नाज़रीने गिरामी,
मुल्के हिन्द के मौजूदा हालात बेहद कशीदा और तशवीशनाक हो चलें हैं। हर जानिब क़ेहरे इलाही देखने को मिल रहा है। तमाम शुमाल ज़ेरे आब है। ताहम, बिहार, गुजरात महाराष्ट्र इस क़ेहरे क़ायनात से अछूते नहीं रह सके। इतनी बर्बादी और तबाही के बाद भी इन ज़ाफ़रानी भेड़ियों की चर्बी कम नहीं हो रही है।
सूबे शुमाल (उत्तर प्रदेश) का वज़ीरे दरिंदा छोटा शैतान अपने मुँह से गंदगी खारिज किये बग़ैर रह नहीं पा रहा है। दरअसल जब उसकी हुकूमत की नाकामी की पोल एक ही मानूसन में खुल गई। जब इस बात की मालूमात तमाम एहले नास को हो गई की उसका बिलडोज़र का दाँव फ़िर्क़ापरस्ती और मुसलमानों से बदले की हिकमते अमली पर मब्नी था। जब तमाम मुल्क की मुख़ालेफ़ीन ख़ास मजलिस के सरबराह असदुद्दीन ओवेसी ने उसके ऊपर ज़ोरदार हमला बोला और बेरुन मुल्क की सहाफत ने इस जल्लाद, क़ातिल, दरिंदे को आलमी कटघरे में खड़ा किया तो आ गया अपनी फटी पुरानी रद्दी पेपर वाले की औक़ात पर। इस बार फिर से अवाम के ज़हन को मुत्तसिब करने के लिए आबादी के तनासुब से किसी ख़ास फ़रीक़ को मुरीदे इलज़ाम ठहरा कर ऊल जलूल बयान बाज़ी करने लगा।
अब इस जाहिल गवार को इतना भी इल्म नहीं की मुस्लिम अवाम की आबादी का तनासुब गुजिश्ता १५ से २० सालों में कम हुआ है ना की बढ़ा है। अलबत्ता हिन्दू आबादी का मुस्लिम आबादी के मुक़ाबले में इज़ाफ़ा हुआ है। यह जानकारी कोई भी मरकज़ी हुकूमत के सेहत इदारे या वज़ीरे सेहत से हासिल कर सकता है। लेकिन ऐसा कहते हैं ना की, जिसकी माँ ने जन्म ही अपने बच्चे को मंदिरों के महंतों की मेहरबानी से दिया हो तो उस मनहूस मरदूत की ज़ेहनियत भी गाये के पिछवाड़े जैसी ही हो जाती है। इधर साधू ने हगना शुरू किया उधर भक्तों के दिमाग़ का कीड़ा मुसलमानों की निस्बत से कुलबुलाने लगा। यह तमाम भी पड़े लिखे तो होते नहीं हैं। मंदिरों की चौखट और महंतों की मेहरबानी से पैदा हुए होते हैं। तो इनके अंदर भी इल्म और ज़हानत कहाँ से आएगी। जो बड़े शैतान मोदी मझले शैतान अमित और अदना शैतान योगी ने बोल दिया वहीँ इन ग़ुलामों के लिए सही और दुरुस्त हो जाता है।
इस अदना शैतान (आदित्यनाथ) को कोई बताये की आबादी का तनासुब किसी एक फ़रीक़ के बढ़ जाने से नहीं बिगड़ेगा बल्कि तेरी गन्दी और ग़लीज़ सोच और ज़ेहनियत से बिगड़ेगा। तू अपने जानकारी इदारे से मालूमात हासिल कर तेरे वज़ीरे दरिंदा बनने के बाद इन ८ सालों में कितने हिन्दू क़ुदरती क़ेहर और हादसात में अकाल मौत मारे गए। सबसे ज़्यादा अगर कोई सूबा भोग रहा है तो वोह तेरा ही सूबा है।
