अज़ीज़ नाज़रीन
सहाफ़ी ना तो कोई नूजूमी है और ना है मुस्तक़बिल का हाल बताने वाला कोई बन्दा है। हाँ लेकिन तालीमी आफ़ता तहक़ीक़ात करने वाला एक तालिब है। जो हर मुद्दे पर ख़्वाह दीनी या दुनयावी तहक़ीक़ात करता है और अपनी हतमी राये अवाम के रू बरू रखता है। दौरान तहक़ीक़ात या यूं कहिये की मज़मून कुशाई करते वक़्त बाज़ो औक़ात इस सहाफ़ी को कुछ ऐसे हालात से सामना हो जाता है जो कभी उसने तसव्वुर भी नहीं किये थे।
नाज़रीन दो तस्वीरें आपने सामने पेश कर रहा हूँ।
नाज़रीन अक्सर कुछ पुराने वर्क़ पलटता रहता हूँ फिर उनको अपने अहबाबों और पढ़ने वालों में शेयर करता हूँ। इस तस्वीर में दोनों ही मज़मून २०२० में लिखे गए थे। एक में संन २०२० लिखा हुआ है और दुसरे में कैसे २०२९ हो गया में खुद ही समझने से क़ासिर हूँ। मुझे अच्छे से इल्म है मेने दोनों मज़मूनों सं २०२० लिखा था फिर माह अप्रैल २०२३ को हमारे यहाँ मज़हबी रोज़ा इफ़्तार रखा गया था उस इफ़्तार में जब रिश्तेदारों और क़राबत वालों में बातें चलीं तो फ़ौरन उस मैसेज को कॉपी कर लिया और मेरा ज़ेहन रौशन हुआ की २०२९ का अदद कैसे आ गया जबकी मेने तो २०२० लिखा था।
नाज़रीन एक बात वाज़े है २०२९ में कुछ तो होने वाला है वैसे भी अदद शुमारी जमा और तक़सीम पर सहाफ़ी को यक़ीन है। नाज़रीन एक बात आपके ज़हन नशीन करता चलूँ की कुछ अदद जैसे २,३,५ और ११ सहाफ़ी के लिए ख़ुशक़िस्मत है और एक अदद आगे १२ का माशूक़ के लिए ख़ुशक़िस्मत है। २९ में २+९=११ होता है। फिर २+३+५+१+१=१२ मतलब माशूक़ का अदद आ रहा है। नाज़रीन इस अदद शुमार और हिंसों के ऊपर एक तफ़्सीली मज़मून इससे क़ब्ल शाया कर चूका हूँ। उसमे यही तहरीर किया है सब अदद का खेल है। इस अदद शुमारी का ज़िक्र मेरी नज़मों में भी मिल जाएगा।
अब तहक़ीक़ाती इदारे और अक़्ल वाले इस बात की तहक़ीक़ करें की यह अदद का क्या खेल है और उसको पूरी कायनात पर बारी इलाहा ने कैसे ग़ालिब कर रखा है।
नाज़रीन अदद की एहमियत और कुछ अदद ख़ुशक़िस्मत हो सकतें हैं इस बात का इल्म इस सहाफ़ी को २०१९ में हुआ था। इससे क़ब्ल कभी उसने इतनी शिद्दत से किसी भी अदद को नहीं देखा था या उसका मुताला किया था। लेकिन २०१९ के बाद तो जैसे हर उस चीज़ के अदद का जमा और तफ़रीक़ करने लगा जो सहाफ़ी की ज़िन्दगी को मुत्तासिर करती थी।
सहाफ़ी ज़ुबेर की पेशकश


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