Saturday, 10 August 2019

ज़ालिम, नाइंसाफ, दोग़ला हाकिम और उसका मुल्क़ बर्बाद था बर्बाद है और बर्बाद ही रहेगा.


इंसान ख़्वाह वो मोमिन हो या काफिर उसके ऊपर अल्लाह की रेहमत उसके अमल पे मुन्तसिर है.  किसी कौम में अगर मजमूई गुनहगारी होगी मजमूई बदकारी होगी तो अल्लाह की रेहमत उस कौम से उठा ली जायेगी.  उसी हिसाब से अगर किसी मुल्क का हाकिम अय्याश, बदकार, हरामख़ोरी मैं मुलव्विस है, दोगला है, ना इन्साफ है, मजमूई क़ातिल है, दहशतगर्दाना ज़ेहनियत है तो उसके अमल का ज़वाल उस मुल्क़ पे आएगा. 
दूसरी बात कोई भी क़ौम या हाकिम ये तस्सवुर ना करे की हम तो बोहोत ही ताक़तवर मुल्क़ हैं और हमारे पास आला किस्म के जंगी साज सामान है हम किसी भी हिमाक़त का माक़ूल जवाब देने के लिए तैयार हैं.  किसी भी फौज के पास जंगी साज सामान और आला दर्जे का असलाह होना कोई फौकियत नहीं रखता है बल्कि उसको इस्तेमाल करने वाले कितने ज़हीन और उनको कितनी महारत हासिल है उसपे डिपेंड करता है.  बिल आखिर सब कुछ सही और दुरुस्त है लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी शामिल हाल नहीं है तो कभी भी कामयाबी तुम्हारे हाथ नहीं लगेगी.  माज़ी की तारिख मौजूद है बड़े से बड़े ज़हीन की ज़हानत छीन ली गई थी, उसके अक़्ल पे पत्थर पड़ गए थे और ख़पत हो गई थी बिल आखिर जंग में हार का मुँह देखना पड़ा.    

अल्लाह की दी जाने वाली नेमत और इनाम किसी भी बन्दे और मुल्क के हाकिम की बदकारियों, बदआमालियों, ना इंसाफ़ी, दोग़ली हिकमत, क़त्ल और गारत के सबब उठा ली जातीं हैं और उस मुल्क को दी जाने वाली नेमतें और इनाम ज़वाल, बर्बादी और तबाही में तब्दील कर दिए जातें हैं और उस मुल्क की तक़दीर बदक़िस्मतों में शुमार हो जाती है. 

आज जिस तरह के हालात हुकूमते हिन्द की बदकारिओं और ज़ाफ़रानी दहशत के सबब भारत के हुए है उसको कौन है जो कुदरत का ज़वाल नहीं बोलेगा.  कुदरत ने भारत को तक़रीबन बर्बाद ही कर दिया है.  क़ुदरती आफ़ात और बलियात से भारत में २०१४ के बाद जितनी हलाकत और बर्बादी हुई शायद वो २००० से लेकर २०१४ तक के सालों में दहशतगर्द वारदातों में भी नहीं हुई होगी. इतना सब कुछ होने के बाद भी अगर तुम अपनी बर्बादी तबाही को तक़दीर समझ रहे हो और ऊपर वाले का केहर नहीं तो ये तुम्हारी नाहीली है. 

जो बात तुम अपने लिए पसंद नहीं करते हो वही बात दुसरे फ़रीक़ के लिए कैसे सही और दुरुस्त हो सकती है.  और ये ही नाइंसाफी और दोग़ली ज़ेहनियत के सबब तुम अज़ाबे इलाही के मुर्तकिब हो रहे हो.
 
बर्बादी ऐ गुलिस्तां के लिए एक ही दहशतगर्द और उल्लू काफी था, ऐवान की ३०३ से ज़यादा सीटें दहशतगर्दों और उल्लूओं से भरी हैं अंजाम में गुलिस्तां क्या होगा. 

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