अज़ीज़ नाज़रीन,
मेरठ में हुए हिन्दू ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों के पसंदीदा नग़्मे पर मुस्लिम वतन परस्त मजलिस के रकून बल्दिया के दर्ज एतेराज़ पर ज़ाफ़रानी बीजेपी के दहशतगर्दों का मजलिस के रकूनों पर जान लेवा हमला करने वाली ख़बर पर लिखे मज़मून पर अब सियासत का आगाज़ हो गया है। जिसमे चाँद तारे का भी ज़िक्र था।
नाज़रीन मजलिस एक वतन परस्त और बाबा साहब आंबेडकर के बनाये हुए दस्तूर का पासो लिहाज़ रखने वाली तंज़ीम है। फिर पाकिस्तान जिन्ना ऐसे बेहूदा फ़लसफ़े और तास्सुरात किसी और ने नहीं बल्कि बीजपी की जानिब से ही किये गए थे। जब AIMIM के नुमाइंदों ने उस ग़लीज़ बेहूदा और दहशत को फ़रोग़ देने वाले नग़्मे के ख़िलाफ़ एहतेजाज दर्ज किया तो बीजेपी सियासतदां और रकून राज्यसभा लक्ष्मीकांत वाजपेयी वहीं बीजेपी के पार्षदों का कहना था कि:-
१.
यह जिन्ना को मानने वाले लोग हैं।
२.
यह ओवैसी के लोग हैं।
३.
यह देश का बंटवारा चाहते हैं।
४.
यह दूसरा पाकिस्तान बनाना चाहतें हैं।
५.
जो वंदे मातरम् नहीं गाएगा, उसको मुंहतोड़ जवाब देंगे।
अब में पूछना चाहता हूँ उन तमाम ज़ाफ़रानी गुंडों से जो दहशत की दूकान को फ़रोग़ देतें हैं कहाँ दस्तूर में इस नग़्मे का ज़िक्र है जिसको दहशतगर्द नाथूराम गोडसे, माफ़ी वीर और उसके वारिस गाना फख्र समझते हैं।
जो ज़ाफ़रानी दहशतगर्द धमकी दे रहें हैं, जो यह नगमा नहीं गाएगा उसको मुँह तोड़ जवाब दिया जाएगा। तो में उनसे कहना चाहता हूँ मोहन भगवत में नहीं गाता यह नगमा क्या करते मेरा। मेरे गले पर छूरी भी रख दोगे तो नहीं पडूगा में वन्दे…..
याद रखो ज़ाफ़रानी भेड़ियों तुम्हारी धमकी कांग्रेस, सपा, बसपा, आप जैसे कमज़ोर मुख़ालिफ़ों पर असरअंदोज़ होती होगी और वोह तुम्हारी धमकियों से ख़ौफ़ज़दा होते होंगे लेकिन अब मुक़ाबिल तुम्हारे मजलिस के मुजाहिद हैं तो बेहतर है तुम ज़ाफ़रानी, साधू को मिला कर अपनी तमाम पुरानी ग़लीज़ हरामकारी, नाइन्साफ़ी, क़त्लो ग़ारत, फ़िरक़ापरस्ती और भड़वा गिरी (भगवा गिरी) की आदतें बदल डालो और जान लो तुम्हारे मुक़ाबले में अब गीदड नहीं जो शिकार से बचे हुए सड़े गले गोश्त पर ज़िंदा रहता है बल्कि मजलिस के शेर आये हैं जो दुश्मन को चीर फाड़ डालता है।
दूसरी एक और बात याद रखो मजलिस के नुमाइंदे मुजाहिद हैं और जब भी मुजाहिद जंग में दुश्मन के ख़िलाफ़ यलग़ार करता है तो उसकी सिर्फ़ दो आरज़ू होती है या तो वोह दुशमन के ख़िलाफ़ जामे शहादत पी ले या दुश्मन को सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा दे तबाह कर दे बर्बाद कर दे।
वैसे भी तुम ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों की अब आम सक़ाफ़त तमाम भारत में मशहूर हो चुकी है। जहाँ किसी मुख़ालिफ़ ने दस्तूर, क़ानून की बात की के तुम उसको पाकिस्तानी जिन्ना की औलाद बोल देते हो। भले ही वोह किसी भी तंज़ीम से हो किसी भी मज़हब से हो। किसी ने हुकूमत से अपना हक़ लेने की बात कही की वोह आतंकवादी हो जातें हैं। इसमें भी मज़हब और तंज़ीम नहीं देखी जाती। किसी ने हुकूमत और मोदी से ज़्यादा सवाल किये की वोह हो जाता है अर्बन नक्सल। किसी ने बोहोत सख़्त अलफ़ाज़ में तनक़ीद की के वोह भारत का गद्दार है और बटवारा चाहता है।
