Monday, 1 May 2023

गज़वा ऐ हिन्द में हदीस का एक हिस्सा ज़ाहिर हुआ।

अज़ीज़ नाज़रीन,

गज़वा ऐ हिन्द का आगाज़ होने से क़ब्ल जो तरक़्क़ी होने वाली थी उसकी पेशनगोई १४०० साल क़ब्ल नबी ऐ मुकर्रम ने उसकी आगाही दे दी थी।   हर मोमीन यहाँ तक की यहूद और नसारा भी इस बात से इंकार नहीं करते थे और जदीद दौर में इंकार नहीं कर सकते की नबी की पेशनगोई गलत होती है।  हर पेशनगोई नबी सल्लम की दुरुस्त होती है कियोंके उनको यह इल्म ग़ैब अल्लाह की जानिब से हज़रते जिब्राईल आ कर बता देते थे।  फिर जिस बात को अल्लाह पहले ही ते कर चूका है उसको कोई क़ाफ़िर कोई मलऊन कोई यहूदी कोई भी ज़ालिम तरीन बादशाह बदल नहीं सकता।  हज़रते इमाम हुसैन की शहादत के बारे में जिब्राइल अमीन पहले ही आप नबी सल्लम को बता चुके थे।  अगर बात को तफ्सील से बयान किया तो मज़मून बोहोत लंबा होगा।  फिलहाल गज़वा ऐ हिन्द और उसके आग़ाज़ से क़ब्ल होने वाली पेशनगोई के बारे में बात करते हैं।  

नाज़रीन जैसी पेशनगोई है की मंगोल फौजें इस्लाम और मुस्लिम मुमालिकों की मदद करेंगी।  वोह पेशनगोई हाल ही में चीन की सऊदी और ईरान से दुश्मनी ख़तम करने में एहम किरदार अदा करने से मुकम्मल हो गई।  फिर सऊदी और यमन की जंग ख़तम हुई। 

अब इंतज़ार है उसी हदीस के दुसरे हिस्से का जिसमे कहा गया है खुरासान मौजूदा अफ़ग़ानिस्तान से काले अलम ले कर फौजे चलेगी और हिन्द पर हमलावर होंगी।  पूरा ख़ित्ता इस्लामिक हो जाएगा फिर वोह फौजे जेरुसलम पर पहुंचेगी और वोह अलम बे तूल मुक़द्दस पर नस्ब कर देंगीं।  बैतूल मुक्क़द्दस फतह होगा और इस्लामिक रियासत क़ायम होगी। 

नाज़रीन आज कल जो हालात दहशतगर्द इस्राएल और भारत के हो रहें हैं उससे जल्द ही यहूद और क़ाफ़िर दहशतगर्दों का क़त्ले आम देख रहा हूँ।  कियोंके ७० साल से ज़ाइद फलस्तीन के मुस्लिम अवाम ने यहूद दहशत बर्बरियत ज़ुल्म शिद्दत को भोगा है और ७० साल से ज़ाइद मुस्लिम अवाम ने भारत की क़ाफ़िर दहशत नाइंसाफी ज़ुल्म बर्बरियत दहशत को भोगा है। 

नाज़रीन इस बात को ख़ूब समझ लें की जिस तरह से लीबिया, मिस्र, यमन, इराक, अफगानिस्तान और सूडान से काफ़िरों को हकालने के बाद बचे कूचों को मौत दे दी गई थी उसी तर्ज़ पर अब अगला हदफ़ सऊदी, दुबाई, बहरैन, ओमान कुवैत है।  वैसे भी दिफ़ाई सरबराह बोल चुके हैं की उनके फौजी दुबाई पहुंच चुके हैं।  एक सदी से काफ़िर दुबाई में जमे हुए हैं।  उनके घरों को दुकानों और रोज़गार को ऐसे ही तबाह करेगें जैसा भारत में मुस्लिम अवाम के यह काफ़िर करतें हैं।

अगर ऐसा हुआ तो बोहोत ही अच्छा होगा।  वैसे भी नबी सल्लम की गज़वा ऐ हिन्द से क़ब्ल होने वाली तरक़्क़ी में हदीस है जो आज की नहीं बल्कि १४०० सो साल पुरानी है लेकिन सच्ची आज साबित हो रही है। मंगोल से फौजें उठेगी इस्लाम और मुसलमानों की मदद करेगी।  हाल ही में चीन ने सऊदी और ईरान की दुश्मनी ख़तम करने में नुमाया किरदार अदा किया है।  वहीँ सऊदी यमन जंग ख़तम हो गई।  अब बस वोह हदीस पूरी होना बाक़ी है खुरासान आज का अफ़ग़ानिस्तान से फौजी आयेगें काले अलम ले कर जो हिन्द पर हमलावर होंगे।  और गज़वा ऐ हिन्द का आगाज़ करेगें।  पूरा खित्ता इस्लामिक होगा फिर वोह फौजी इजराइल की जानिब बढ़ेंगे और मस्जिद ऐ अक़सा फतह होगी।

नाज़रीन २०२२ में ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर की एक लँगूरनी से गुफ्तगू करते हुए क़ातिल, दरिंदा, जल्लाद, शैतान योगी बोलता है जो लोग गज़वा ऐ हिन्द का ख़्वाब देख रहे हैं वोह सुबह क़यामत तक पूरा नहीं होगा।  ऐसे लोगों को हम ज़मीन में दफ़न कर देंगें।  तो योगी जैसे बढ़ बोल साधू से कहना चाहता हूँ यह ख़्वाब मुस्लिम नहीं देख रहें हैं बल्कि नबी सल्लम की पेशनगोई है। और उनको जिब्राइल अमीन आसमान से अल्लाह का पैगाम ले कर आते थे और बोलते थे कह दीजिये आप उम्मत से।  फिर आप बयान करते थे।  उस वक़्त आपने गज़वा ऐ हिन्द और जेरुसलम फतह होगा मस्जिद अक़्सा मुसलमानों की होगी बात कही तब तो फलस्तीन पर इस्लामिक ममलेकत ही थी।  तो वोह पेशनगोई दौर ऐ हाजरा के लिए थी।  

नाज़रीन जब बारी तआला ने आदम अलैहे सलाम की तख़लीक़ की तो शैतान मलऊन ने ख़ूब कोशिश की के उनके मुजस्समे को ज़लील कर दिया जाए तो मेरी अज़मत कम ना होगी और जब में आदम को ज़लील कर दूंगा तो अल्लाह मेरी जो अज़मत है उसको बरक़र रखेगा।  लेकिन अल्लाह ने पहले ही ते कर लिया था की शैतान ज़लील होगा और ईमान वाले आदम सूर ख़ुरू होंगे।  

वैसे ही अगर अल्लाह ने ते कर लिया है गज़वा ऐ हिन्द होगा तो दुनियां की कोई ताक़त उसको रोक नहीं सकती और काफ़िरों का ख़ून दरिया ऐ अटक में बहेगा।  ज़रूर बहेगा।  

 

सहाफ़ी ज़ुबेर की पेशकश

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...