अज़ीज़ नाज़रीन
गुजिश्ता मज़मून या मुर्शिद अल-मदद में पीरो तरीक़त जलाल उद्दीन अब्दुल मतीन रेहमतुल्लाह अलैहे के कश्फ़ और करामात का कुछ हिस्सा बयान किया था। इस हिस्से में गुफ्तगू को मज़ीद आगे बढ़ाते हुए बताना चाहूंगा की यह सब मामला कब से शुरू हुआ था। नाज़रीन जैसा की आपको इल्म होगा की ख़ाकसार शरद पवार की तंज़ीम एन.सी.पी. के सियासतदां डॉ पदमसिंह पाटिल, उसकी लुगाई डॉ चन्द्रकला पाटिल, उसका फ़रज़न्द राणा पाटिल उसकी लुगाई अर्चाना पाटिल के ज़ेहनों में भरे आलूद ज़हर की वजह से होने वाली अज़ीयत और दहशत के शिकार से बोहोत ही परेशान था। ख़ाकसार ने उन दहशतगर्दों के किसी भी ऐसे काम को करने से मना करना शुरू कर दिया था जो ख़ाकसार की इज़्ज़त ऐ नफ़्स की खिलाफवर्जी करते थे। राणा, पदमसिंह पाटिल मौजूदा दौर में ज़ाफ़रानी बीजेपी के साथ हैं।
२००५-०६ में डॉ पाटिल और उसकी लुगाई चन्द्रकला पाटिल ने
कनॉट मेंशन पहला मंजाला कोलाबा पोस्ट ऑफिस के सामने कोलाबा बम्बई एक भटजी जादूगर काला जादू टोना टोटका करने वाला तांत्रिक को पूजा करने के लिए बुलवाया था। वोह जादूगर शैतानी अमलियात का माहिर था और मुस्तक़बिल
बता देता था। तब डॉ पाटिल ने उस जादूगर से
ख़ाकसार को देखने के लिए बोला। उसने मेरी पेशानी
को थोड़ा सा सिकुड़ कर देखा और बोला यह शख्स तुम्हारी बर्बादी की वजह बनेगा। फिर उसने मेरे सामने ही बोला मतीन इसको बचा लेगा। डॉ पाटिल बोला मतीन कौन तो उसने कहा इसका कुल गुरू
है वोह बोहोत ही ताक़तवर और क़ुव्वत वाला है। मोईन उद्दीन और मतीन इसको बचा लेंगे। मोईनुद्दीन से मुराद शायद ख़्वाजा गरीब नवाज़ से होगी
वल्लाहो आलम। इस दौरान अल्लामा इक़बाल का भी
ज़िक्र निकला डॉ पाटिल ने सवाल किया यह इक़बाल कौन है और तुम कैसे जानते हो। मेने जवाब दिया बोहोत बड़े शायर थे आज़ादी के पहले
और कौन है जो उनको नहीं जानता।
नाज़रीन हक़ीक़त ऐसी ही हुई २००७ में डॉ पाटिल की अज़ीयत और
ज़लालत भरी नौकरी से इस्तीफा दे दिया फिर आग़ाज़ हुआ ख़ाकसार के लिए मज़ीद अज़ीयत भरे दिन। कई बार ज़िन्दगी की जंग में पूरी पूरी फॅमिली ख़लास
हो जाती ऐसे हालात हुए लेकिन किसी ग़ैबी ताक़त ने मदद की और हालात साज़गार हुए।
२००९ में हज़रत आये हुए थे उनको मिल कर मोटर साइकिल से
३ साल और १० साल के मेरे दोनों बेटे अहलिया के साथ कलम्बोली से खारघर आ रहा था। एक
महाराष्ट्र स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस तेज़ी से कलम्बोली क्रीक पर आई और मेरे को कुचल
ही देती की ऐसा महसूस हुआ की किसी ग़ैबी ताक़त या फरिश्तों ने दूसरी जानिब खींच लिया
होगा।
बस इतनी तेज़ी से पार हो गई अगर एक्सीडेंट होता तो में मेरे पूरे खानदान के साथ फ़ौत हो चूका होता। हम चारों के जिस्म के चीथड़े और मोटर साइकिल के परखच्चे उड़ जाते। जब हज़रत के सामने उस क़िस्से का ज़िक्र किया तो पहले तो आपके चेहरे पर जलाल के अक्स नुमाया हुए फिर पुर सुकून आप मुस्कुरा दिए और बोले आपको आपके बुज़ुर्गों ने बचा लिया।
उसके बाद कई मरहले
ऐसे आये की सामने वाले को या तो में दिखाई ही नहीं दिया या उसकी आँखों पर पर्दा पड़
गया लेकिन हर क़िस्से को बयान किया तो मज़मून बोहोत ही लंबा हो जाएगा। फिर २०१४ में ज़ाफ़रानी ज़ालिम तरीन हुकूमत आई और तब
तक मज़मून कुशाई में काफ़ी महारत हासिल हो चुकी थी।
मरकज़ से ले कर तो तक़रीबन ज़्यादातर सूबों की हुकूमतों को ख़ुतूत भेज चूका था। केरला, वेस्ट बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर
प्रदेश, निज़ाम ऑफ़ हैदराबाद। ज़्यादातर हूकूमती
नुमाइंदे जान चुके थे।
