Wednesday, 14 August 2019

कश्मीरी बेटियों के तहफ़्फ़ुज़ के आगे आये उनके सिख भाई.

अज़ीज़ नाज़रीन,

आपको केदारनाथ के वो पुर नूर चेहरे के सिख पोलिस आई.पी.अस. अफसर याद होंगें जिन्होंने हिन्दू हुजूम की दहशत से एक मुस्लिम (कश्मीरी) नौजवान को ज़िंदा बचाने में कामयाबी हासिल की थी.  हिन्दू दहशतगर्दों ने हमला कर के उस मुस्लिम नौजवान को तक़रीबन हलाक करने के पूरी मसूबा बंदी कर ली थी और उसके ऊपर हमला खैज़ मवाद के साथ हमला भी कर दिया था; लेकिन सही वक़्त पे वो सिख अफसर आये और हिन्दू दहशतगर्दों के हमले को नाकाम कर दिया. 
मुस्लिम नौजावन को ज़िंदा बचाने के बाद अब कश्मीर की बेटिओं के तहफ़्फ़ुज़ का बीड़ा उनके सिख ब्रादरान ने उठाया है.  जहाँ हिन्दू दहशतगर्द मासूम बेटियों के लिए अपनी गलीज़, गन्दी, ओछी ज़ेहनियत का मुज़ाहेरा कर रहे हैं वहीँ सिख अवाम के खालसा निहंग (फोजों) सिख जत्थेदारों ने तमाम अवाम को खुला ऐलान किया है "जो भी कश्मीरी बहनों, व बेटियों की तरफ मैली नजर करें उनको देंगे मुँह तोड़ जवाब."
मज़ीद आगे उन्होंने कहा जो अज़ीयत और ज़ियात्ति सिक्खों ने ८४ में झेली है वो कश्मीरियों के साथ कभी नही होने देंगे,  श्री अकाल तख़त साहिब (सिक्खों की सिरमौर संस्था) से हुक्म जारी हुआ है, हर सिख वतन में कहीं भी अगर कश्मीरी बहन बेटियां मुसीबत में हों तो उनकी हिफाज़त हर कीमत पर करें.
इसी बीच हुकुम पे अमल करते हुए मुख़तलिफ़ सिख तंज़ीमों ने ४ लाख खर्च करके कमों बैश ३२ कशमीरी बेटियों को हवाई जहाज़ से महाराष्ट्र् से श्रीनगर उनके घर महफूज़ पहुंचाया
हुकूमते हिन्द के भारत के ज़ेरे क़यादत कश्मीर के ऊपर फौजी हमला करने के बाद मुल्क़ के मुख्तलिफ हिस्सों में रह रही कश्मीरी मुस्लिम बच्चिओं की अस्मत और जान का खतरा बढ़ गया था.  ख़ास उस वक़्त जब हरयाणा का दहशतगर्द सरगना और उत्तर प्रदेश का हिन्दू दहशतगर्द एरिया कमेंडेन्ट ने कश्मीरी बच्चिओं की इज़्ज़त पे हमला करने की दहशतगर्दों को तरग़ीब दी थी, इन हिन्दू दहशतगर्दों ने गोरी चमड़ी नोचने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की थी.  इन दोनों हिन्दू आला ओहदेदारों के बयान से ये साबित हो गया और खुल के सामने आ गया की हिन्दू अवाम में बेहेन बेटी की क्या इज़्ज़त होती है. 
हिन्दू दहशतगर्दों की गलीज़ और गन्दी सोच को देखते हुए अब अपनी कश्मीरी बहनों के तहफ़्फ़ुज़ के लिए उनके सिख भाई आगे आये हैं और उन्होंने साफ़ अलफ़ाज़ में कहा है और अज़्म किया अगर कोई भी हमारी कश्मीरी बेहेन बेटिओं की जानिब गन्दी और गलीज़ आँखों से देखेगा तो हम उसकी आँखे नोच लेंगे और उनको मुँह तोड़ जवाब देंगे।  हम ८४ में सब कुछ भोग चुके हैं लेकिन कश्मीरी बहनों के साथ वो सब नहीं होने देंगे जो हमारी बेहेन बेटिओं के साथ हुआ.
