Monday, 12 March 2018

महिला भक्ति और महिला सम्मान का एक और नमूना


८ मार्च २०१८ महिला दिवस के मौके पे हिन्दू स्टेट के उत्तर प्रदेश का लेफ्टनंट कमेंडेन्ट इन चीफ एक जन समूह को सम्भोदित करते हुए बड़ी बड़ी बाते करते हुए देखा गया. उसने कहा था के हम महिलाओ की पूजा करते है और जिस जगह महिला को पूजा जाता है उस जगह सुख समृद्धि और शांति रहती है तभी तो भारत विश्व के सुखी और सम्पन देशो की सूची में आता है.  चीफ के भाषण की धज्जिया उड़ाते हुए इस पत्रकार ने भारतीय महिलाओ पे हिन्दू आतंकवाद का असर लेख में समूची जानकारी चीफ को दी थी.  अब योगी महाराज के झूठे वक्तव और पाखंड का और ज़्यादा सूक्ष्म ऑपरेशन और योगी महाराज की महिला सम्मान का झूट सबके सामने आएगा. योगी की महिला भक्ति और महिला सम्मान का एक और नमूना.

मोदी और बीजेपी सरकार सिर्फ झूट और फरेब के ऊपर अपनी राजनीति करते है और हकीकत में उस बात से कोसो दूर रहते है जो उन्होंने चुनावी सभाओ में झूट फैलाया रहता है.  लोक सभा और उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले स्मृति ईरानी तथा समूची भगवा मण्डली का ये नारा खूब चला था "बोहोत हुआ नारी पे वार अबकी बार बलात्कारी सरकार"  फिर उत्तर प्रदेश देश का पहला स्टेट बना जहा महिलाओ पे होने वाले जुर्म सबसे ज़्यादा है.

अब हिन्दू स्टेट का दूसरा इलाका गुजरात जहा बेटियों का स्वागत कुछ खास खुले दिल से नहीं किया जा रहा है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे IV, २०१६ में यह तथ्य सामने आया है कि गुजरात की महिलाओं के अदंर बेटों को लेकर खास लगाव है। बाल लिंग अनुपात भी २००१ की तुलना में ६९ पॉइंट गिर गया है। ९२ फीसदी २ बेटों की माओं और ८८ फीसदी ऐसी माएं जिनके सिर्फ एक बेटा है और बच्चा नहीं चाहतीं। वहीं सिर्फ ५४ फीसदी महिलाएं ही ऐसी हैं जिनकी २ बेटिया हैं और बेटे की चाहत में तीसरा बच्चा पैदा नहीं करना चाहतीं।

कन्या भ्रूण हत्या  के लिहाज से भी गुजरात से आए आंकड़े निराशाजनक कह सकते हैं। सर्वे के अनुसार जन्म के समय बाल लिंग अनुपात में गिरावट देखने को मिली है। २००१ जनगणना के अनुसार १००० बालकों पर ८८६ बच्चियां थीं, लेकिन २०१६ में यह आंकड़ा घटकर ८४८ हो गया और २०१७ में यह सिर्फ ८४२ ही रह गया है।

अधिकारियों ने कहा के है कि सर्वे में यह बात साफ नजर आती है कि ४६ फीसदी महिलाएं सिर्फ बेटे की चाहत में तीसरा बच्चा भी पैदा करने के लिए भी राजी हैं। सर्वे में यह भी सामने आया कि १२ फीसदी औरतें और १५ फीसदी मर्द संतान के रूप में बेटी से ज्यादा बेटे की इच्छा रखते हैं। सिर्फ २ से ३ फीसदी लोग ही संतान के तौर पर बेटे से ज्यादा बेटी पसंद करते हैं।

अब बोलिये योगी जी क्या यही आपकी महिला भक्ति है और महिला सम्मान. शर्म आती है, नहीं शर्म नहीं आती ये आकड़े देख कर, पशेमानी हो रही यही अपनी वक्तव पे या अभी तक झूट के ऊपर ठाम हो. ये तो सिर्फ कन्या भूर्ण से जुड़े हुए है इसमें महिलाओ के ऊपर जुर्म वाले आकड़े तो अभी तक सामने आये ही नहीं है. वो तो और भयावह होंगे.

भगवा गमछाधारिओ की एक बोहोत ही गलत आदत है दूसरो को नीचे दिखाने के चक्कर में खुद ही इतने नीचे गिर जाते है के उनको वापिस से खड़े होने में कई पीडिया निकल जाती है.  जैसे के मोदी की उत्तर प्रदेश की चुनावी रैली में खाने की जगह से गंदगी निकालना. और कब्रस्तान-शमशान, दिवाली और ईद जैसे वक्तव दे कर समाज को दो भागो में बाटने की राजनीति.  मुझे तो शर्म आती है भगवाधारिओ पे जब उनका लीडर ही ऐसा है तो चमचे कैसे होंगे पार्टी वर्कर्स कैसे कैसे होंगे. इसीलिए इन जैसे गमछा धारिओ को नंगा करने हम लेखन के छेत्र में आये.



English version of this Article

Another example of women respect and its devotion.
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/03/12/ano

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