ना ही शैतान कुर्सी पर अपना बस्ता रखता और ना ही बात उसके ऊपर आती।
नाज़रीने गिरामी,
जैसा की मुस्लिम अवाम के ऊपर इलज़ाम तराशी की जाती है और उनको हर मुद्दे पर लंगूरों की टोली बदनाम करती है, लेकिन मेरा सहाफत में आने का मक़सद लगता है मुकम्मल हो रहा है। कियोंके हर उस मुद्दे पर सच्ची और दुरुस्त खबर अवाम के रू बरू पहुंच जा रही है, जिनमे मुस्लिम अवाम को बदनाम किया जाता है। अब अवाम बख़ूबी जान रहा है की कौन शर पसंद है कौन अमन पसंद है। कौन क़ानून का एहतेराम करने वाला है और कौन क़ानून तोड़ने वाला है। हर बार ऐसा ही होता आया है शैतान की तरह चाशनी की बूँद दिवार पर लगा कर उसको दंगा फसाद में तब्दील कर दिया जाता है क़त्ले आम हो जाता है लंगूर लँगूरनियों की टोली तमाम शर और फसाद का ज़िम्मेदार मुस्लिम अवाम को ठहराते है। जब तक हक़ीक़त और तहक़ीक़ात निकल कर आती है अदलिया में सच्चाई सामने आती है तब तक बोहोत देर हो चुकी होती है। और जो बदनामी मुस्लिम अवाम की इस्लाम की निस्बत से लंगूर और लँगूरनियाँ कर चुके होते हैं वोह अवाम के दिलों दिमाग़ में चस्पा हो जाती है।
मसला इन्तेज़ामियाँ की जानिब से हुकुम नाफ़िज़ करने का है। जब योगी इन्तेज़ामियाँ ने हुकुम नाफ़िज़ कर दिया की कोई भी मज़हबी रिवायत रोड पर नहीं होगी और ख़ास कावड़ियों को हिदायत दी थी की ना कोई तलवार, भाला, बल्लम, लाठी ले कर चलेगा और ना ही ते शुदा रस्ते की ख़िलाफ़वर्ज़ी करेगा।
फिर वही हुआ जिसका खदशा था। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कावड़ यात्रा निकालने को लेकर यकायक दो मज़हबी अवाम आमने सामने आ गए। हुआ यह की कांवड़ियें अपना ते शुदा रास्ता छोड़ कर मुस्लिम मोहल्लों से निकल रहे थे। बड़ी तादात में दुख्तराने मिल्लत ने चारपाई लगाकर रास्ता बंद कर दिया। जिससे कांवड़िये न निकल सके। मुस्लिम ख़ातूनों का इलज़ाम है कि कांवड़ यात्रा तय शुदा रस्ते से नहीं निकल रही थी. काफी देर तक बहस और हंगामा होता रहा.
दरअसल, मुरादाबाद के बिलारी में थाना सोनकपुर के ग्राम इब्राहिमपुर में कांवड़ियों ने अपना रास्ता तब्दील कर दिया और गांव की ही मुस्लिम हल्क़े से निकलने लगे। दुख्तराने मिल्लत ने जब देखा तो उनका रास्ता रोक दिया. अब दोनों ही मज़हब के अवाम आमने सामने आ गए और टकराव की हालात पैदा हो गई। मज़ीद पुलिस फाॅर्स बुला ली गई और बमुश्किल तमाम दोनों ही फ़रीक़ों को समझा बूझा कर मसले का हल निकाला गया।
अब
मसला वही है जब योगी इन्तेज़ामियाँ ने एक हुकुम नाफ़िज़ कर दिया की कोई किसी के मज़हबी
अक़ीदे को चोट ना पहुचाय। और ऐसा काम ना करे
की दुसरे मज़हब के अवाम को दुशवारी का सामना करना पड़े। तो फिर कावड़िये ते शुदा रास्ता छोड़ कर मुस्लिम हल्क़े से काहे को
निकलने लगे। मतलब साफ़ ज़ाहिर हो रहा है शर फैलाना
और दंगा फसाद करना मक़सद था।
दुख्तराने मिल्लत ने जो किया बिलकुल सही किया। क्या तमाम क़ाइदे क़ानून सिर्फ मुस्लिम लोगों के लिए ही हैं। जबकी योगी ने सख्त हिदायत दी है की कावड़ यात्रा में कोई भी गैर क़ानूनी काम नहीं होना चाहिए। ना ही तलवार ले कर कोई चलेगा और ना ही ते शुदा रुट का रास्ता भंग करेगा। अगर ऐसा कोई करता है तो उसके ऊपर क़ानूनी कारवाही होगी। इन ख़ातूनों ने रास्ता रोक लिया अब बारी पुलिस और इन्तेज़ामियाँ की है। करें क़ानूनी कारवाही और डाले जेल में।
