अज़ीज़ नाज़रीन,
इराक के शहर बग़दाद में एक नाई और एक मुफ्ती साहब और हाकिम ऐ वक़्त तीनों गुरूर और तककब्बुर से भरी बड़ी बड़ी बातें करतें थे। तीनों को अपने अपने फन पर बोहोत ही ग़ुरूर था। मुफ्ती साहब को इस बात का ग़ुरूर था की उन्होंने कभी कोई ग़ैर शराई फतवा नहीं दिया नाई को इस बात का ग़ुरूर था की उसने कभी भी ग़ैर शरई हजामत नहीं की और हाकिम को इस बात का गुरूर था की उसने अपनी रियासत में कभी भी कोई ग़ैर शराई हुकुम नाफ़िज़ नहीं होने दिया।
रात को हाकिमे वक़्त ने नबी सल्लम का दीदार किया आप सल्लम ने हाकिमे वक़्त को बोला की ऐसा हुकुम नाफ़िज़ करो की फलां क़ाज़ी ऐसा फतवा दे की उसकी दाढ़ी फलां नाई मूंड दें।
हाकिम ने हुकुम जारी किया क़ाज़ी ने अपनी ही दाढ़ी मुंडवाने का फतवा दिया और नाई ने दाड़ी मूंडी।
आज भारत का भी वही हाल है हाकिम ऐ वक़्त ज़ालिम तरीन बादशाह भी गुरूर में डूबा हुआ है। पाकिस्तान से कोई बात चीत नहीं होगी। हम एक ताक़तवर मुल्क हैं पाकिस्तान हमसे अदना है। लंगूर लँगूरनियाँ, शिद्दत पसंद क़ाफ़िर, संघी दहशतगर्द और बीजेपी वाले सदा पाकिस्तान के ऊपर इल्म फ़लसफ़े और माशी हालात पर मखौल उड़ाना अपने वतन भारत पर ग़ुरूर करना बड़ी बड़ी बातें करना।
और पस यह जान लो की घमंडियों मग़रूर हाकिम हो रियाया हो या लंगूर-लँगूरनियाँ उनका घमंड तो ऐसे टूटता है जैसे ताश के पत्तों से बना महल। पाश पाश हो जाता है। कियोंके हाकिमों के हाकिम मालिकों के मालिक क़ायनात को चलाने वाले अल्लाह को घमंड हरगिज़ हरगिज़ पसंद नहीं है। जो हाल रावण, मेघनाथ, कुम्भकर्ण और रावण सेना का हुआ वही मोदी और भक्तों का होगा।
अमन की जुस्तजू लिए अपने कुनबे से दूर हो गया ज़ालिम
ख़ूंरेज़ी, आदमख़ोरी की बातें छोड़
मज़हब ऐ अमन की बातें करने लगा ज़ालिम
तेरा ठिकाना तलाश लेंगें अमन के फ़ौजी
तू लाख रहे फ़रार बेरुन मुल्क
तुझको तलाश लेंगें फ़ौजी ताहम
सहाफ़ी ज़ुबेर
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