Monday, 15 May 2023

शुमाल में "बी" टीम एहम मुख़ालिफ़ बनी।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

इन्तेख़ाब का ख़ुमार और हरारत ख़तम हो चुकी है और नतीजे भी आ पहुंचे हैं।  तमाम हल्क़ों से आलमी ज़ाफ़रानी फ़क़ीर (इंटरनेशनल मुफ़लिस ) ने छोला उठा लिया है और अपने कहे क़ौल ”अरे हम तो फ़क़ीर आदमी हैं, छोला उठा कर चल पड़ेगें जी”  को हक़ साबित करने की कवायत में लग गया है।   

नाज़रीन लेकिन लंगूर-लँगूरनियाँ हैं की उनकी छप्पन इंची छाती से अभी तक ज़ाफ़रानी तंज़ीम के लिए शीरी शहद ही टपक रहा है।  शुमाल में साधू और ज़ाफ़रानी तंज़ीम की फतह पर फूले नहीं समा रहें हैं।  लेकिन हम जैसे तन्क़ीदी और हर मसले पर नज़दीकी नज़र रखते हैं उनको ज़ाफ़रानी तंज़ीम की इस फतह में भी बोहोत बड़ी शाकिस्त नज़र आ रही है। 

 

कियोंके शुमाल में मुस्लिम अक्सरियत वाले हल्क़ों से मजलिस मज़बूत हो रही है और सपा, बसपा कांग्रेस जैसी तंज़ीमें कमज़ोर हो रही हैं।   मुस्लिम अक्सरियत वाले हल्क़ों से मौजूदा मुख़ालिफ़ों को तीसरे दर्जे पर रख कर मजलिस के नुमाइंदों की फतह हर हाल में ज़ाफ़रानी तंज़ीम को फ़िक्रमंद कर रही होगी।  अब अपनी फ़िक्र को कैसे ज़ाहिर करें तो ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियों की वही पुरानी उछल कूद और ज़ाफ़रानी तंज़ीम के बारे में क़सीदे कसने की कवायत का आग़ाज़ कर दिया। 

मेरठ में मजलिस के नुमाइंदे ने ज़ाफ़रानी आतंक और सब्ज़ ग़द्दार सपा से आख़िर मरहले तक जंग में मुक़ाबला किया और बोहोत ही अच्छे से मुक़ाबला जारी था।  ज़ाफ़रानी दहशत और साधू की ज़ाफ़रानी लुंगी आगे से गीली हो गई थी आख़िर मरहले तक जब मजलिस के नुमाइंदे की  लीड कम नहीं हुई तब सब्ज़ ग़द्दार सपा के नुमाइंदे ने मजलिस के वोट में दरअंदाज़ी (घुसपैठ) की और जहाँ मेरठ में तारिख लिखने जा रही थी मजलिस सपा की मुसलमानों के साथ की गई ग़द्दारी की वजह से मजलिस रही दुसरे नम्बर पर और सपा बनी मजलिस की वोट कटुआ।  अब भाजपा की "बी" टीम का ख़िताब सपा को मिलेगा जबकी मजलिस अब ज़ाफ़रानी तंज़ीम के लिए हो गयी है एहम मुख़ालिफ़।      

इतना सब होने के बाद भी लंगूर लँगूरनियाँ हैं की ज़ाफ़रानी तंज़ीम के विक़ार पर कोई हर्फ़ ही नहीं आने दे रहे हैं।  यही Professional misconduct या अपने फ़र्ज़ से ग़द्दारी है।  भाजपा का क़िला पहले से और मज़बूत, भाजपा ने फतह किये कई क़िले।  अरे भाई अंदर की बात बताओ की अब मजलिस पहले के मुक़ाबले मुस्तहकम हो रही है और मौजूदा मुख़ालिफ़ तीसरे दर्जे पर धकेल दिए गए हैं।  क्या यह आने वाले वक़्त में भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।  जो भाजपा, साधू अपने आपको हिन्दू रक्षक बोल कर हर वक़्त मुस्लिम हक़तल्फ़ी करते थे।  उनको मुस्लिम वोट की ज़रुरत ही नहीं थी।  कियोंके सपा, बसपा तो उनके जेब में थी किसी भी मुस्लिम मसाइल पर उनके मुँह से  हुकूमत के ख़िलाफ़ कोई बात ही नहीं निकलती थी।   वोह सभी मुख़ालिफ़ तीसरे दर्जे में चले गए हैं। 

ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के खूँखार जानवर लंगूर-लँगूरनियाँ तो बड़े से बोल रहे थे की अल्लाहाबाद में सर अतीक की शहादत का कोई असर अवाम पर नहीं हुआ। अरे असर कैसे नहीं हुआ मजलिस दुसरे और सपा तीसरे नम्बर पर गई यह असर क्या तुमको नहीं दिखता है। जो सपा उनकी शहादत पर मुँह में दही जमा कर बैठी थी उसको उखाड़ फेंका। आज मेरठ में ११ रकूने बल्दिया कामयाब हुए।  ८३ पार्षद, ३३ रकून बलिदया, २१ कौंसलर, २२ नगर पंचायत के कौंसलर कामयाब हुए। ५ चेयरमैन मुन्तख़िब हो कर आये।   मजलिस के नुमाइंदे सपा बसपा कांग्रेस और किसी दुसरे मुख़ालिफ़ की तरह नाइंसाफी पर मुँह में दही जमा कर नहीं बैठेंगे। शैतान के पुजारी साधु की हर मुद्दे पर पर नींद हराम करेगें।

यह मजलिस के लिए बड़ी कामयाबी है और मजलिस के नुमाइंदे एक सख़्त पुर विक़ार मुख़ालिफ़ का रोल अदा करेंगें और यही है ज़ाफ़रानी तंज़ीम की बैचैन होने साधू की रातों की नींद हराम की एहम वजह।    

सहाफ़ी ज़ुबेर की पेशकश।  

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