कश्मीर भारत सरकार के हाथ से निकलने के पीछे बोहोत बड़ी वजह ही ज़ाफ़रानी तंज़ीम के वज़ीरों, संघी दशहतगर्दों और भारतीय फौज के कश्मीरी अवाम के लिए ग़ैर ज़रूरी बयान बाज़ी थी। फिर कश्मीरी अवाम को बदनाम करने की निस्बत से उन बयानों को ब्रेकिंग न्यूज़ बोल कर चलाने की ज़ाफ़रानी मीडिया की हिकमते अमली। नतीजा क्या निकला कश्मीरी अवाम तो बदनाम नहीं हुए बल्कि कश्मीर ही भारत के हाथ से चला गया।
क्या बोलते थे लंगूर और लँगूरनियाँ कश्मीर में यहाँ भी आज़ादी के नारे लगे वहां भी आज़ादी के नारे लगे और हर कश्मीरी इनको संग बाज़ या पत्थर बाज़ ही दिखता था। कर दिया अलग कश्मीर को भारत से अब इनको चेन आ गया।
वही
ग़लती और ग़फ़लत का आगाज़ मुस्लिम अवाम के लिए भारत में हो रहा है, जैसा कश्मीर के लिए
हुआ था। कश्मीर पर भी समझाया था और भारत के
लिए भी समझा सकता हूँ। ना माने तो होगा वही
जो होना है। संघी दहशतगर्द जुमे की निस्बत
से ऊल जलूल बकवास कर रहा है।
शुक्रवार को वोह पत्थरवार नहीं बल्कि मोहब्बतवार बनाने की हिमायत कर रहा है। उसको कहना चाहता हूँ जब हमारी मांगें हुकूमत पूरी नहीं करेगी तो अवाम के अंदर एक ग़ुस्सा और ग़म भरा रहेगा। तू बोल बड़े शैतान मोदी, मझले शैतान अमित या अदना शैतान योगी से की गिरफ्तार करें उस गटर की पैदाइश नूपुर शर्मा और नवीन जिंदाल को नहीं तो सहें सब कुछ जो हो रहा है।
नाज़रीन एक और अहम जानकारी ज़ाफ़रानी तंज़ीम की निस्बत से हाथ लगी है। यह तंज़ीम मुस्लिम नौजवानों को अपनी तंज़ीम में शामिल कर के उनसे अदना ज़ात वाले अफ़राद या OBC का क़त्ल करवा रही है। एक जानिब अपने ही कारकूनों को ज़ुबान से ऊल जलूल बकवास करने को कहती है फिर मुस्लिम अवाम को इश्तेआल अंगेज़ी के लिए आमादा करवाती है। अपने आला ज़ात कारकूनों को तो मेहफ़ूज़ कर लेती है और मुस्लिम अवाम से अदना ज़ात या OBC का क़त्ल करवा देती है। ऐसा करने से गिरफ्तार मुस्लिम हो जातें हैं और अदना ज़ात वालों की आबादी घाट जाती है।
अभी तक २०१४ से क़ब्ल और उसके बाद दहशतगर्द हमलों के अंदर ज़ाफ़रानी तंज़ीम और संघ का नुमाया किरदार ज़ाहिर हुआ है। यह बात अलहदा है की अभी तक सिर्फ पत्तों को ही तोड़ा गया बल्कि इस दशहत की जड़ों तक कोई भी हूकूमती नुमाइंदा नहीं पंहुचा पाया सिर्फ हेमंत करकरे। जिनको शहीद ही इसलिए करवाया की अगर वोह होते तो बड़े बड़े मगरमच्छ मोदी, आडवाणी, योगी, अमित शाह जेल के अंदर सड़ रहे होते।
और
बेरुन मुल्क इसराइल तक इस दहशत के तार जुड़े होने का पर्दा फाश हो जाता था। सो उनको शहीद करवा दिया। अरे जब भारत को आज़ाद करवाने वाले शख़्स महात्मा को
इन दहशतगर्दों ने नहीं बक्शा अपनी हुकूमत अपनी साख बचाने के लिए फौज को नहीं बख्शा
तो एक सरकारी नुमाइंदा किस खेत की मूली है।
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