Thursday, 22 August 2019

अमेरिका में हुआ भारत ज़लील, कश्मीर में ना जाइज़ ताल्लुक़ात क़ायम करने और क़ब्ज़े पे मिली फटकार

यूं अस. के क़ानून साज़ों ने भारत को हुकुम दिया की कश्मीर पे अपने क़ब्ज़े का दावा फौरी ख़त्म करे.


हुकूमते हिन्द के कब्ज़े वाले कश्मीर में अवाम की आवाज़ का गला घोंटने और बन्दूक, तोपखानों के ज़रिये दबाने की यूं अस कानून साज़ों सख्त अलफ़ाज़ में मज़मत की है.  यहाँ तक की सहाफिओं को ख़बरें शाये करने नहीं दी जा रही हैं.  उनकी कारगरदेगी और भारतीय फौज की बर्बरियता, अवाम पे बे इख़्तेयार गोलीबारी और तहक़ीक़ाती वीडियो, फोटो वग़ैरा भी ज़बरदस्ती बन्दूक की नौक पे डिलीट करवा दिए गए.  अब जब कश्मीर मुद्दा बेन अक़वामी परेशानी का बाइस बन गया है तो यूं अस कांग्रेस के कानून साज़ों ने दिल्ली सल्तनत से फौरी क़ब्ज़ा ख़त्म कर के अवाम को रू बरू आ के अपनी बात रखने और कहने का हुकुम जारी किया है.
कांग्रेसमैन और हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमीटी के चेयरमैन ऐडम स्मिथ ने यूं अस में भारत के सफीर को बरोज़ मंगल तलब कर के ज़बरदस्त फटकार पिलाई.   उन्होंने साफ़ अलफ़ाज़ में कहा "हम कश्मीर पे पैनी नज़र बनाये हुए हैं और हुकूमते हिन्द के खुदमुख्तार दर्जा ख़तम करने के बाद कश्मीर में उठे हालात की निगरानी कर रहे हैं."
उन्होंने कश्मीर में अवाम की आवाज़ को फ़ासी देने और मीडिया का ब्लैक आउट करने कर्फ्यू नाफ़िज़ करने और मज़ीद फौज के भेजने पे भी सख़्त तशवीश ज़ाहिर की है. 
उन्होंने ने मज़ीद आगे कहा खित्ते की घेराबंदी के सबब अवाम की हक़तल्फ़ी हो रही है और उनको अलेहदा किया जा रहा है.  उनका किसी भी बाहरी दुनियां से राब्ता कायम नहीं हो पा रहा है.
जैसे ही जनाब स्मिथ ने भारत को थप्पड़ मारा और एक जमुहरियाती मुल्क़ में तानाशाह ज़ेहनियत को हलाक करने के लिए बन्दूक की गोली की तरह चुभते हुए तीखे सवाल किये फौरी एक के बाद एक भारत को थपड़ों की सौगात मिलने लगी.
एक और क़ानूनसाज़ और कांग्रेसमैन यवेत्ते ने कहा मोदी को कोई हक़ नहीं है जैसा की वो घाटी की अवाम के साथ कर रहा है.
सीनेटर बॉब मेनेंडेज और कांग्रेसमैन एलियट अल. एंगेल चेयरमैन बेरुन मुल्क़ मामलात ने एक मुताहिदा बयान जारी किया है.  जिसमे कहा गया है की हुकूमते हिन्द के कश्मीर पे पैदा करदा हालात पे एक्शन लेने की बात कही गयी है.

सहाफी जुबेर का मसले पे नुक़्ता ऐ नज़र

हालात बिलकुल वैसे ही हो रहे हैं जैसी की इस सहाफी का दिसम्बर २०१३ से तशख़ीस और ताज़िया था.  इस सहाफी ने अपने बोहोत सी डिबेट में शक ज़ाहिर किया था की अगर हालात नहीं सुधरे तो भारत को अलाइड हमले से रू बरू होना पड़ेगा और भारत के ऊपर मुत्तहिदा फौजें हमला कर सकतीं हैं.  इस सहाफी के बयान का संघी और शिद्दत पसंद मज़ाक बनाते थे और हसी मज़ाक करते थे.  कहते थे की मोदी जी इक़्तेदार में आने वाले हैं फिर सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा.  पाकिस्तान को चार टुकड़ों में तोड़ देंगें और अमेरिका मोदी की ताक़त और क़ुव्वत के सामने सजदा रेज़ हो जाएगा.    

शुरआत में हुआ भी वैसा ही जैसा की संघियों की सोच थी और मोदी को उसके सबसे पहले अमेरिका दौरे पे रेड कारपेट मिला.  ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूरों ने मोदी के ऊपर सनसनी खैज़ ख़बरों को शाये करना शुरू कर दिया. लेकिन किसी को उस वक़्त गुमान भी ना होगा की मोदी अपने वक़्त के सबसे बुरे दौर से गुज़रेगा.  बेरुन मुल्क़ इज़्ज़त अफ़ज़ाई  पाने के बाद उसके खुद के मुल्क़ में ज़िल्लत का सामना करना पड़ेगा.  भारत के ताज़ा हालात ठीक वैसे ही हैं जैसे के किसी ज़माने में मुत्तहिदा फौजी हमले के पहले इराक़ और अफगानिस्तान और ड्रोन हमले के क़ब्ल पाकिस्तान के थे.

यूं अस के १० कानून साज़ों का भारत पे बयान मायने रखता है.  अब भारत को अपनी फौजी बेड़े को वापिस बुलाना ही पड़ेगा और भारत की ज़ेरे इन्तेज़ामियाँ कश्मीर पे से अपना दावा ख़ारिज करना ही पड़ेगा अगर भारत ऐसा नहीं करता है तो सख़्त जंग के नताइज बर्दाश्त करना पड़ेगें.  भारत की अवाम मोब लीचिंग में मुलव्विस रहती है, भारत में बढ़ते हुए लीचिंग मामलात के सबब भारत "लचिस्तान" बन गया है.  लेकिन जल्द ही भारत मोब लीच कर दिया जाएगा अगर उसने कश्मीर पे से अपना दावा खारिज नहीं किया.   कश्मीर अब ना तो भारत का लाज़मी हिस्सा रहा, और ना ही उसके ऊपर अब भारत को कोई कानून बनाने का हक़ है.

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