Monday, 15 May 2023

अमित शाह को करंट लगाने के बाद मोदी को बदरंग झटका।

अज़ीज़ नाज़रीन

जो कुछ भी कर्णाटक इन्तेख़ाब में हुआ और उसके बाद जो ज़ाफ़रानी जनाज़े निकले हैं उसकी तवक़्क़ो शायद किसी ने भी नहीं की होगी।  ज़ाफ़रानी जनाज़े निकलेगें और ज़ाफ़रानी ज़हरीली फसल का क़त्ले आम होगा यह तो तवक़्क़ो सभी को थी और जिस हिसाब से एग्जिट पोल में ज़ाफ़रानी हार को बताया गया था सभी को मालूम पढ़ गया था की अब इन ज़ालिमों, दरिंदों, नाइंसाफों की हलाकत पक्की है, लेकिन इतनी बेदर्दी से मारे जायेगें किसी को तवक़्क़ो नहीं थी।  कहाँ हुकूमत करने वाली तंज़ीम कहाँ महज़ ६५ नुमाइंदे ही ज़िंदा बचे।  

नाज़रीन इंतेखाब में जितना बड़ा बड़ा यह बीजेपी वाले बोलतें हैं उतना बड़ा झटका इनको सहना पड़ता है।  दिल्ली इन्तेख़ाब में बाहुबली माफिया डॉन अमित शाह बोलता है बटन दबाते वक़्त इतनी ज़ोर से बटन दबाना की कर्रेंट शाहीन बाग़ में लगे। अवाम ने औक़ात दिखा दी की शाहीन बाग़ वाले दुरुस्त थे और तुम नाइंसाफ हो गद्दार हो समाज को हिन्दू मुस्लिम में बाँट रहे हो। 

वही गलती मोदी ने की बजरंगली ज़ोर से चिल्ला कर बटन दबा देना।  अवाम ने औक़ात दिखा दी और बजरंगली ने बोल दिया “Not in my name

नाज़रीन इन ज़ाफ़रानियों की हलाकत और हार के लिए यह ख़ुद ही ज़िम्मेदार हैं।  हर उस मसलें पर मज़हब को घुसा देतें हैं जहाँ उसकी कोई ज़रुरत नहीं होती है।  फिर मोदी हो योगी अमित बीजेपी संघी आतंकी हर मसले पर मुसलमानों से बराबरी करना फिर सियासी बयानबाज़ी करना की हम मुस्लिम हमदर्द हैं।  बजरंगदल को बेन किया गया तो पी.ऑफ.आई को बेन करने की बातें होने लगी।  फिर मोदी ने अपनी जहालत का सबूत दिया जैसा चिल्ला चिल्ला कर चाय फ़रोख़्त करता था वैसे ही बजरंगबली चिल्ला कर बटन दबा देना बोलने लगा। 

इस जाहील कम इल्म इंसान को इतना भी शऊर नहीं की सियासत और मज़हब दोनों को अलहदा रखना चाहिए।  जहाँ सियासत में मज़हब को घुसाया की उसके मुज़िर असरात होंगें।  सियासत करो लेकिन मज़हबी रिवायत को बरक़रार रखते हुए इन्साफ के साथ हुस्ने सुलूक के साथ हर मज़हब को पूरी आज़ादी हो अपने मज़हब की मश्क़ करने की उसको फ़रोग़ देने की। 

लेकिन ऐसी हक़, इन्साफ और पाक सियासत को यह संघी और बीजपी वाले तुष्टिगुण और वोट बैंक की राजनीती बोलतें हैं।  नाज़रीन एक बात देखने में आई है जब जब संघी दहशतगर्दों ने, बीजेपी वालों ने, शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम ने हिन्दू मज़हब के साथ दोग़ला और गद्दारी भरा किरदार अदा किया है उसका नतीजा उनको फ़ौरन मिला है।  पहले राम के नाम पर फरेब मचाया मुस्लिम अवाम का क़त्ले आम किया तो राम नवमी पर आसमानी क़ेहर से सैकड़ों हिन्दू मारे गए।   रामलीला के दौरान राजिस्थान, उत्तरप्रदेश में कई जगह आसमानी आंधी तूफ़ान बिजली गिरने से कई हिन्दू मारे जा चुके हैं। 