एक तरफ सिख और मुस्लिम हैं और दूसरी तरफ हिन्दू अवाम.  सिख और मुस्लिम दूसरों की बेहेन बेटी की इज़्ज़त की कभी भी धज्जिया नहीं उड़ाते और उनकी इज़्ज़त करते हैं.  कभी भी किसी हिन्दू की जवान बेहेन बेटी मुस्लिम और सिख के साथ अपने आपको मेहफ़ूज़ समझ सकती है.  जबकि हिन्दू तो खुद अपनी भाभी के साथ हमबिस्तर होता है.  वो भाभी जो माँ के जैसी होती है उसको ही देवर अपनी जागीर समझ के इस्तेमाल करता है.  वही दूसरी तरफ नव रात्रि में जवान बेहेन का खुद उसके सगे भाई इस्तेमाल करतें हैं.  जैसी ज़ेहनियत ये लोग अपनी खुद की बहनों और भाभी के लिए रखतें है वैसी ही ज़ेहनियत इनकी दूसरो की बेहेन बेटी के लिए होती है.
दफा ३७० हटने के बाद कश्मीरी लड़कियों को लेकर मीडिया में बीजेपी सियासतदाओं और सोशल मीडिया पे शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम के बच्चिओं के साथ दहशत करने के आ रहे मुतनाज़ा बयानों के चलते अकाल तख्त के एक जत्थेदार ने बरोज़ जुमे को सिख अवाम से कश्मीरी लड़कियों की तहफ़्फ़ुज़ की गुज़ारिश की है। 
नाज़रीन आपको नहीं भूलना चाहिए की कठुआ मजमूई अस्मतदरी के बाद किस तरह से बीजेपी के वज़ीर हिन्दू ज़िनाकारिओं के खुल के हिमायत में आ गए थे.  इस मामले में ना सिर्फ वज़ीर बल्कि काले कोट वाले गुंडों और उनकी दहशत भी किसी से पोशीदा नहीं है.
राम कदम नाम का बीजेपी का घाटकोपर बम्बई से कानून साज़ आपको याद होगा जो गोकुल अष्टमी पे गोविंदाओं को ये तरग़ीब देता है की जो भी लड़की पसद आये हमसे आके कहो अगर वो शादी से इंकार करेगी तो हम उसको घर से उठवा लेंगे और तुमसे शादी करवा देंगे.  अब जिस समाज में मस्तूरातों के लिए ज़ेहनियत ही गन्दी हो और उस समाज के ज़हन में एक बच्ची को देख के सिर्फ उसमे उनको सेक्स ही नज़ार आता है और उसके जाती आज़ा को देख कर इन जैसे जिन्सी भेड़िओं के दिलों दिमाग में भरी जिन्सी ख़्वाहिश अवाम, चादर और गली कूचों में गंदगी मचाने की अलावा और कुछ नहीं करती है.  अब तक २०१४ के बाद जितने भी ज़िना बिल जब्र और गिरोह गर्दन ज़िनकारी हुई उसमे ८०% ज़ानी या तो बीजेपी, संघ  या फिर किसी और दूसरी हिन्दू दहशतगर्द तंज़ीम से ताल्लुक़ रखते थे.  
इस दौरान जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि खुदा ने सभी इंसानों  एक जैसे हुक़ूक़ दिए हैं। इसी वजह से किसी के भी साथ जींस, ज़ात और मज़हब की बुनयाद पे इम्तियाज़ करना गुनाह है। उन्होने मज़ीद दफा ३७० को हटाने के बाद सोशल मीडिया पर कश्मीरी बच्चिओं के खिलाफ जिस तरह की बयानात मुंतखिब नुमाइंदे कर रहे हैं वो बेहद बेशर्मी भरी और भद्दे हैं।  उन्होंने किसी भी शख़्स या ब्रादारी का नाम लिए बग़ैर कहा कि कश्मीरी मस्तूरात को निशाना बनाने वाली ये वहीं भीड़ है और ठीक उसी तरह रद्द अमल कर रही है जैसा १९८४ दंगो के दौरान उन्होंने सिख ख़्वातीनों के खिलाफ की थी।

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