शिद्दत पसंद, तानाशाह मोदी को सहाफी जुबेर का खुला ख़त.
तानाशाह मोदी आपने जिस तरह के हालात भारत में कर दिए हैं, उसमे किसी भी बा इज़्ज़त शहरियों, ताजिरों, काश्तकारों, खातूनों, दानिशमंदों, तालीम साज़ों (प्रोफेसरों और स्कॉलर्स) का रहना दूभर हो गया है. आपके ज़ुल्म, सितम और तशद्दुत की तपिश ना सिर्फ अवाम का एक तपका भोग रहा है बल्कि हर उस इंसान को आपके जब्र और बर्बरियत का सामना करना पड़ता है जो आपके ख़िलाफ़ हक़गोई की आवाज़ को बुलंद करता है और आपकी ना इंसाफ़ी, बेईमानी, दोगले और मुत्तसिब चेहरे पे लगा हुआ वतन परस्ती का नक़ाब खींच के इन्साफ के परचम को बुलंद करता है.
जिस तरह से आप वतन परस्ती का नक़ाब पेहेन के बदकारियों और हरामकारी में मुलव्विस थे अब आपके वो तमाम पोशीदा गुनाह और आपके
कारिंदों
की बदकारियाँ बदआमालियाँ रातों की तारीकी में मस्तूरातों पे किये जाने वाले गुनाह और हरामखोरी ज़ाहिर हो चुकी है.
आप एक निहायत ही नाहेल, निकम्मे और बदकार हुकुमरान साबित हुए जिसको ना ही अवाम की परवाह है और ना ही वतन से मोहब्बत पस अपने अना को क़ायम रखने का जज़्बा और अपनी तंज़ीम के मफ़ात की खूब परवाह है. आपको इस हक़ीर को गिरफ्तार करने की १५ दिनों की मोहलत आज तारिख २१ अगस्त २०१९ को ख़त्म हो चुकी है. इस हक़ीर ने अपने एक मज़मून
मेरा ख़्वाजा महान. में आपको ललकारा था की १५ दिनों के अंदर इस हक़ीर फ़क़ीर को गिरफ्तार
कर के
दिखाओ. आपकी तमाम ततबीर ना काम साबित हुई. आपके पास अज़ीम फौज के होते हुए अज़ीम तालीमी आफ़ता
तहक़ीक़ाति
इदारों के होते हुए भी आप गिरफ्तार करने से क़ासिर रहे. ऐसा नहीं है की आपने कोशिश नहीं की बेइंतेहा कोशिश की. हम को लोकल में सादे कपड़ों
में आपके
खुफिया महकमे के लोग तलाशते रहते थे. हमारे घर के चारों तरफ आपने सादे कपड़ों में ख़ुफ़िया पुलिस का जाल बिछा रखा था. आपके नुमाइंदे हमारे ऑफिस तक पहुंच गए थे. हमारे दोस्त अहबाब रिश्तेदारों के घरों पे दबिश दी गई उनको डराया घमकाया गया जो लोग हमारे मज़मून पढ़ते थे उनको डराया गया धमकाया गया की हमारे मज़मून पढ़ना बंद करें नहीं तो कारवाही होगी. लोगों को लालच दिया गया गिरफ्तारी के लिए हमको धोखे से किसी मख़सूस जगह पर बुलवाने
के लिए उनसे ज़ोर डलवाया गया. लेकिन जैसा की हमने हमारे मज़मून में कहा था आपकी हर ततबीर बे असर साबित होगी. चेहरे बदल दिए जायेगें और आपकी अक़्ल पे पत्थर पड़ जायेगें आपकी सोचने समझने की ताक़त और क़ुव्वत छीन ली जायेगी. फिर जब आपकी हमको गिरफ्तार करने की
तमाम
ततबीर नाकाम साबित हो तो इक़्तेदार मुसलमानों के हाथ में दे देना.
ऐसा भी नहीं है की इन १५ दिनों के चैलेंज के बाद हम रूह्पोश हो गए थे या पोशीदा हो गए थे. नहीं हरगिज़ नहीं बल्कि हर वो काम किया जिसको के आपके क़ानूनी किताबों में वतन के ख़िलाफ़ जंग का एलान करने का जुर्म बनता है, १५ अगस्त को जब आप योमे आज़ादी का जश्न मना रहे थे तब हमने वाट्सअप को सियाह परचम के साथ खूब ना ज़ेबा नारा
लिखा
था. मक़सद ये ही था के आप कही ऐसा जवाज़ ना ले लें की हम किस बुनयाद पे इसको गिरफ्तार करते और आपकी हर ततबीर की नाकामी पे फरारी इख्तियार ना
कर लें.
अब
जब आप हमको छु भी नहीं पाए जैसा की हमने आपको चैलेंज किया था तो १५ दिनों के खात्मे
के बाद आपके खिलाफ ये हुक्म जारी होता है और आपको ये हुकुम दिया जाता है की आप इस हुकुमनामे को वसूल होने के बाद तीन चीज़ों पे फौरी अमल करें.
१. या तो आप दाखिले इस्लाम हो जाएँ.
२. या आप वतन की सरपरस्ती किसी मुस्लिम नुमाइंदे को सौंप दें.
३. या मुस्लिम रियासत के साथ जंग
लड़ें.
मुस्लिम नुमाइंदों में इस सहाफी की तीन पसंद हैं.
१. असदुद्दीन
ओवेसी
२.
आज़म खान
३.
अकबर उद्दीन ओवेसी.
कश्मीर
मुद्दे पे एक राय मुस्लिम अवाम को उर्दू, इंग्लिश और हिंदी में पहले ही भेजी जा चुकी
है की माशी, तिब्बी और ताक़त के ज़रिये खुल के पाकिस्तान का साथ दें.
Advisory for Muslims of India.
०५
अगस्त २०१५ को दिल्ली में हमने अपने आपको आपकी पुलिस के सुपुर्द कर दिया था वो भी हमारी
हिकमत थी ताके आपको हमारे पीरो मुर्शिद का करम और बुज़ुर्गानें दीन के बारे में अच्छे
से वाक़फ़ियत हो जाए. जिस जुबेर की गिरफ्तारी
पे आप लोग ख़ुशी से नाच गा रहे थे झूम रहे थे उसको आपकी पुलिस २४ घंटे तक भी पूछ ताछ
नहीं कर पायी और आखिरकार २० घंटों में ही बग़ैर अदालत में पेश किये उसको जाने दिया.
ना
ही आपकी पुलिस ने हमको गिरफ्तार किया था और ना ही आपकी पुलिस में इतनी हिम्मत थी. मने अपने आपको खुद पुलिस के हवाले किया था ताके
आप जान सकें की जो काम आप जैसे तानाशाह नहीं कर सकते वो वली ऐ कामिल कर सकतें हैं. अल्लाह ने अपने ख़ास बन्दों को कुछ इनामात अता किये
हैं उसमे शामिल है रूहानी ताक़त जो आप जैसे शैतानों, मुजरिमों, ना इन्साफ, क़ातिलों के
लिए हर दौर में मुसबित का बाइस होतें हैं.
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