वहीँ महादेव के नाम पर फरेब फैलाना शुरू किया और हर मस्जिद में उसका लिंग निकल रहा था।  फिर कावड़ियों के ऊपर केहर टूटा जल ले जाते वक़्त कई कावड़िये मौत के आगोश में चले गए।  बची कूची कसर उसके बाद अम्बरनाथ यात्रा के दौरान कश्मीर में आये तूफ़ान में कम से कम १५००० लोग मारे गए। क़ुदरत ने तमाम तम्बू उखाड़ फेंकें  खाने पीने का सामान बर्तन भांडे सब बहा कर ले गई तेज़ पानी की धार।  

नाज़रीन दिल्ली इन्तेख़ाब से क़ब्ल "का",  एन.आर.सी. की हक़ीक़त अवाम ने बीजेपी को दिखा दी की तुम गलत हो और अब कर्नाटक में हिजाब मसले पर दिखा दिया की तुम ही गलत हो।  यहाँ तक की वज़ीरे तालीम जिसने हिजाब तनज़िये को पैदा किया था उसको अवाम ने क़त्ल कर दिया और उसके साथ क़तल किये गए ११ मतलब कूल १२ वज़ीर क़तल कर दिए गए।  हार गए।   

पहले जंग के मैदान ने हिजाबी गर्ल ने १००-२०० आतंकवादियों से मुक़ाबला किया और अव्वल आई अकेली शेरनी ने जय जय…….. नारे के जवाब में अल्लाह हो अकबर की सदा बुलंद की और उन तमाम दहशतगर्दों को हलाक कर दिया।  तालीम के मैदान में भी हिजाबी गर्ल ने तमाम ज़ाफ़रानी शोहदों को मात दी और मेरिट लिस्ट में अव्वल नंबर पर आई उनसे ज़्यादा किसी भी ज़ाफ़रानी शोहदे गुंडे ऐ.बी.वी.पी. के आतंकवादी में इतनी क़ुव्वत नहीं थी की उनसे आगे चला जाए।  अब सियासत के मैदान में इन ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों का क़त्ले आम। 

इतनी ज़लालत और रूस्वाई के बाद भी अक़ल नहीं आई।  संघी बीजेपी वाले साधू को २०२४ में वज़ीरे आज़म के लिए मुंतख़िब करने की सोच रहें हैं।  हम तो यही दुआ करेगें की २०२४ में इस शैतान के पुजारी साधू को देश की सत्ता मिले।  हमारा बचा कूचा काम यह शैतान ही करेगा।  फिर जिन काफ़िरों को उनके फ़रेबी ख़ुदाओं लंगूर, शैतान महादेव आतंकी राम पर भरोसा है वोह कैसा टूटता है देखना होगा।  मर्यादा परुषोत्तम राम, महादेव और बजरंगली खुद ही इन फ़रेबी और धोखेबाज़ों को मज़ा चखा चूकें हैं।  २०२४ के बाद इन हिन्दू मज़हब के ग़द्दारों को यक़ीन हो जाएगा की एक क़ुव्वत तो ऐसी है जिसका हम भले ही ख़ूब मज़ाक़ बनाये आसमानी किताब हवा लेकिन वही तमाम क़ायनात को चला रही है और वही हिन्दू मज़हब के गद्दारों की मौत की वजह बनेगी। 

वोह इसलिए की किसी शिद्दत पसंद काफिर, संघी दहशतगर्द और बीजपी वाले को यह शिकायत ना रह जाए की अल्लाह ने हमें पूरा मौक़ा नहीं दिया।  पहले नरेंद्र मोदी के नाम पर बोहोत पोंगाते थे उसने १० सालों में खुद हिन्दू समाज और जिस देश भारत से यह झूठी मोहब्बत करतें हैं उसका कितना नुकसान किया है।  अब साधू को लाना चाहतें हैं तो लाओ।  लेकिन हक़ तो एक ही रहेगा अल्लाह।  और तुमको तुम्हारे ही हथियार तुम्हारे ही फौजी और तुम्हारे ही राजा दोवारा मारा जाएगा

सहाफ़ी ज़ुबेर

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