यह लेख इस्लामिक उपदेशक हाफिज सईद
साहब और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान के लोगों के समर्थन में समर्पित है।
आतंकवादी सरगना, प्रशासन, मीडिया के
लंगूरो की टौली और हिंदू स्टेट के लोग तब से बहुत घबराए हुए हैं जब से उन्हें पता चला
है की हाफिज साहब पाकिस्तान के प्रधान मंत्री
उम्मीदवार घोषित करने के लिए चुनाव लड़ेंगे। और ये खबर पब्लिक डॉमन में आई है. शायद उन्होंने राजनीति के लाल कालीन पे आगे बढ़ने का
आसान मार्ग इस पत्रकार की टिप्पड़ियों को देखने के बाद, चर्चाओं और शब्दों को सुनने के बाद ही लिया होगा और वह इस पत्रकार के
शब्दों का सम्मान कर रहे हैं।
२०११ के बाद से जब गुजरात के चोर को
भारत के प्रधान मंत्री बनने की खबर की सुगबुगाहट सुनाई दी तो सभी सार्वजनिक बहसों में
पहले बोहोत कम जनता आकर्षित होती थी जो धीरे धीरे प्रधान मंत्री के उम्मीदवार के रूप
बड़े जन समूह का उसको समर्थन हासिल हुआ। हालांकि इस पत्रकार ने अपनी समूची क्षमता के
साथ एक ऐसे व्यक्ति की उम्मीदवारी का विरोध किया जो आतंकवाद, मास हत्या, बलात्कार,
सांप्रदायिक हिंसा करने के लिए जनता का को भड़काने का ज़िम्मेदार है और जिसने मुख्यमंत्री
के रूप में अपने पद की गरिमा को धूमिल किया बावजूद इसके वो लोगों को लुभाने में कामयाब
हुआ।
पत्रकार के विरोध पर सभी अंधे भक्त,
आतंकवादी, सामूहिक हत्यारे, बलात्कारी, सांप्रदायिक, आपराधिक विषादपूर्ण, पक्षपाती
मानसिकता वाले लोग गुजरात के चोर का समर्थन करते थे। उनका कहना होता था कि उन्हें भारत
में किसी भी अदालत से दोषी नहीं ठहराया गया है इस हिसाब से वह साफ छवि वाला है। २००२
के दंगो के खून के धब्बो से उसके कपडे गंदे नहीं है, इसलिए वह भारत के प्रधान मंत्री
बनने के योग्य हैं।
हिन्दू स्टेट की जनता का गुजरात के
ठग के बचाव को हमेशा ही ये पत्रकार हाफिज साहेब को बहस में ला पराभूत और खामोश कर देता
था। हिन्दू स्टेट के सभी लोगों से एक ही प्रश्न पूछता था के उनके बारे में आप लोगो
का क्या कहना है, अगर वह पाक में प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किये जाते है
या राजनीति में शामिल किये जाते तो पाकिस्तान का अवाम भी वैसा ही कहेगा जैसा की आज
हिन्दू स्टेट की जनता कह रही है। उनके ऊपर एक भी दोष साबित नहीं हुआ और ना किसी भी
अदालत से सज़ा मिली है। बल्कि ये पत्रकार हाफिज साहब के बचाव में मजबूत पक्ष रखना चाहता
है। पत्रकार का अवलोकन है कि हिंदू स्टेट के आतंकवादी सरगना को क्लीन चिट प्रलोभन के
तहत और सांठ गाँठ कर के दी गई है। क्योंकि जांच के समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे
और उन्होंने पूछताछ से पहले मुख्यमंत्री पद का त्याग नहीं किया था। पैसे, राजनैतिक
और बाहुबल की शक्ति के आधार पर न्यायपालिका को प्रभावित कर के अपने पक्ष में फैसला
लेने की प्रबल सम्भावना है। लेकिन हाफिज सईद साहब के मामले में वह पाकिस्तान के सामान्य
नागरिक थे और उन्होंने न्यायपालिका को प्रभावित करने के लिए कोई राजनैतिक प्रभाव का
इस्तेमाल नहीं किया है, हाफिज सईद के मामले में अधिक पारदर्शिता है।
अब २०१७ में ये बात भी साबित हो गई
के गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधान मंत्री बनने के लिए असवैधानिक तरीके से
न्यायपालिका को प्रभावित किया था। क्यूके जब
आज का एक ठग, खुनी, मुजरिम, गुंडा, मावली, आतंकवादी, बलात्कारी अमित जो के किसी भी
प्रकार की सांविधानिक पद पे न होते हुए सिर्फ एक सोरबुद्दीन नकली मुठभेड़ के केस में
उच्चत्तम न्यायलय के जस्टिस लोया का सफाया कर सकता हे तो समूची इंसानियत का कातिल उस
वक्त का पद पे असिन मुख्य मंत्री काहे को नहीं कर सकता था।
जब मोदी भारत का प्रधान मंत्री बन