२०१९ में सीधा मोदी इन्तेज़ामियाँ और अमित शाह को मेरा ख़्वाजा महान. के ज़ारिये चूनौती दे डाली अगर हिम्मत है तो गिरफ्तार करो, या जंग लड़ो लेकिन यह जंग तुम हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत पाओगे।लेकिन इतना सख़्त भारत सरकार के खिलाफ लिखते हुए
भी यह लोग गिरफ्तार करने से क़ासिर रहे। मतलब
कोई तो रूहानी ताक़त मदद कर रही थी कियोंके अब तक पीरो तरीक़त पर्दा कर चुके थे।
लेकिन अब ख़ाकसार को ख़ुद इतना इल्म हो चूका था की वक़्त
के किसी भी शैतान से मुक़ाबला कर सकता था।
कितना ही बड़ा शैतान कियों ना हो ख़ाकसार को कोई तकलीफ नहीं पहुंचा सकता था। फिर २०२१-२२ आते आते तो महसूस होने लगा की कोई तो
ग़ैबी ताक़त है जो मदद कर रही है।
जब ख़ाकसार अकेला बैठा होता तो ऐसा महसूस होता की किसी
ने उसका हाथ पकड़ा है या सर पर हाथ फेरा जा रहा है या कंदे को दबाया है किसी ने पीठ
पर थपकाया है। फिर रात को कभी नींद खुलती तो
अहसास होता की कोई तो सिरहाने और क़दमों के पास लाठी लिए हुए पहरा दे रहा है हिफ़ाज़त
कर रहा है। सोफ़े पर बैठे रहो तो कोई पास आ कर बैठा ऐसा एहसास होता है। साफ़ सोफ़े के दबने का एहसास होता है। बिस्तर पर सोते वक़्त किसी के पास आ कर सोने का एहसास होता है। उसके पेरो से गद्दे के दबने और दूसरी जानिब जाने का एहसास होता है।
रात के वक़्त नमाज़ पढ़ने के लिए उठता तो नल के पानी गिरने
की आवाज़ आती और बाथरूम में ताज़ा पानी दिखाई देता।
फिर लाइट अपने आप जल उठती फिर बंद हो जाती। किसी साये को वज़ू बनाते हुए दुसरे कमरे की जानिब
जाते हुए देखना। यह सब चीज़े ज़ाहिर कर रही थी
की कोई तो रूहानी ताक़त मदद कर रही है। कियोंके
घर में ना ही ख़ौफ़ तारी होता था और ना है मनहूसियत। बल्कि ख़ुशनुमा एहसास और सुकून मिलता था। रिश्तेदार एहबाब फ्लैट में आ कर एक सुकून का एहसास
पाते थे और बोलते थे हमें आपके घर में एक रूहानी सुकून मिलता है। मतलब शैतानियत तो नहीं थी। वोह मुर्शिद के मुअक्किल होंगे जो
हिफाज़त कर रहें होंगे या फिर अल्लाह के फ़रिश्ते।
जिस रूहानी ताक़त को लंगूर लँगूरनियाँ बोलतें हैं की इमरान
खान की एहलिया काला जादू करती हैं टोना टोटका करती हैं तो उन तमाम ऐसी बकवास करने वाले
लंगूर और लँगूरनियों से अल्लाह बदला लेगा।
कियोंके जब भी अल्लाह का बन्दा बद आमाल करता है जादू टोना टोटका हराम काम करता
है तो रब ताला उससे अपनी इबादत का जज़्बा छीन लेता है उस बन्दे को अपने हुज़ूर खड़े होने
का शर्फ़ ही नहीं देता है। दूसरी बात उसके चहरे
पर ऐसी लानत बरसती है जैसी के योगी के चेहरे पर शैतानियत रहती है।उसके चेहरे से अल्लाह नूर छीन लेता है। और उस बन्दे से हर अमल ग़ैर शराई करवाता है।
जहाँ तक इमरान खान की एहलिया बुशरा बीबी का सवाल है उनको
किसी भी ला-महरम ने अभी तक नहीं देखा है वोह हर वक़्त परदे में रहती हैं।
दूसरी बात उनकी
आँखों का फोटो ख़बरनामे में छपा हुआ देखा कितनी पुर कशिश आँखें हैं उससे ज़ाहिर हो रहा
है की वोह किसी भी शैतानी अमल काला जादू टोना टोटका में मुलव्विस नहीं होंगी। नहीं तो उनकी आँखों से एक हेबत तारी होती थी।
मौलाना साद साहब पर भी ऐसे ही इलज़ाम लगाए थे रोहित सरदाना
रिपब्लिक टीवी का एडिटर इन चीफ शर्मा और कई लंगूर लँगूरनियाँ जहन्नुम रसीद हो चुके
हैं। अब बाक़ी बचे हुए लंगूर और लँगूरनियों
से अल्लाह ही बदला लेगा। कियोंके अल्लाह के
वलिओं के ख़िलाफ़ बदकलामी करने वालों उनको बुरा भला कहने वालों उनके ऊपर बोहतान लगाने
वालों के ख़िलाफ़ अल्लाह का एलान ऐ जंग है।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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