Thursday, 29 August 2019

मोदी की दहशत के खिलाफ एक जुट हो रहा अवाम

ख़ाना जंगी के मरहले में तेज़ी से गामज़न भारत में पहला हिन्दू दहशतगर्द दिफ़ाई फौजों के हाथों मारा गया.  कश्मीर की दिफ़ा के लिए और ३७० मंसूख़ करने के ख़िलाफ़ खुल के मैदान में आये दिफ़ाई फौजी (नक्सलवादी).

इस रूहे ज़मीन का सबसे बड़ा दहशतगर्द, खबीस और शैतानी अमलियात का मरकज़ मोदी और उसके ३६५ शैतानी पार्लिअमान के ख़िलाफ़ अब अवाम की बैचेनी और मुख़ालेफ़त अपने ऊरूज पे जा पहुंची है.   जिस तरह ३६५ बुतों में हर रोज़ का एक अलग बूत था लेकिन दिफ़ाई फौजी फतह हासिल करने में कामयाब हुए.  उसी तरह से इन ३६५ शैताने पार्लिअमान पे एक दिन दिफ़ाई फौजी कामयाब होंगे.

इस ज़िम्न में कश्मीर की दिफ़ा के लिए अगर कोई सबसे पहले आगे आया है तो वो हैं इंसानियत के दोस्त और ना इंसाफ़ी के दुश्मन पहरेदार अमन के फौजी.  छत्तीसगढ़ में कश्मीर मुद्दे पे और दफा ३७० मंसूख करने के सबब सबसे पहला हिन्दू दहशतगर्द अमन के पहरेदारों से जंग करते हुए मारा गया. 
  
इस सहाफी को तो शर्म आती है मुस्लिम अवाम और उनके रहनुमाओं पे चाहे वो सियासी हलक़े में असदुद्दीन, आज़म खान या अकबरदुद्दीन हों या कोई मज़हबी रहनुमा हों उन्होंने अभी तक कश्मीर मुद्दे पे काहे को कोई एहतेजाजी हिकमत इख्तियार नहीं की है, और हुकूमते हिन्द की दहशतगर्दाना रवैये के ख़िलाफ़ अभी तक कोई एहतेजाज क्यों नहीं मुनक़्क़िद किया.  ये सहाफी अभी तक समझने से क़ासिर है की मुस्लिम अवाम में काहे को इतनी बुज़दिली है और वो मोदी की दहशत से इस क़दर ख़ाइफ़ क्यों हैं की हक़ बात कहने से भी ख़ौफ़ज़दा हो रहे हैं.  


असदुद्दीन जैसे सियासतदां कश्मीर को हिन्दुस्तान का लाज़मी हिस्सा तस्सवुर करतें हैं.  और किसी भी सियासी नुक़्ता ऐ नज़र पे पाकिस्तान के खिलाफ ज़बरदस्त एहतेजाज में तमाम मुस्लिम सियसतदाँ और मज़हबी रहनुमा शाना बा शाना रहतें हैं.  ठीक है पाकिस्तान के साथ सियासत में आप हुकूमते हिन्द का साथ दीजिये लेकिन जब मसला काफिर बनाम मोमिन हो जाए तो आपका फर्ज़े ऊला है की आप इस्लाम और मुसलमान की दिफ़ा के लिए खुल के मैदान में आएं.  और ये हिन्दू बनाम मुस्लिम जंग का आगाज़ किसी भी मुस्लिम नुमाइंदे ने नहीं शुरू किया था बल्कि खुद मोदी और उसके दहशतगर्दों ने इस जंग का आगाज़ किया है.  २०१९ के इंतेखाबात को जिस अंदाज़ में हिन्दू धर्म युद्ध का नाम दे कर ज़ाफ़रानी मिडिया के सहाफियों ने शिद्दत पसंदी का मुज़ाहेरा किया था वो किसी भी बाविक़ार, दानिशमंद, तालीमी अफ्ता और ज़हीन सोच से पोशीदा नहीं है, की इस तरह की सियासी शिद्दत पसंदी और सहाफियों की एक तरफा हिमायत और शिद्दत मुल्क को ख़ानाजंगी की तरफ ले जायेगी.     