गया तो उसने तुरंत हाफिज साहब के राजनीतिक रास्ते को रोकने की कोशिश की और संयुक्त
राष्ट्र, अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उछल कूद मचाई, ताकि उन्हें आतंकवादी
और कथित बॉम्बे हमले का सूत्र धार घोषित कर दिया जाए। लेकिन यह पत्रकार तब से हाफिज
साहेब के पीछे था जब गुजरात का ठग भारत का प्रधान मंत्री बना उसके बाद भी पूरी सरकारी
यंत्रणा, अंतर्राष्ट्रीय फोरम, संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका सभी मिल के भी हाफिज साहब
का बाल बाक़ा तक नहीं कर सके।
हिन्दू स्टेट के पक्षपातपूर्ण, सांप्रदायिक,
आतंकवादी लोगों ने मोदी को भारत के प्रधान मंत्री के रूप में चुना, यह मानते हुए कि
वे सभी मुसलमानों को मिटा देंगे और गुजरात के प्रकरण की तरह हर एक दिन वही हादसे भारत
में दिखाई देंगे। लेकिन सर्वशक्तिमान कुछ अलग योजना बना रहा था, जो इन ठगों को समझ
नहीं आया। और जब सर्वशक्तिमान कोई योजना बनाता है तो कोई भी शक्ति उसकी योजना को नष्ट
नहीं कर सकती। यहां तक कि उसने इस्लाम और मुसलमानों पर हमले के समय गौरैयों की मदद
से इस्लाम और मुसलमानो को बचाया। वह कुछ भी कर सकता है जहां सांसारिक शक्ति निष्क्रिय
और असहाय दिखती है वहां उसकी शक्ति चालू होती है।
हिन्दू स्टेट का लंगूर मीडिया और प्रशासन नज़दीकी नज़रे रखे हुए है और पाक के प्रधानमंत्री
उम्मीदवार हाफिज सईद के पर पूरे प्रकरण को कवर किया है, लेकिन क्या मोदी के मामले में
भी उन्होंने ऐसा किया था जब उसको भारत के प्रधान मंत्री का उम्मीदवार घोषित किए था।
हाफिज सईद के राजनीति में शामिल होने से पहले लंगूर हर समय उनके लिए व्यंग्यात्मक शीर्षकों
और अपमानित भाषा के साथ उछल कूद करते थे, लेकिन क्या उनके लिए लंगूर वही भाषा
का उपयोग करना जारी रखेंगे अगर वो प्रभुत्व-सम्पन्न देश के शीर्ष पद पे आसीन हो जाते
है। इस पत्रकार के हिन्दू स्टेट के सभी लंगूरो से कुछ
सीधे बहुत सरल सवाल हैं: -
1. यदि वास्तविक आतंकवादी, सामूहिक हत्यारा, सांप्रदायिक,
आपराधिक भारत के सबसे शीर्ष पद धारण कर सकता है तो फिर इस्लामिक प्रचारक क्यों नहीं।
2. हिंदू स्टेट के मीडिया,
प्रशासन और लोगों को क्यों बहुत दर्द हो रहा है यदि हफीज साहब ने पाक के प्रधानमंत्री
पद के उम्मीदवार घोषित जाते हैं।
3.
यदि भारत का अति वांछित
आतंकवादी यूएन के सम्मेलन को संबोधित कर सकता है और पूरे विश्व में अति सुरखा घेरे
में घूम फिर सकता है तो हाफिज मुस्लिम प्रचारक क्यों नहीं?
4.
यदि हिन्दू स्टेट की जनता और लंगूर नरेंद्र मोदी का
बचाव ये कह के करते है के उसे किसी भी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है तो हांफिज साहब
के लिए हिंदू स्टेट के लंगूरो और जनता यही अवलोकन और बचाव क्यों नहीं है।
एक बार फिर से जिस मार्ग को भारत के
लोगों ने अपने अच्छे स्वर्ग के लिए बनाया है, लेकिन उसी ने उन्हें परेशान करना शुरू
कर दिया। सबसे पहले यह अजमल कसाब की हत्या
के संबंध में था, जिन्होंने जेल में जामे शहादत पिया जिसका भुगतान सरबजीत
सिंह द्वारा किया जिसकी उसी फैशन और शैली में हत्या कर दी थी। फिर भारत में बार काउंसिल
के आदेश
एडवोकेट्स
उन निर्दोष मुस्लिमों का बचाव नहीं करेंगे या पक्ष नहीं रखेंगे जिन्हे आतंकवाद के गलत
आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। फिर वैसा ही आदेश पाकिस्तान में लाहौर बार एसोसिएशन
वकीलों के लिए पास किया कोई भी वकील भारत का आतंकी कुलभूषण के पक्ष में नहीं लड़ेगा
और उसका बचाव नहीं करेंगे।
See the English version of this Article.
Sir
of Allaha Hafiz on mission
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/03/11/sir-of-allaha-hafiz-on-mission/ …
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