करने से जहन्नुम से निजात मिल गई आपको भी आज़ान की इज़्ज़त
करने से नारे जहन्नुम से निजात मिल जाए.
मोदी जी आप
जिस तरह से अज़ान की अज़मत को समझते है उसी तरह से इन्साफ की अज़मत को भी समझये और हर
इंसान के साथ इन्साफ कीजिये, अगर कोई गुनहगार है खूवाहा वो आपकी पार्टी का सबसे अहम्
ओहदेदार ही क्यों ना हो लेकिन अगर उसने कोई भी गुनाह किया है तो उसके साथ वही सुलूक
कीजिये जो एक गुनहगार के साथ होता है.
See the English version of this Newsfeed.
Modi
understood respect of Azan
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/03/04/modi-understood-respect-of-azan/ …
No comments:
Post a Comment