Wednesday, 28 March 2018

राम के नाम पे फिर बवाल

रामनवमी के अवसर पे हस्बे मामूल हिन्दू शरपसन्दों ने शोभायात्रा में इश्तेआल अंगेज़ी भरे नारे लगाए और जामा मस्जिद के बहार ज़ोरदार आवाज़ में डी.जे. बजाने की वजह से बिहार से पश्चिम बंगाल तक हिंसा की आग भड़क उठी है. पश्चिम बंगाल के रानीगंज इलाके में रामनवमी के जुलूस को लेकर दो समूहों के बीच संघर्ष हुआ. हिंसा के बाद भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. वहीं बिहार के समस्तीपुर में भी दो गुट भिड़े. इसी के चलते भारी तादाद में पुलिस बल की तैनाती की गई.

बता दें कि औरंगाबाद में भी रामनवमी की शोभायात्रा निकाले जाने के दौरान हिंसा हुई थी. अब हालात नियंत्रण में है लेकिन हालात की नजाकत को देखते हुए भारी पुलिस बल और तमाम आला अफसर अभी भी यहां डेरा डाले हुए हैं. 

कैसे भड़की हिंसा?

हिन्दू शरपसंद हाथो में लाठिया, तलवारे, त्रिशूल लेकर एक विशेष समुदाय के खिलाफ मार काट और खून का बदला खून मंदिर का बदला मस्जिद जैसे नारे लगा रहे थे. सोमवार दोपहर बिहार के औरंगाबाद शहर के जामा मस्जिद इलाके से रामनवमी का जुलूस निकल रहा था. जुलूस में शामिल लोग डीजे पर नाच रहे थे. हाथों में लाठी और डंडे लहरा रहे थे. फिर कथित तौर पर इस जुलूस पर पथराव हुआ और फिर हिंसा भड़क गई. तीन दर्जन से ज्यादा दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया. सड़क पर गाड़ियों को आग लगा दी गई. पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ गया. आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को काबू करने की कोशिश हुई.

एक्शन में पुलिस

हालात और बेकाबू होते उससे पहले ही नीतीश सरकार की पुलिस एक्शन में आ गई. बवालियों को काबू में लेने के लिए भारी संख्या में मौके पर जवानों को तैनात किया गया. अफसर बंद कमरों से निकल कर सड़क पर परेड करते देखे गए. इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई. इंटरनेट बंद कर दिया गया. सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाने लगे. दंगाईयों की पहचान की गई. पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की. अब हालात काबू में है.

बता दें कि शोभायात्रा के दौरान हिंसा की आग मुर्शिदाबाद और बर्द्धमान जिलों में भी भड़की. कई जगहों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया तो हिंदूवादी संगठनों ने भी पुलिस टीम पर हमला कर दिया. ऐसी ही एक झड़प के दौरान पुलिस टीम के ऊपर बम फेंका गया, जिसमें एक पुलिस अधिकारी के हाथों की उंगलियां उड़ गईं.

पत्रकार जुबेर का आकलन

अभी तो ये शुरूआत है आगे देखो होता है किया, ये आग जो राम के नाम पे लगाई गई है उसमे सिर्फ वही लोग मारे जायेगे और उन्हीके घर जलेंगे जो लोग राम के नाम पे पाखंड फैलाते है झूटी और थोथली राम की मोहब्बत का दम भरते है, लेकिन राम के सिद्धांतो से कोसो दूर है. जो सच्चे राम भक्त है वो सुरक्षित रहेंगे. जो लोग राम का मंदिर बनाने के लिए आमरण अनशन करने जैसी बात कर रहे है उनको भी एक सन्देश है राम का मंदिर बनवाने के लिए ना किसी ने रोका है और ना ही उसके लिए कोई समय की कैद है. लेकिन अगर किसी दुसरे की इबादत गाह को तोड़ के पाखड़ फैला के मस्जिद में मूर्ती रखोगे और कहोगे के अब ये ज़मीन हमारी है और अब यहाँ राम मंदिर बनना चाहिए तो सुबह क़यामत तक राम मंदिर उस जगह पे नहीं बनने वाला.  आपको अनशन करना है करिये आपको जान देना है दीजिये लेकिन इतना जान लीजिये जब १२०० सदी के फ़कीर ख्वाजा गरीब नवाज़ को उस समय का क्रूर हिन्दू आतंकवादी पृथ्वीराज चौहान नहीं हरा पाया जब की हिन्दू धर्म अपने ऊरूज पे था और हर तरफ कुफ्र फैला था तो आज के समय जब भारत में कम से कम २०% मुस्लिम है आज का राजा कैसे हरा सकता है.  

हिन्दू आतंकवादी पृथ्वीराज चौहान का हर हरबा गरीब नवाज़ के सामने फेल हो गया जादू, शैतानी अमल से ले कर तो इंसानी ताक़त तक फिर उसने गरीब नवाज़ को चुनौती दी के में एक राजपूत राजा हूँ में अपनी हार एक फ़कीर से हरगिज़ नहीं मानूंगा अगर मुझे कोई मैदाने जंग में हराये तो मेरी हार होगी. उस नामुराद आतंकवादी को अपनी शक्ति पे बोहोत ही अभिमान था. लेकिन वो ये भूल गया था के इंसानी शक्ति अल्लाह के सामने पस्त है और शैतानी शक्ति अल्लाह वालो (अल्लाह के वलिओ) के सामने  पस्त है.  फिर गरीब नवाज़ ने गैबी ताक़त सुल्तान मोहम्मद गौरी को अता की जो उस समय के हिन्दू आतंकवादी पृथ्वीराज से हर बार जंग में हारे थे और एक ही झटके में आतंकवादीओ की हार हुई और शांति, अमन की जीत. मंगलवार को जंग फतह हुई बुधवार से जुमे के आधे दिन तक एक मस्जिद की तामीर की गई जो आज भी अजमेर में मौजूद है और उसका नाम ढाई दिन का झोपड़ा है. फिर जीते हुए राजा ने उस मस्जिद में जुमे की नमाज़ अदा की और आगे के लिए कूच कर गए.

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