वैसे दुख्तराने मिल्लत को ही अब हर मुद्दे पर मोर्चा संभालना पडेगा। कियोंके जो मर्द थे उनको जेल में डाल दिया है। जो बचें हैं वोह मुस्लिम मर्द तो अब ज़न्खे हो गए हैं उनको हुकूमत ने पीट पीट के दुम्बा बना दिया है बदिया बकरा। वोह अब सिर्फ हुकूमत की चाटुकारिता के लिए ही बचे हैं। जैसा की मुनाफ़िक़ बाबरी मस्जिद का क़ातिल डाकू इक़बाल अंसारी। बोलता है की नमाज़ पढ़ने वाले साजिशी हैं। इनको गिरफ्तार कर के जेल में डालो जब इन्तेज़ामियाँ ने हुकुम नाफ़िज़ कर दिया की नमाज़ खुले में नहीं पढ़ना है फिर भी हुकुम की ख़िलाफ़वर्ज़ी कर रहें हैं तो इनके ऊपर एक्शन होना चाहिए। अब उस मुनाफ़िक़ छक्के से में पूछता हूँ कुछ इन गैर क़ानूनी कांवड़िओं पर भी बोल दे।
नाज़रीन एक बात तो ते है की मुस्लिम अवाम कभी भी ख़ुद हो कर किसी को तकलीफ नहीं देते और ना ही किसी भी दुसरे मज़हबी रिवायत को, अक़ीदे को ईज़ा पहुंचाने जैसा अमल करतें हैं। हाँ लेकिन जवाब देना खूब आता है। अब अगर कोई तलवार ले कर सर पर खड़ा हो जाएगा की बोल जय जय श्री....... नहीं तो सर क़लम कर देंगे तो हो सकता है वोह मुस्लिम उस काफिर का ही सर तन से जुदा कर दे।
फिर
अगर झूट फरेब धोके बाज़ी से किसी मस्जिद को शिव लिंग बोल कर ग़सप करने की साजिश करेगा
तो हो सकता है उसके जवाब में कोई मुस्लिम शिव लिंग के ऊपर ही कुछ बोल देगा। फिर आस्मां तक उछलने वालों से सवाल वही है की शुरूवात
किस ने की थी। तुमने तो क़सम खा रखी है इस्लाम
को नीचा दिखाने के लिए मुलसमानों की मस्जिदों को ग़सप करने के लिए हेंड पंप की भी पूजा
करवा दोगे तो उसके ऊपर लोग हसेंगे भी और मज़ाक़ भी बनायेगें।
बात वही है शैतानी फितरत। एक क़िस्से के साथ बात को ख़तम करता हूँ। एक मुफ़्ती आलिम साहब ने शैतान से सवाल किया तू इतने फसाद दंगे करवाता है क़त्लो ग़ारत करवाता है तुझको क्या मिलता है। उसने बोला में कहाँ करवाता हूँ यह इंसानी फितरत है की झगड़ते रहतें हैं। उसने कहा में तुमको दिखाता हूँ में कुछ नहीं करता। आप मेरे साथ हलवाई की दूकान पर आईये।
चुनाचे दोनों हलवाई की दूकान पर पहुंचे। शैतान ने हलवाई के अलावे से चाशनी की एक बूँद ले कर दिवार पर लगा दी। फिर दूर खड़ा तमाशा देखने लगा। अब उस बूँद पर मक्खी आई, मक्खी को देख कर छिपकली उसको पकड़ने आई, छिपकली को देख कर हलवाई की बिल्ली उसके ऊपर लपकी, बिल्ली को लपकते देख कर दूकान के बाज़ू में बैठा एक कुत्ता उस बिल्ली के ऊपर लपका और हुआ यह की छिपकली, बिल्ली, कुत्ता हलवाई के अलावे में गिर गया। अब दोनों फ़रीक़ों के बीच बेहेस शुरू हुई हलवाई कुत्ते के मालिक से हर्जाना मांगने लगा। कुत्ते के मालिक ने उलटा हलवाई से हर्जाना मांगने लगा क्योंकि बिल्ली हलवाई की थी। और उसको देख कर कुत्ता लपका था। बात हाथा पाई तक पहुंच गई और लठ तलवारे निकल गई।
अब शैतान ने यह सारा माजरा देख कर मुफ़्ती साहब से बोला अब आप बताइये की इन सब में मेरी कोई गलती है में अब यहाँ से चला। लेकिन सवाल तो वही उठता है की चाशनी की बूँद दिवार पर तो शैतान ने ही लगाई थी और मक़सद भी वही था की झगड़े को फरोग मिले।
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