हिन्दू प्रख्यात हस्तीओ में
बहुविवाह करने की होड़ में एक नाम और जुड़ गया है मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री रामपाल
सिंह के पुत्र गिरजेश प्रताप सिंह का. ये बात शुक्रवार १६ मार्च २०१८ देर रात तब उजागर
हुई जब मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह की बहू ने कथित तौर पर खुदकुशी
कर ली थी। युवती के परिजनों का आरोप है कि मंत्री के बेटे गिरजेश प्रताप सिंह ने दूसरी
शादी कर ली थी इससे आहत होकर उसने खुदकुशी की है। उधर, पुलिस को मौके से एक सूइसाइड
नोट भी मिला है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मंत्री जी की बहू की उम्र भी कोई बोहोत ज़्यादा नहीं थी उसकी उम्र मात्र २८ वर्ष की थी। विपक्ष को बैठे बिठाये चुनाव में बीजेपी को घेरने का एक नुस्खा हाथ लग गया. बात मीडिया के गलयारो तक पहुंचे उससे पहले ही विपक्षी कांग्रेस ने मुद्दा लपक लिया और मांग डाली कि गिरजेश पर खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया जाए।
पाखण्डिओ और फ़रेबिओ के रूसवा
होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है और वो थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. इस्लामिक लॉ
के ट्रिपल तलाक़ के सिद्धांत को जिस तरह से संघियो ने पेश किया और बदनाम किया उससे वो
खुद ही रूसवा हुए जब पता चला की मुस्लिम समाज की महिलाओ में ट्रिपल तलाक़ का अनुपात
हिन्दू समाज के उस अनुपात के मुकाबले बे इन्तहा कम है जिसमे विवाह करने के बाद एक महिला
को जिंदगी के सफर में अकेला छोड़ दिया जाता है. अब ऐसी छोड़ी हुई महिला ना तो दूसरा विवाह
कर सकती है और ना ही अपने पति के साथ रह सकती है.
फिर इन्ही संघीयो चड्डी धारको
ने इस्लाम में बहुविवाह प्रथा को ज़ोर और शोर से बंद करने की वकालत करना शुरू की. अब
इस प्रथा पे भी ये संघी और वो लोग जो मुसलमानो के बहू विवाह को हाशिये पे लेते है रूसवा
होंगे. क्योके मुसलमानो से ज़्यादा हिन्दू समाज बहू विवाह करता है. एक तरफ घर वाली और
एक तरफ बहार वाली. अब ये बात अलग है के इस्लाम में बहू विवाह प्रथा जाइज़ तरीके से की
जाती है मतलब सभी पत्निओ को बीवी का वही अधिकार और हक़ मिलते हो जो पहली बीवी को मिले
होते है खूवाह पहली दूसरी बीवी जिन्दा हो तब भी दूसरी, तीसरी बीवी को भी वही हक़ है
जो पहली बीवी को है. और हिन्दू समाज में नाजाइज़ तरीके से बहू विवाह करते है.
लेकिन जो संघी और चड्डी धारक
इस्लाम के बहुविवाह पे ऊँगली उठाते है वो खुद ही हिन्दू समाज के दो या उससे ज़्यादा
पत्नी रखने के चलन को नकार नहीं सकते. बल्कि
हिन्दू प्रथा के तहत सिर्फ एक पत्नी को जाइज़ हक़ मिलता है दूसरी सभी ना जाइज़ कहलाती
है या हिन्दू प्रथा के तहत उनको पत्नी का हक़ है ही नहीं हां उनको रखेल के रूप कहा जा
सकता है.
यहां लेखक अगर सभी हिन्दू प्रख्यात
हस्तीओ के नाम लेना शुरू करेगा जिन्होंने बहुविवाह किया तो शायद उसके लेख में जगह कम
पड़ जायेगी. नारायण दत्त तिवारी से लेकर तो मुलायम सिंह यादव और हरयाणा के चंद्रमोहन
बिश्नोई तक फिर धर्मेंद्र से लेकर तो श्री देवी और बोनी कपूर दोनों ने ही बहुविवाह
किया था. लेखक के लेखन छेत्र में आने के बाद उसके सपर्क में अभी तक ना जाने कितने हिन्दू
सामाज से जुड़े हुए लोग आये जिन्होंने बहुविवाह किया था. किसी की पत्नी ने न्यायलय का
दरवाज़ा खटखटाया और कोई अपनी दो पत्निओ के साथ सुखी जीवन बीता रहा है. अगर बात और आगे निकली तो ये पत्रकार उन हिन्दू दम्पतिओं
के नाम तक दे सकता है जो बहू विवाह के बाद उसके संपर्क में आई. फिर इस्लाम और मुसलमानो को ही क्यों कटघरे में खड़ा
करने की कवायत होती है. उनके मज़हब में बहुविवाह कोई गुनाह नहीं है लेकिन हिन्दू मज़हब
में तो गुन्हा है फिर भी लोग कर रहे है. तो असली गुनहगार कौन है जिनको इजाज़त है वो
या जो चोरी छूपे गुनाह कर रहे है वो.
