“ गर यह तेरी आज़माइश है तो इसमें हमें अबूर कर दे
अगर यह साजिश है तो दुश्मन को नेस्त नाबूद कर दे
सारे आलम में अबीर हक़ फैला दे
सारे आलम को नस्ल आयेशा से भर दे”।
सहाफ़ी ज़ुबेर
अज़ीज़ नाज़रीन,
माह फ़रवरी २०२३ तारीख १० को एक नज़म अबीर हक़ नस्ल आयेशा उन्वान के साथ लिखी थी। अब उसके नतीजे मिलना शुरू हो गए हैं। UPSC रिजल्ट
में एक नहीं बल्कि २ आयशा को १८४वीं रैंक, मिली हैं दोनों का सिलेक्शन पर दावा। मामला सूबे दरमियान (मध्य प्रदेश) से जुड़ा हुआ
है। जहाँ बरोज़ मंगल UPSC सिविल सर्विस २०२२
इम्तेहान का नतीजा जारी कर दिया है. सूबे दरमियान (मध्यप्रदेश) में UPSC नतीजे को लेकर
एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिसमे
दो दुख्तराने मिल्लत ने इम्तेहान इंटरव्यू दिया और अब दोनों को तक़रीबन वहीँ नम्बर मिले
हैं जो एक दुसरे को कॉम्पिटे कर रहें हैं।
दोनों बच्चियों को १८४वीं रैंक मिली है।
दोनों ही अपने अपने दावे कर रहीं हैं, की उसने ज़्यादा सही जवाब दिए थे।
अब देखना यह दिलचस्प होगा की किसका दावा कितना ज़्यादा मज़बूत है और कौन
UPSC के लिए मुनतख़ब होगी।
दरअसल देवास की आयशा फातिमा और अलीराजपुर की आयशा मकरानी दोनों ही
UPSC के इम्तेहान के लिए तैयारी कर रहीं थी।
दोनों ने इम्तेहान के लिए खूब तैयारी की थी और माइनॉरिटी इंस्टिट्यूट से मिलने
वाली कोचिंग से पूरा फायदा उठाया था। दोनों
को एक ही मार्क एक ही रेंक मिलने से जहाँ एक जानिब एहले ख़ाना में जश्न है वहीँ अलीराजपुर
की आयशा मकरानी ने उनके साथ फ्रॉड होने की बात भी कह रहीं हैं। जबकि देवास की आयशा इसे अपनी कामयाबी बताते
हुए क़ौम और मिल्लत की बच्चियों को मज़ीद आगे आना चाहिए बोल रहीं हैं। और वोह
पुर एतमात हैं की उनका ही UPSC में इन्तेख़ाब
होगा।
नाज़रीन
यह ज़ाफ़रानी हुकूमत की साजिश है की मुस्लिम नुमाइंदगी हूकूमती इदारों में ना पहुंच पाएं
और आम तोर पर ज़ाफ़रानी दहशतगर्द और बीजेपी ऐसी टेक्निकल गलफ़त और गलतियां कर देतें हैं
जिसका ख़मयाज़ा मुस्लिम तालिबे इल्मों को भोगना पड़ता है। वैसे भी सूबे दरमियान में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो
हूकूमती नुमाइंदों में शिद्दत और दहशत का ज़हर भरा है वोह किसी से पोशीदा नहीं है। ख़ास इंदौर, देवास, शाजापुर, रतलाम अल गरज़ मालवा
और मेवाड़ का तमाम हल्क़ा ज़ाफ़रानी ज़हर की खेती से साराबोर है।
उसके
ऊपर अगर सूबे दरमियान की वज़ारत दाखला नाथूराम की नाजाइज़ नस्ल नरोत्तम मिश्रा जैसे एक
ऐसे दरिंदा सिफ़त शैतान की सरपरस्ती में है जो हर मसले पर मुस्लिम अवाम को दुसरे और
तीसरे दर्जे पर रखने की वकालत करता है तो हूकूमती और इन्तेज़ामियाँ से मुस्लिम तालिबे
इल्मों के साथ किसी भी हद तक नाइंसाफी हो सकती है।
यह
नाथूराम की नाजाइज़ नस्ल नरोत्तम मिश्रा वही है जिसके ज़हन में उस हद तक ज़हर भरा है जब
खरगोन में ग़रीब मुस्लिम और बेवाओं के घरों को बिलडोज़र ने मिस्मार किया था तो इस मनहूस
ने जश्न बनाया था। बोला था ओवेसी यह जान लें
की जहाँ से पत्थर आयेगें उस घर को मट्टी के ढेर में तब्दील कर दिया जाएगा। फिर उस मनहूस के मासूम ग़रीब दबे कुचले मुस्लिम अवाम
से बदले की आग उस हद तक उसके दिलों दिमाग पर चढ़ गई के उसने दोनों हाथों से मफ़लूज उस मुसलमान की दूकान
और मकान तोड़ दिए जो प्रधान मंत्री आवास के तहत उसको मिले थे।
देवास
की आयशा फातिमा UPSC में अपने मुन्तख़िब होने पर पुर एतेमाद हैं। लेकिन अलीराजपुर की आयशा मकरानी का कहना है अगर
उनके मुस्तक़बिल के साथ हुकूमत की साजिश हुई और किसी भी तरह की हूकूमती ग़फ़लत सामने आई
तो वोह अदालत का दरवाज़ा खटखटायेगीं। वोह मिल्लत
के साथ होने वाली इस तरह हर नाइंसाफी पर ख़ामोश नहीं बैठेगीं। उनका कहना है मुस्लिम तालिबे इल्म इम्तेहान में
पढ़ाई कर के मेहनत कर के अच्छे नंबर लातें हैं लेकिन हुकूमत उनके साथ यहाँ पर भी ऐसी कारगरदेगी
कर रही है की मुस्लिम नुमाइंदगी हूकूमती इदारों में ना पहुंच पाए।
सहाफ़ी
ज़ुबेर
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