Saturday, 23 July 2022

शिव लिंग की दहशत के बाद कावड़ियों की दहशत।

 नाज़रीने गिरामी,

झूट फरेब फ़ैलाना दंगा फसाद करना दुसरे मज़हबी अवाम का क़त्ले आम करना हिन्दू शिद्दत पसंदों, संघी दहशतगर्दों और बीजेपी वालों की यह एक आम  आदत होती है।  ताहम २०१४ के बाद ऐसे झूटी सच्ची बातों पर ख़ास मज़हब के अवाम को हरासा करना गिरफ्तार करना या उनका क़तल कर देना यह तो एक आम हिन्दू रिवायत हो गई है।  बच्चा चोरी, गाये चोरी, लव जिहाद, लड़की छेड़ना, गोमांस, तब्लीगी, शिव लिंग निकला हनुमान मंदिर यह कुछ एक ऐसे फरेबी बातें हैं जिनमे अनगिनत मुस्लिम अवाम को अपनी जानों की क़ुर्बानी देनी पड़ी है।   तब्लीग़ी जमात और बाबरी मस्जिद किसी मंदिर को तोड़ कर बनाया गया है इन मुद्दों पर अदलिया ने कौन सच्चा और कौन झूटा इस का पर्दा फाश कर दिया है।  फिर भी इन साजिशी काफिर अनासिरों को अक़ल नहीं आ रही है।  अदलिया के बाद अब मालिके कायनात की इन ग़द्दारों, एहसान फरामोशों को बदला देने की बारी है।

जैसा की हिन्दू शिद्दत पसंदों का एक आम रूझान है झूट फरेब लाद कर किसी ख़ास फ़रीक़ को हलाक किया जाए तो इस बार कावड़ दहशतगर्दों ने जम कर बवाल काटा।  मेरठ के कंकरखेड़ा में नेशनल हाइवे नंबर-५८ पर कांवड़ियों की दहशत इतनी की तमाम सड़क को जाम कर दिया.  इलज़ाम लगाया अमन पसंद मज़हबी लोगों पर की उन में से दो ने कावड़ पर थूक दिया है।   सूबे शुमाल की पुलिस भी इतनी मुस्तहिद की बग़ैर किसी तहक़ीक़ात के एक शख्स को फ़ौरन हिरासत में ले लिया। 

अब इन काफ़िर ज़ालिमों के झूठ का पर्दा फाश करतें हैं।  माजरा क्या हुआ है दिल्ली-देहरादून हाइवे पर राजस्थान के रहने वाले कांवड़ियों ने इलज़ाम लगाया कि उनकी कांवड़ पर दो नावाक़िफ़ अफ़राद ने थूक कर कांवड़ को तोड़ दिया है। 

पुलिस ने आनन फानन में एक शख़्स को गिरफ्तार कर लिया और पुलिस चौकी में ले कर आई।  पुलिस ने इस बात की ज़हमत नहीं दिखाई की दरअसल माजरा क्या है।  क्या वाक़ाई किसी ने कावड़ पर थूका था।  महज़ गिरफ्तारी इतने पर भी इन कावड़ के दहशतगर्दों का दिल नहीं भरा उनको तो असल में दंगा फसाद करना था खून बहाना था सो यह आतंवादी उस मासूम शख़्स को उनके हवाले करने की ज़िद करने लगे।  और जब इन काफिरों के खून की प्यास इनकी देवी दुर्गा के जैसी पूरी नहीं हुई तो इन आतंकवादिओं ने पुलिस चौकी को आतिशे नार कर दिया।  और पुलिस के ऊपर हमलावर हो गए।  इस दहशत के हमले में इन कावड़ियों ने काई निजी गाडिओं को तोड़ फोड़ डाला आग लगा दी और हूकूमती जायदाद को ज़बरदस्त तरीके से तेहेस नहस कर या तो  तबाह कर दिया या आग लगा दी।    

कावड़ के आतंकवादिओं के हमले तेज़ होते देख मज़ीद पुलिस फाॅर्स बुला ली गई और आला पुलिस अधिकारी आतंकवादी हमले की जगह पहुंच गए।  बाद में सूबे के एस.पी. ने कहा की कोई नावाक़िफ़ अफ़राद कावड़ को इज़ा पहुंचा सकता है इस खदशे को देखते हुए कांवड़िओं ने बवाल मचाया था।  मतलब कावड़ तोड़ दिया गया यह बात झूट पर मब्नी थी।  कावड़ टूटा ही नहीं है महज़ शक की बुनयाद पर दहशतगर्द हमला कर दिया।  गाड़ियों को आग लगा दी पुलिस चौकी आतिशे नार कर दी।  हूकूमती साज सामान को आग लगा दी।  फिर जो शख्स गिरफ्तार किया गया था उस मासूम का क्या बना।  जब उसके कोई गुनाह ही नहीं किया तो उसको क्यों आज़ाद नहीं किया गया। 

नाज़रीन ऐसे ही हर  झूट  पर  यह  काफिर  अपनों  को  गवाते  रहेगें . अब  इसका  भी अंजाम भयानक तरीक़े से इन कावड़िओं को मिलेगा।  कोई क़ियों थूकेगा  इनके  कावड़  पर।  इस तरह की ज़लील और साजिशी हरकतें तो  हिन्दू शिद्दत पसंदों, संघी दहशतगर्दों और  BJP वालों  की होती हैं।  दुसरे  के  मज़हब  को  कोसना  गन्दी ग़ाज़ीज अदना ज़ुबान बोलना  उनके  मज़हबी  पेशवाओं  को  गाली गलोच  करना।  कावड़ पर थूक दिया कावड़ तोड़ दिया यह सब उस ख़ौफ़ का नतीजा है जो इनको इनकी मौत के रूप में दिख रहा है।  इसीलिए ऐसी झूठी  सच्ची  कहानी  बक  रहें  हैं।  लेकिन हर  बार जैसे इन कट्टरपंथी  काफिरों  का  झूट  का  पर्दा  फाश  हो  रहा  है  मारे  जा  रहें  हैं  इस बार भी होगा।  लेकिन इतना ज़लील और रुस्वा होने के बाद भी अक़ल नहीं  आ  रही  है. कश्मीर  में  मुस्लिम  पुलिस  वालों  को  शहीद  करने  का  इलज़ाम  आज़ादी के जंगजूओं पर  लगाया  था।  मेने  उस  ख़बर  पर बोला था  की  यह  संघी  दहशतगर्दों का  काम  है  हमारा  नहीं  है।  इस झूट का  जवाब  ऊपर  वाला  इन  काफ़िरों  और  आतंकी  हुकूमत  को  जल्द देगा।   उसके  दो  दिन  बाद  मोदी  नेपाल  गया  और  भारत  का  वफंद का  हवाई जहाज़ क्रेश हो गया।  २४  भारतियों समेत कुछ नेपाली भी हलाक हो गए।

अम्बरनाथ यात्रा से क़ब्ल हर शिद्दत पसंद में बोहोत अंगार दिख रही थी हर मस्जिद में शिव लिंग निकल रहा था। उस झूट फरेब का जवाब ख़ुद इनके महादेव ने दे दिया जब अम्बरनाथ में १५ हज़ार शिव भक्तों को हलाक कर डाला। क्योंकि उन्होंने ही दुसरे के मज़हब पर झूट लादा था। अब कावड़ियों की बारी है। जैसा अम्बरनाथ यात्रा बंद हुई वैसे ही कावड़ यात्र बंद करो। जितना झूट फरेब फैलाओगे उतना ही गवाओगे।  जितना भोकोगे उतना भोगोगे।  

Zuber

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...