अज़ीज़ मुसलमान भाइयों और बहनों,
आज
कल जो हुकूमते हिन्द के ज़ेरे क़ियादत दहशत का माहौल तैयार किया गया है और हुकूमते हिन्द
की रियासती सरपरस्ती दहशतगर्दी की बढ़ती हुई वारदातें सामने आ रही हैं उससे मुमकीना
हिंदुस्तान पाकिस्तान की जंग का इशारा हो रहा है और जंग मुतवक़्क़ों है. तमाम मुसलमानों से मोदेबाना गुज़ारिश की जाती है
की अगर हिंदुस्तान बनाम पाकिस्तान जंग होती है तो मुल्क़ की मोहब्बत में आ कर या बोहोत
ही क़वी और अज़ीम मुल्क है ये जान कर हरगिज़ हरगिज़ दहशत का साथ ना दें. जिसकी तलाफ़ी आपकी अपनी नस्लों को करना पड़े और कफ़्फ़ारा
देना पड़े.
१९४७
के वक़त कश्मीरी अवाम को पूरा इख़्तियार था की वो पाकिस्तान के साथ चले जाएँ लेकिन शेख
अब्दुल्लाह और कुछ ज़मीर फरोश लोगों ने एक काफिर को गले लगाना बेहतर समझा और राजा हरी
सिंह ने भारत के साथ मुहायदा किया. उस मुहायदे
की शर्तों के हिसाब से कश्मीर एक खुदमुख्तार रियासत होगा और उसको मिला भारत में एक
ख़ास दर्जा दफा ३७० और ३५ ए के रूप में. लेकिन
उस खुदमुख्तार दर्जे की आहिस्ता आहिस्ता धज्जिये उड़ाना शुरू कर दी गई. पहले वज़ीरे आज़म के ओहदे को ख़तम किया और सदरे ममलेकत
को ख़तम कर के गवर्नर को वो ओहदा दे दिया गया उसके बाद भी बोहोत से आईनी तरमीम कर के
कश्मीर की खुदमुख्तारी को पस्त और कमज़ोर कर दिया गया. सूरते हाल ये हो गई की २०१९ में ज़ाफ़रानी महाज़ ने
फौजी हमला कर के कश्मीर पे काबिज़ होना चाहा.
हुकूमते
हिन्द के नुमाइंदे आपके पास इस अज़ीयत में साथ देने के लिए आएंगे और बड़े बड़े वादे वईद
की बारिश करेगें. क़ानूनी पेपर्स की बात करेगें आलमी बरादरी का हवाला देंगे की मसला
आलमी बरादरी के सामने आ गया है हम आप लोगों को धोखा नहीं देंगे हमारे साथ मिल जाओ लेकिन
हरगिज़ हरगिज़ उनके किसी भी हीले बाज़ी में ना आना.
दफा ३७० और ३५ ए भी कानूनी पेपर्स हैं और ये मसला भी आलमी बरादरी के सामने था
फिर आज क्या हालात है उसपे नज़र होना चाहिए.
दूसरी
बात जो ये सहाफी जब से खिताबत के मैदान में आया है तब से कई हल्क़ों में कह चूका है कुफ्फार
ला इतबार. इन लोगों पे भरोसा किया तो अपने
दीन और दुनिया से गए. ये लोग वादे की खिलाफ़वर्ज़ी
करने और धोखा देने में माहिर होते हैं. बाबरी
मस्जिद केस में सुप्रीम अदलिया में अपने खुद के दिए हुए हलफनामे की कैसी धज्जिया उड़ाई
की हम मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगें.
तो इन लोगों के किसी भी कानूनी पेपर और किसी भी किस्म के वादे पे यक़ीन ना करना
नहीं तो सख्त ख़सारे में पड़ोगे.
इन
काफिरों को अच्छे से मालूम है की एक मुसलमान से हरगिज़ नहीं जीत पायेगें तो जब कभी भी
किसी मुस्लिम से जंग होती है ख़्वाहा वो जंग ज़ुबानी हो कानूनी हो या अस्लेह के साथ हो
ये लोग मुसलमानों को आगे कर देतें हैं. और आपसे ही आपके मुस्लिम भाई का क़त्ल करवातें
हैं और फिर आपका क़त्ल गले लग के कर देतें हैं.
ये
बात ये इस सहाफी ने जब से होश संभाला है तब से मुतवातिर हर रक़बे में महसूस की है, धोखा
देने में ये लोग सरे फेहरिस्त होतें हैं. अगर
एक अकेला मुसलमान किसी मुलाज़मत में है और इन्तेज़ामियाँ के साथ ना इत्तेफ़ाक़ी हो गई अगर
वो दुनयावी बात पे है तो आपके दोस्त एहबाब आपका साथ देंगे बिल फ़र्ज़ वो मज़हब की बुनयाद
पे है तो वही दोस्त जो आपके साथ खाना खाते थे आपका झूठा पानी पीते थे आपको गले लगाते
थे आपके खिलाफ बयान बाज़ी कर के आपको तनहे तन्हा छोड़ देंगे.
दूसरी
बात जब कभी भी मुस्लिम से मुक़ाबला होता है ये लोग भारत में रहने वाले मुस्लिमों को
आगे कर देतें हैं. क्रिकेट में जब कभी भी पाकिस्तान
से मुक़ाबला होता था तो अज़हरुद्दीन को आगे कर दिया जाता था और उसको बड़े बड़े मारायत से
नवाज़ दिया जाता था. अभी हाल ही में मई २०१९
को हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में ना सिर्फ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ
बल्कि तमाम वर्ल्ड कप के मैचों में मोहम्मद समी ने बेहतरीन कारगरदेगी का मुज़ाहेरा किया
और उसकी बॉलिंग के सबब बंगलादेश और अफ़ग़ानिस्तान पे भारत फतह हासिल करने में कामयाब
हो गया नहीं तो दोनों ही मुल्कों के सामने भारत को ज़बरदस्त शाकिस्त दिख रही थी. लेकिन एक एहम मैच सेमि फाइनल में से मोहम्मद समी
को बहार निकाल दिया गया क्योंकि भारत के काफिर, ज़ाफ़रानी शिद्दत पसंद हरगिज़ ये बर्दाश्त
नहीं कर सकते थे के तवारीख़ के सफों में किसी मुस्लिम को ये एजाज़ हासिल हो के वो भारत
की जीत का एहम किरदार रहा था.
याद
रखिये ये लोग सिर्फ इनके बुरे वक़्त में मीठी मीठी बातें कर के आपको मुस्लिम मुल्क़ के
खिलाफ इस्तेमाल करेगें और जब इनका वक़्त निकल जाएगा और इक़्तेदार फिर से इनके हाथ में
आ जाएगा तो आपका इसतेसाल करेगें. ये ज़ेहनियत
हर काफिर की है फिर आज की मौजूदा दौरे हुकूमत तो ज़ाफ़रानी शिद्दत पसंद काफिर गिरोह से
है. जिसके दिलों दिमाग में इस्लाम और मुस्लिम
अवाम के खिलाफ ज़हर, आलूद और मवाद भरा है, जब एक सेक्युलर काफिर आपके साथ धोखा कर सकता
है, चाहे वो बाबरी मस्जिद हो, १९७१ हो या आपके दीगर मसाइल हों तो ज़हरीला तो सबसे पहले
आपको डसेगा.
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