ये बात इस सहाफी ने २०१४ में ही मोदी की जीत के बाद महसूस की थी और उसने अपने गुजिश्ता तमाम मज़मून में बिला ख़ौफ़ खुले आम इस बात को मन्ज़रे आम किया है की मोदी को सिर्फ मुस्लिम नस्ल कूशी करने के लिए ही लाया गया है.  जिस अंदाज़ में गुजरात में मुस्लिम अवाम को तबाह किया गया था और दुख्तराने  मिल्लत की अस्मत तार तार की गई थी वही सब अब हिन्दुस्तान में होगा. और हुआ वही जो होना था.  अनगिनत दुख्तराने मिल्लत की अस्मत पामाल कर दी गई, बोहोत सी बच्चिओं की झूट फरेब और धोखे बाज़ी से हिन्दुआना रस्मो रिवाज के साथ हिन्दू दहशतगर्दों से शादी करवा दी गई.   इस प्यार के ज़िम्नी और झूठे जाल में फ़साने के लिए पुलिस और हुकूमते हिन्द के कारिंदे, मुलाज़िम हिन्दू दहशतगर्दों को पूरा ताऊन करतें हैं.  ये हिन्दू दहशतगर्द मुस्लिम बच्चिओं की ज़िन्दगी से खेलने के अपने मिशन पे हैं.  हर एक दहशतगर्द को एक मख़सूस टारगेट दिया हुआ है की तुमको इतनी बच्चिओं की ज़िन्दगी बर्बाद करनी है.   

२०१४ से जिस अंदाज़ में मोदी की दहशत ना सिर्फ मुस्लिम अवाम के ऊपर महदूत रही और उनको तबाह कर रही थी बल्कि हर उस इंसान को उस दहशत की तपिश महसूस हो रही थी जो मोदी के ना ज़ेबा, वाहियात, हरामख़ोरी के हुकुम की खिलाफवर्जी करता हुआ देखा गया.  जिसकी वजह से ज़बरदस्त इन्तेशार पैदा होने का खत्शा हर बार इस सहाफी ने ज़ाहिर किया था.  

जिस अंदाज़ में दिफ़ाई फ़ौजिओं ने हिन्दू देशतगर्दों के खिलाफ जंग का एलान किया है हर मुस्लिम को उनका साथ दे कर इस सरज़मीन को हिन्दू दहशत, ज़ुल्म, शिद्दत, ना इंसाफ़ी से पाक करना होगा. हूजूमी दहशत के ज़ेरे साये हर दुसरे रोज़ एक मुस्लिम, दलित की हलाकत भी किसी से पोशीदा नहीं है. हिन्दुस्तान में हर दुसरे रोज़ मुस्लिम अवाम को हुजूमी दहशत के ज़ेरे साये हलाक़ कर दिया जाता है तब भी मुस्लिम रहनुमाओं की ज़ुबानों पे बुज़दिली का ताला देखा जा सकता है.

बरोज़ हफ्ते २८ जुलाई २०१९ को उत्तर प्रदेश के ज़िल्हा अमेठी में हिंदुस्तानी फौज से किनारा कश हुए मुस्लिम फौजी अफसर अमानुल्लाह को हॉकी, लाठी और त्रिशूल से हुजूम ने तशद्दुत के साथ हमला कर के हलाक कर दिया.   उनका नौ उम्र फ़रज़न्द अपने वालिद की दिफ़ा के लिए आया उसको भी शदीद ज़ख़्मी कर दिया गया था. 

इस हूजूमी दहशत के ठीक एक महीने के बाद २६ अगस्त २०१९ को गुजरात के वडोदरा में एक मुस्लिम पुलिस कांस्टेबल आरिफ इस्माइल शेख पे हिन्दू हुजूम ने दहशत मचाई और उनपे हमला कर दिया.  मुस्लिम पुलिस कांस्टेबल  आरिफ इस्माइल शेख वडोदरा रूरल मुख्यालय में तैनात हैं.  जब आरिफ इस्माइल शेख ड्यूटी खत्म करके अपने घर लौट रहे थे, उनकी दाढ़ी और इस्लामिक हुलिया देख कर कुछ हिन्दू शर पसंद अनासिरों ने उनपे हमला कर दिया.   गनीमत ये रहा की ये दहशतगर्द हमला ज़्यादा तबाहकुन साबित नहीं हुआ और एक और मुसलमान की जान का नुकसान होने से बच गया.  अलबत्ता इस हमले के सबब उनको सख्त तरीन ईज़ा पहुंची और वो सख्त ज़ख़्मी हो गए. 