२०१४ से तुम दहशतगर्दों, शिद्दतपसंदों ने किया ही क्या है सिर्फ़ पाकिस्तान, मुसलमान, कश्मीर, मंदिर मस्जिद इन्ही मुद्दों पर इन्तेख़ाब जीता है। भारत के बटवारे के ज़िम्मेदार मुखालिफ नहीं बल्कि तुम्हारी तंज़ीम बीजेपी, संघ और हिन्दू अवाम के दिलों दिमाग में भरी हुई ज़हर की वोह शिद्दत होगी जिसकी वजह से तुम जमहूरियत का क़तल करते आये थे। मुख़ालिफ़ों का तो काम ही हुकूमत को हर ख़िलाफ़ ऐ दस्तूर, ख़िलाफ़ ऐ क़ानून काम पर घेरना होता है वोह तो एक मज़बूत जमहूरियत का हिस्सा होता था। जिस जमुहरियत का संघी, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद हिन्दू हर वक़्त दम भरते थे मोदी बेरुन मुल्क जा कर बड़े से बोलता था हम दुनियां की सबसे बड़ी जमुहरियत भारत की नुमाइंदगी करते हैं। दरअसल तुम लोगों ने अदलिया, ऐवान, दस्तूर की धज्जियाँ उड़ा कर उस जमुहरियत को पिजरे में क़ैद कर के एक ज़न्खा बना दिया था।
वोह जमुहरियत एक
ऐसी कमज़ोर मुख़ालिफ़ों के हाथ में थी जहाँ पर किसी ने भी मोदी नामक जल्लाद ज़ालिम तरीन
बादशाह की तानशाही की ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई के होती थी उसको फ़ौरन जेल।
तो तुम्हारा वही पुराना फलसफा पाकिस्तान, कश्मीर, मुसलमान, हिजाब, मस्जिद यह सब अब नहीं चलेगा। कियोंके तमाम अवाम को पता चल चूका है ऐसे हस्सास मसले सिर्फ़ और सिर्फ़ इन्तेख़ाब आने पर ही उठाये जाते हैं। जिनका अवाम की रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी से कोई लेना देना नहीं होता है। ना ही यह मसले एक बेरोज़गार को काम दिलवा सकतें हैं और ना ही बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगा सकतें हैं और ना ही पेट्रोल डीज़ल की कीमतें कम कर सकतें हैं।
रहा सवाल कश्मीर
से ३७० हटाने का मामला तो सिर्फ़ और सिर्फ़ मोदी और बीजेपी ने उस मसले पर अपनी सियासी
रोटी पकाई है और मलाई खाई है। दरअसल मसला ३७०
हटाने का था ही नहीं मसला कश्मीर में पंडितों को आबाद करने का था कश्मीर को भारत का
लाज़मी हिस्सा तस्सव्वुर करने का था। मेरा सवाल
है:-
क्या मोदी बीजेपी संघी दहशत और फौज उस हदफ़ को हासिल कर
पाए
आज कश्मीर में १० लाख से ज़्यदा भारत की फौज मौजूद है २.५ से ३ लाख संघी दशहतगर्द मौजूद हैं तो फिर भी भारत के किसी भी अवाम को वहां जाने से क़ब्ल मरकज़ की इजाज़त की कियों ज़रुरत पढ़ती है।
२०२४ की ज़मीन अभी से मोदी बीजपी और संघी दहशतगर्द तय्यार कर रहें हैं। फ़िज़ूल के मुद्दे ले कर आयेगें और हिन्दू अवाम के दिलों को आलूद से भरेगें। लेकिन उसमे वोह नुकसान भारत का ही करेगें और इलज़ाम मजलिस पर देंगें की भारत का बटवार कर दिया जिन्ना के वंशज पाकिस्तानी वग़ैरा। दरअसल यह बीजेपी वाले संघी ही गद्दार हैं और पाकिस्तान को मदद करने वाले कीड़े। इनसे मोहताद रहो
सहाफ़ी ज़ुबेर
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