Sunday, 3 July 2022

हर मंसूबा तबाह हर हिकमत नाकाम।

अज़ीज़ नाज़रीन,

ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट टीम की आ गई तफ्तीश रिपोर्ट।  जिसको सहाफी जुबेर की क़ियादत में टीम जुबेर के वफंद ने बरोज़ हफ्ते ०२ जुलाई २०२२ को दफ्तर में जमा किया है।  जैसा की हर मुद्दे पर पहली तहक़ीक़ाती रिपोर्ट ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम की होती है फिर वही बात हूकूमते हिन्द और ऑफिसियल तहक़ीक़ाती इदारों की होती है। 

नाज़रीन संघ इसके ऊपर गुजिश्ता एक हफ्ते से हमारी जानिब से काफी कुछ तहरीर किया जा रहा था।  वैसे तो हर मुद्दे पर पहली नज़र संघी दहशत पर ही होती है लेकिन कन्नैया एपिसोड के बाद ख़ास नज़र थी।  और जो तहक़ीक़ात में पाया वोह बेहद चौकाने वाला था।  दरअसल संघी दहशत परदे के पीछे से हिन्दू मुस्लिम दंगा करवा कर तमाम भारत में खून रेज़ी करने की साजिश थी। 

हम किसी भी मुद्दे पर पुलिस या इन्तेज़ामियाँ को सिर्फ एक हिंट दे देतें हैं।  अगर ज़हानत होती तो आज हिंदुस्तान की हालात और कुछ होती।  बरोज़ २३ जून २०२२ को हमने तमाम हिन्दू दानिशमंदों, हिन्दू वूक्ला, ATS चीफ, हिन्दू तालिबे इल्म को तीन भजन कान्हा के ऊपर शाया किये थे।  वोह ३ भजन सहाफी प्रज्ञा मिश्रा जी को भी सांझा किये थे।    

टीम जुबेर को कन्नया के क़तल के बाद इस बात का एहसास होना शुरू हुआ की अब हिंदुस्तान में ज़बरदस्त दंगे करवाने के अपने मिशन पर हिन्दू दहशत संघ आ चूका है।  फिर जब मज़ीद तहक़ीक़ात की तो पता चला की लंगूर और लँगूरनियों को छाती कूटने और अपने बाल नोचने के लिए ज़बरदस्त मोटी रक़म दी गई है।  जो उनके हर रोज़ के बुलेटिन या महाना तन्खा से अलहदा है।  इन लंगूरों को हिदायत थी की ऐसा बवाल मचा दो की हिंदुस्तान में हिन्दू मुस्लिम दंगे हो जाए जैसा की आज़ादी से क़ब्ल कलकत्ता में १९४६ में ज़बरदस्त दंगे हुए थे। 

जब वोह हिकमत नाकाम हो गई और कहीं से कोई भी दंगे फसाद खून रेज़ी की खबर नहीं आई तो मसले में पाकिस्तान की शिराकत कर डाली तब भी कुछ नहीं हुआ तो इस्लामिक तंज़ीम दावते इस्लामी को दाख़िल कर दिया।  मक़सद वही था आलूद की मिक़्दार उस हद तक बढ़ा दी जाए की दंगे हो ही जाएँ।   जब तब भी कुछ नहीं हुआ बिल आखिर लंगूर लौट आये अपनी पुरानी औक़ात पर और यह एक देहशती हमला था।  और मुजरिमों को ऐसी सज़ा मिले जो एक दहशतगर्द को मिलती है। 

जब तमाम मक़सद ना काम होते दिखे और यह ज़ाफ़रानी ज़हरीले कीड़ी दंगा भड़का कर खून से हिंदुस्तान को सुर्ख करने में नाकाम साबित हुए तो अब सिर्फ कुलबुलाने के सिवाए कुछ ना कर सके।  वही घीसी पीटी खबरे चलाते रह गए। 

नाज़रीन हमने हमारे एहले ख़ाना को क़राबत वाले मेम्बराने जूरी को बरोज़ १९ जून २०२२ को एक मुजर्रब अमल बता दिया था।  जिसको पढ़ने से वोह बन्दा अपने रब के हिफ़ाज़ती घेरे में आ जाएगा। 

फिर वही पैग़ाम २८ जून २०२२ को सुब्हा ९ बज कर ११ मिनिट पर तमाम हमारे पैरोकारों एहबाबों और मुस्लिम दानिशमंदों को भेज दिया।  जब कन्नैया का क़त्ल हुआ और लंगूर लँगूरनियों ने बरहना नाच करना शुरू किया तब हम पुर एतेमाद थे की अब तमाम मोमीन अल्लाह के हिफ़ाज़ती घेरे में पहुंच चुके हैं। 

अल्लाह का करम हुआ कहीं से कोई नाज़ेबा इत्तेला की कोई जानकारी नहीं है।  और ज़ाहिर हुआ की यह तमाम रस्म अल ख़त संघी दहशत का किया हुआ था।  जिस मुजरिम को पुलिस ने गिरफ्तार किया है वोह संघ का जंगजू निकला।  और उसके मरासिम ज़ाफ़रानी तंज़ीम बीजेपी से थे।  कोई शक नहीं वोह हिन्दू शिद्दत पसंद ही होगा।  जैसा की गोडसे ने महात्मा का क़तल करने से क़ब्ल अपना खतना करवा लिया था। हाँ याद आया खतना के ऊपर भी इन चार पांच रोज़ में कमेंट शया किया है। 

उस मुजरिम की तफ़्तीश पूरी तरह से करने की ज़रुरत है।  यह बात ज़ाहिर हो गई की पूरी प्लानिंग संघ के इशारे पर की हुई थी।  अब लंगूर लँगूरनियाँ उछल कूद करते फ़िरे।  लेकिन मुजरिम ना तो जमाते इस्लामी मुस्लिम तंज़ीम से मुनसलिक था और ना ही उसका पाकिस्तानी लिंक है।  हां दहशतगर्द लिंक हैं वोह भी हिन्दू दहशतगर्द संघ से लिंक है।  

लेकिन अल्लाह के फ़ज़ल से तमाम हालात गिरफ़्त में हैं क़ाबू में है शैतान, रावण और मुजरिम पकड़ा गया है।  पुलिस और जांच एजेंसियों को मोहताद हो कर काम करने की ज़रुरत है।  किसी भी बेगुनाह मोमीन को बेजा परेशान और हरासा करने की कोशिश ना करें।  मुजरिम को ना बख्शें।  चेतावनी है।  ना माने तो होगी यलग़ार। 

Zuber

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