इस सहाफी का मुस्लिम अवाम के लिए खुला एलान हैमत करो भारतीय पुलिस और काफिर सेना की नौकरी. अभी भी वक़्त है जो कुछ भारत में पाया है उसको इस्लाम की दिफ़ा के लिए इस्तेमाल करो. छोड़ दें सभी मुस्लिम फौजी भारतीय फौज और अपने तजुर्बे का इस्तेमाल दिफ़ाई फौज को मदद करने में दें. ये जंग हक़ और बातिल के माबेन है.   १९४७ से तुम लोगों को अलहदा किया जाता रहा लेकिन २०१४ से अब तो आमने सामने की लड़ाई हो रही है. तो तुम काहे को काफिर हुकूमत का साथ देते हो. क्या मिला तुमको ये सब कर के. दो वक़्त की रोटी एक तमंचा और वो वर्दी जो खुद तुम्हारी हिफाज़त नहीं कर सकती.   गुजरात के इस मुस्लिम पुलिस अफसर के ऊपर हुए हमले पे कुछ लोग बोल रहे थे की ये मुद्दा मज़हब से जुड़ा हुआ नहीं है और जब जांच होगी तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. मेरा सिर्फ इतना सवाल है जब एक पुलिस वाला सरकारी अधिकारी ही महफूज़  नहीं है तो अवाम किस के पास अपनी हिफाज़त की गुहार लगाएगी.   हुकूमते हिन्द तो इंसानी लाशों की ज़मींदार ही नहीं है.  कल ही एक मुस्लिम मौलाना और मदरसा उस्ताद को दिल्ली पे मोबाईल की दूकान के बहार पीट पीट के हलाक़ कर दिया गया है. 

पिछले महीने जिस मुस्लिम फौजी कर्नल को पीट पीट के हलाक कर दिया था, उस ख़बरनामे पे कैसे कैसे तास्सुरात और रूझानात रहे थे. "अच्छा किया", "इन कटुओं को जहाँ देखो मार डालो", "ख़तम कर दो इनकी नस्लों को" "फौज में था तो क्या हुआ था तो गद्दार". वग़ैरा वग़ैरा. भारतीय अवाम ख़ास शिद्दत पसंद हिन्दू तो फ़ौजिओं से बोहोत उन्सियत रखतें हैं फिर सिर्फ मुस्लिम होने पे हिन्दू अवाम के तास्सुर कैसे तब्दील हो जातें हैं.  मुसलमानों और मुस्लिम रहनुमाओं (सियासतदानों और मज़हबी) तुम कितनी ही क़ुर्बानी इन काफिरों और उनके मुल्क़ के लिए दो लेकिन जब तुम्हारा वक़्त पड़ेगा तो सब एक हो जायेगे और तुमको तनहे तनहा छोड़ देंगे. तो तुम भी एक हो जाओ और करो खुल के पाकिस्तान की हिमायत

सिर्फ अब तो पाकिस्तान और दिफ़ाई फ़ौजिओं की मदद करना है. पैसे, ज़ेहनी और जिस्मानी. अगर कोई जवान फौजी है तो भारतीय फौज से इस्तीफा दे कर जंग में पाकिस्तान का साथ दे. वैसे भी ज़ाफ़रानी मिडिया ने २०१९ का इंतेखाब मोदी बनाम दुशमन बना दिया था. जबकि मुखालिफ तंज़ीमें भी हिन्दू ही थी. लेकिन उन्होंने मोदी के मुक़ाबले में चुनाव लड़ने की जुर्रत की तो हो गए वो मोदी के दुश्मन.  

तो इस जंग में तुम भी एक हो जाओ और खुल के दिफ़ाई फ़ौजिओं की इमदाद करो.  और इस हिन्दू दहशत के नासूर को और शैतानी मरकज़ को ख़तम कर दो, सफाये हस्ती से मिटा दो, नेस्त नाबूत कर दो.

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