Monday, 19 August 2019

भारत की तक़सीम का हुआ आगाज़.


भारत की तक़सीम का आगाज़ हो गया है और सबसे पहले जो हिस्सा टूट के अलग हुआ है वो है नागालैंड.  नागालैंड ने अपनी आज़ादी का एलान कर के १४ अगस्त को अपना जश्ने आज़ादी मनाया.  नागालैंड भारत के साथ हुए अइनी मुहायदे और क़रार के हिसाब से एक खुदमुख्तार रियासत था, जो हर साल भारत की जश्ने आज़ादी और जश्ने जमुहरिया में शाना बा शाना शामिल होता था. जिसके ऊपर क़ानून और दूसरी शराइत भारत की थी लेकिन उनको अपनी एक अलग हैसियत हासिल थी.  

लेकिन जिस हिसाब से कश्मीर में भारतीय फौज ने हमला कर के उसपे क़ब्ज़ा किया है उस तशवीशनाक हमले से खित्ते की तमाम छोटी रियासतें और मुल्क़ ख़ौफ़ज़दा हैं, और सबसे पहले नागालैंड ने इस साल भारत के साथ १५ अगस्त को जश्ने आज़ादी में शामिल ना होने का फैसला किया और उसने अपना आज़ादी का जश्न भारत से एक रोज़ क़ब्ल १४ अगस्त को बनायादूसरी बात जो अइनी मुहायदे और क़रार कश्मीर के जैसे दिगर सूबों के साथ भारत ने माज़ी में किये थे अब उन सभी सूबों को खत्शा पैदा हो गया है जिस तरह से  कश्मीर को फौजी हमला कर के भारत का हिस्सा बना लिया गया वही सब हमारे साथ भी हो सकता हैक्या पता एक रोज़ क़ब्ल तक हम खुदमुख्तार होंगें और दूसरी सुबह हुकूमते हिन्द के ज़ेरे गुलामक्या पता रात को सोएं आज़ाद सूबे में और जागे गुलामी की ज़ंजीरों में.  तमाम हालात पे पैनी नज़र रखते हुए और तवील गुफ्तगू सलाह के बाद नागालैंड ने अपने आपको आज़ाद रियासत का एलान किया और इस साल भारत की जशने आज़ादी में शरीक हुए बिना अपनी आज़ादी का जशन भारत की आज़ादी से एक रोज़ क़ब्ल बनाया और अपने वतन का अलहदा झंडा फेहराया ना की भारत का तिरंगा.

भारत की मुख़्तलिफ़ खुदमुख्तार सूबे और बर्रे सग़ीर की आज़ाद रियासतें, भारत की फौजी कारवाही को जाइज़ ठहराने के लिए वज़ीरे खारजा की जानिब से ऑटोमिक जंग की धमकी से काफी परेशान और ख़ौफ़ज़दा हैं.  अब तो भारत के दिगर खुदमुख्तार सूबे और और बर्रे सग़ीर की आज़ाद रियासतें ये सोचने पे मजबूर हैं आज कश्मीर है कल ये दिन हमारे ऊपर भी आ सकता है. जब भारत अपने खुद के खुदमुख्तार सूबों पे फौजी हमला करके अपनी हुकूमत को बढ़ाने की भूख को ख़त्म कर रहा है फिर हम तो पराये हैं.  उस फौजी हिकमते अमली को जाइज़ ठहराने के लिए ऑटोमिक जंग जैसे जाहिलाना बयानत से ना सिर्फ कश्मीर बल्कि खित्ते के तमाम मुमालिक, अमन पसंद अवाम, दानिशमन्द, तालीम साज़ और सियासतदाँ ख़ासे ख़फ़ा हैं.   जिसके सबब कुशत ख़ून, ख़ालफ़शार होगा और खित्ते में तबाही.   

इस ज़िम्न में ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम ने हुकूमते हिन्द के आला ओहदेदारों से राब्ता क़ायम करने की कोशिश की लेकिन कोई भी इस मसले पे खुल के जवाब देने की हालत में नहीं है.  लेकिन एक बात तो ते है जिस तरह से हुकूमते हिन्द एक तानाशाह ज़ेहनियत से काम कर रही थी कश्मीर की फौजी कारगरदेगी और नागालैंड के बाद आसाम और दिगर ख़ुदमुख़्तार सूबों को अपने तहफूज़ के बारे में सोचने पे मजबूर कर देंगें.

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