अब अगर मंत्री जी या उनका सुपुत्र उस युवती से विवाह की बात को नकारते भी है तो बलात्कार का केस बन सकता है. क्योके अगर शादी नहीं की तो बलात्कार हुआ. फिर इस तरह के प्रकरण सरकार और उसकी मंशा पे सवालिया निशान तो लगा ही देते है और मीडिया तो शिवराज से चुनावी सभाओ में पूछेगा क्या यही है आपकी बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ योजना. जिसपे आप अमल कर रहे है और एक २८ साला युवती को अपने परिवार को बचाने के लिए मौत जैसे आखिर विकल्प
का सहारा लेना पड़ता है.
बीजेपी शासित राज्यों में और २०१४ के बाद भारत में बड़े महिलाओ के खिलाफ अपराध
फिर शिवराज और समूची भाजपा भले ही महिला सशक्तिकरण की बात करती है लेकिन नेशनल क्राइम रिपोर्ट से कुछ और ही तथ्य निकल के सामने आते है. बीजेपी शासित राज्यों और भारत में २०१४ के बाद महिलाओ के प्रति आपराधिक मामलो में इज़ाफ़ा हुआ है. भले ही बलत्कारिओ के ऊपर मौत जैसे सख्त कानून की वकालत खुद शिवराज, उमा भारती, स्मुर्ती ईरानी, हरयाणा के मुख्य मंत्री कट्टर जैसे कद्दावर नेता कर चुके है, उन सभी के बयानों और थोथली बकवास पे ये पत्रकार पहले ही कटाक्ष कर चूका है. फिर क्या वजह है के महिलाओ के विरुद्ध अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे उसकी वजह सख्त कानून नहीं है बल्कि अगर वर्त्तमान कानून को ही निष्पक्ष तरीके से लागू किया जाए तो बलात्कार जैसे जघन्य अपराध रोके जा सकते है. लेकिन बीजेपी तो कानून का चयनात्मक इस्तेमाल करती है अपनों ने गुनाह किया तो वकालत छोड़ देने की और दूसरो ने किया तो मौत की सजा. अगर ऐसा नहीं है तो कश्मीर में एक मासूम ८ साल की बच्ची की सामूहिक अस्मतदरी की गई और उसका खून फिर क़ातिलों को बचाने के लिए खुद बीजेपी के मंत्री ने हिन्दू जनजागृति मंच के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा बंदी की और बलत्कारिओ, कातिलों को छोड़ने की वकालत की क्योके अपराधी हिन्दू है और जिस मासूम ८ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ वो मुस्लिम थी. तो महिलाओ के प्रति ये केसी सोच विकसित कर रहे है बीजेपी वाले. ये केसी बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ योजना है. क्या सिर्फ बहुसंख्यक समाज की ही बेटी को जीने का हक़ है और दुसरे समाज की बेटी को नहीं. क्या इज़्ज़त सिर्फ हिन्दू की बेटी की ही है और मुस्लिम, दलित क्रिस्टी की बेटी की इज़्ज़त नहीं है.
ये पत्रकार बीजपी के उस महामंत्री से जो बलात्कारीयो को छोड़ने की वकालत कर रहा है उस मासूम ८ साल की बच्ची की पीड़ा की व्याख्या करना चाहता है जो उसने सही होगी. में बीजेपी जो महिला सम्मान की बड़ी बड़ी बाते करती है उससे पूछना चाहता हूँ उस बच्ची के परिवार के मान सामान की तो धज्जिया उड़ गई होगी फिर उस परिवार के सम्मान की बात बीजेपी काहे को नहीं करती है.
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