Friday, 30 March 2018

आतंकी आक़ा के आतंकी भक्त


हिन्दू आतंकी हमेशा की तरह अपने आतंकी आक़ा के नाम पे दंगा फसाद, मार काट, आगजानि और आतंकवादी हमले करने में कामयाब रहे. बिहार की आग अब आगे की तरफ नावदा हिन्दू आतंकी लेफ्टनेंट कमेंडेन्ट गिरिराज के लुटे हुए इलाके तक पहुंच गयी है.  जिस प्रकार से इस पत्रकार ने हर उस प्रकरण की सबसे पहली अपनी रिपोर्ट दी है जो बाद में सही साबित हुई. चाहे वो ३९ भारतीओ के मसूल में मारे जाने की रिपोर्ट हो या हिन्दू आतंकिओ की एजेंट जो सुषमा सुवराज के कहने पे पाकिस्तान गई और उसको बदनाम करने के लिए झूठा इलज़ाम लगाया फिर इस पत्रकार ने उसको बे नक़ाब किया के वो तो विदेश मंत्रालय की पपेट है. चाहे वो तूसी जैसे पाखण्डिओ को या लंगूर पत्रकारों बे नक़ाब करने की रिपोर्ट हो या फिर वो नजीब के गायब होने के बाद हत्या की रिपोर्ट हो और उसके पीछे हिन्दू विद्यार्थी ऐ.बी.वि.पि. का हाथ हो.   सबसे पहले इस पत्रकार ने पहली रिपोर्ट जमा की फिर बाद में मीडिया में ये बात सिद्ध हुई. या कासगंज हिंसा की पहली रिपोर्ट हो


बिहार में भी रामनवमी के रोज़ जो दंगा हुआ उसमे भी समूची जानकारी ये पत्रकार उसकी २८ मार्च २०१८ को 'राम के नाम पे फिर बवाल' नामक खबर के शीर्षक के साथ पहले ही दे चूका है.  रामनवमी के जुलूस में आतंकवादी तलवारो, लाठीओ, त्रिशूलों से लेस डीजे पे इश्तेआल अंगेज़ी भरे गाने चला रहे थे. ये खबर आज ३० मार्च २०१८ को मीडिया के गलियारों तक पहुंची है के इनसब के पीछे शोभायात्राओं में शामिल किए गए डीजे और उसमें बजाए जा रहे कुछ गानों को कारण बताया जा रहा है.  इस मौके पर बिहार के भागलपुर, औरंगाबाद, समस्तीपुर और मुंगेर में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प, आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं.


अगर आपको हमारी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है तो इन गानों पर एक नजर डाल लीजिए.-
'पाकिस्तान में भेजो या कत्लेआम कर डालो, आस्तिन के सांपों को न दुग्ध पिलाकर पालो

 
  

'...टोपी वाला भी सर झुकाकर जय श्री राम बोलेगा...’


'रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे.
दूर हटो, अल्लाह वालों क्यों जन्मभूमि को घेरा है
मस्जिद कहीं और बनाओ तुम, ये रामलला का डेरा है...’
 


 
'सुन लो मुल्ले पाकिस्तानी, गुस्से में हैं बाबा बर्फानी...'


'जय श्री राम...जय श्री राम
जलते हुए दिए को परवाने क्या बुझाएंगे
जो मुर्दों को नहीं जला पाते वो जिंदों को क्या जलाएंगे’




'जो छुएगा हिंदुओं की हस्ती को, मिटा डालेंगे उसकी हरेक बस्ती को
रहना है तो वहीं मुर्दास्तान बनकर रहो, औरंगजेब, बाबर बने तो खाक में मिला देंगे तुम्हारी हर बस्ती को’





वैसे तो बिहार में रामनवमी के मौके पर शोभायात्रा निकालने का चलन बहुत पुराना नहीं है. पिछले चार-पांच साल से ऐसी शोभा यात्राएं निकाली जाने लगी हैं. वहीं पिछले दो-एक साल से इन शोभा यात्राओं में डीजे को प्रमुखता से शामिल करने और इनके माध्यम से ऐसे गाने बजाने या नारे लगाने का चलन बढ़ा है जिसमें एक समुदाय विशेष को टारगेट किया जाता है.

दंगो का मुख्य कारण हिन्दू आतंकिओ का हमला था ये बात एक दम निराधार, झूटी और बे बुनियाद है के किसी ने मस्जिद से पत्थर फेंके उसके ऊपर दंगा हुआ. अब जिनको आतंक मचाना है तो मस्जिद किया और मंदिर किया फिर इश्तेआल अंगेज़ी भरे गाने काहे को बजाना चाहिए और जुलूस हथियारों के साथ निकालने की क्या ज़रुरत थी.  मस्जिद से पत्थर फेकने के बाद दंगे हुए ये बात भी उतनी ही झूटी है जितनी के नवदा में एक लंगूर की मूर्ती तोड़ने की खबर पे दंगा भड़कने की बात. असल में ये आतंकवादी न मस्जिद देखते है और न मंदिर. पहले मस्जिद को गन्दा किया फिर खुद ही अपने राम के भक्त लंगूर को बदनाम किया. लेकिन ये नामुराद पूरी तरह से भूल गए के उनको जल्द ही रूसवा होना पड़ेगा और बदनामी का जाम पीना पड़ेगा.


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